Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 10:1 लूका 10:2 लूका 10:3 लूका 10:4 लूका 10:5 लूका 10:6 लूका 10:7 लूका 10:8 लूका 10:9 लूका 10:10 लूका 10:11 लूका 10:12 लूका 10:13 लूका 10:14 लूका 10:15 लूका 10:16 लूका 10:17 लूका 10:18 लूका 10:19 लूका 10:20 लूका 10:21 लूका 10:22 लूका 10:23 लूका 10:24 लूका 10:25 लूका 10:26 लूका 10:27 लूका 10:28 लूका 10:29 लूका 10:30 लूका 10:31 लूका 10:32 लूका 10:33 लूका 10:34 लूका 10:35 लूका 10:36 लूका 10:37 लूका 10:38 लूका 10:39 लूका 10:40 लूका 10:41 लूका 10:42



लूका 10:29 परिप्रश्न: “तो मेरा पड़ोसी कौन है?” — धर्मी ठहराने की इच्छा बनाम पड़ोसियों की पारस्परिकता
मुख्य व्याख्या: यहाँ prompted सवाल “मेरे पड़ोसी कौन है?” धर्म की परिभाषा को ठहरे हुए नियमों से पूछता है, पर यीशु उत्तर देते समय पड़ोसी की परिभाषा को व्यापक कर देते हैं। धर्मी ठहराने की चाह एक व्यक्ति-आत्मक लक्ष्ण है; पर यीशु हमें यह दिखाते हैं कि सच धर्म प्रेम, दया और निर्णायक कदम उठाने में है जो दूसरों के जीवन को छेड़ते हैं, भले ही वे किसी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति से हों।
पाठ के साहित्यिक संदर्भ
यह उद्धृत प्रश्न एक लज्जित मनःस्थिति को प्रकट करता है—मानो व्यक्ति खुद को नियमों के अनुरूप ठहराने के लिए पड़ोसियों को सीमित करना चाहता हो। यीशु ने इसे एक अवसर के रूप में लिया ताकि पराक्रम नहीं, आशीर्वाद और दया की परिपाटी स्थापित हो। बाइबल के अन्य हिस्सों में भी यह सिद्धांत मिलता है कि परमेश्वर की नज़र न्याय और प्रेम पर है, न कि सिर्फ कानून के सही पालन पर।
तत्वगत विचारधारा
प्रश्न के पीछे दो भाव हैं: (1) धर्म की आत्म-स्वीकृति बनाम दूसरों के प्रति क्रिया—क्या मैं सिर्फ अपने धर्मी ठहरने के लिए जवाब ढूंढ रहा हूँ, या पड़ोसियों के वास्तविक जरूरतों के प्रति संवेदनशील हूँ? (2) पड़ोसी की सीमा कैसे तय हो—क्या यह केवल समानता में है या हर उस व्यक्ति तक extending है जिसे हम सामान्यतः अलग मानते हैं? यीशु का उत्तर इस बात पर जोर देता है कि प्रेम का दायरा बड़े से बड़ा हो, क्योंकि वह परमेश्वर के दयालु चरित्र का भागीदार बनता है।
आध्यात्मिक महत्व
यह पाठ इंसान की न्यायप्रियता की आड़ में छिपे अहंकार पर चोट करता है। धर्मी समझना कि मेरे पड़ोसी कौन हैं, तब तक अधूरा है जब तक मैं प्रेम से उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कदम नहीं उठाता। यह उद्धार का सामाजिक आयाम है—हम सभी एक समुदाय का हिस्सा हैं जिसे ईश्वर प्रेम की कहानी में बांधते हैं।
पवित्रशास्त्र से संबद्ध दृष्टिकोण
यह कथन अन्य शास्त्रों से संगत है जो कहता है कि प्रेम का पूर्ण कानून है: दूसरे के सुख-दुख में सहभागिता; और न अपने हितों के पीछे, बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप जीवन जीना।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप) और उनके प्रभाव
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य fråद्धर इस बात का प्रमाण है कि परन्तु धर्मी ठहराने की चाह से अधिक महत्वपूर्ण है पड़ोसियों के प्रति प्रेम, दया और क्रिया-रूप में सहभागिता। सही धार्मिक जीवन वह है जिसमें हम अपनी सुरक्षा-सीमाओं को पार कर के जरूरतमंदों के लिए उपयुक्त कदम उठाते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस के संकेत और संक्षिप्त उद्धरण
अगर आप चाहें, आप अगली जगहों से इस विषय पर गहराई से पढ़ सकते हैं: दयालुता के महत्व को स्वरूप देने वाले उदाहरण,_neighbors की व्यापक परिभाषा, और एक दूसरे के साथ व्यवहार के ईमानदार मानक।
नोट: यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों से संक्षिप्त, आवश्यक संदर्भात्मक उद्धरण शामिल किए जा सकते हैं—but केवल यदि वे उपलब्ध हों और उनका पूरा पाठ उद्धृत न किया जाए।