Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 10:1 लूका 10:2 लूका 10:3 लूका 10:4 लूका 10:5 लूका 10:6 लूका 10:7 लूका 10:8 लूका 10:9 लूका 10:10 लूका 10:11 लूका 10:12 लूका 10:13 लूका 10:14 लूका 10:15 लूका 10:16 लूका 10:17 लूका 10:18 लूका 10:19 लूका 10:20 लूका 10:21 लूका 10:22 लूका 10:23 लूका 10:24 लूका 10:25 लूका 10:26 लूका 10:27 लूका 10:28 लूका 10:29 लूका 10:30 लूका 10:31 लूका 10:32 लूका 10:33 लूका 10:34 लूका 10:35 लूका 10:36 लूका 10:37 लूका 10:38 लूका 10:39 लूका 10:40 लूका 10:41 लूका 10:42



लूका 10:36 — "अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा?"
अस्थायी संदर्भ: यीशु ने दाऊदी शक्तियों के विषय पर एक उत्तरकथा सुनाई और तीनों चित्रों के बीच एक प्रश्न रखा—जो भी इन तीनों में हाथ आए, वही डाकू के पड़ोसी का मतलब बनता है। अंततः उत्तर आता है, "उसका पड़ोसी" वही है जो उसके लिए दयालु रहा। इस पाठ का पीछा हमें न केवल परम मित्रता की दिशा दिखाता है, बल्कि ईश्वर की करुणा और प्रायः अनदेखे लोगों के प्रति उत्तरदायित्व की गूंज भी सुनाता है।
नतीजा और संदेश: ईश्वर का प्यार और विश्वास
यह पद हमें याद दिलाता है कि पड़ोस के साथ व्यवहार करना केवल व्यवहारिक नियम नहीं, बल्कि प्रेमभाव का उद्घोष है। ईश्वर के राज्य में सही धर्म वही है जो पड़ोसी के दुःख को पहचानकर उसे सहायता दे। भगवान की दृष्टि में दया और करुणा पूर्णता है, और यह दया सीमाओं से परे फैलती है—किसी सीमा पर नहीं रुकती।
की-शब्द और दृश्य व्याख्या
संख्या-सार और क्रॉस-रेफरेंस
1) मिस्र के दासों के पीछे करुणा की दृष्टि: यह पाठ ईसाई समुदाय को सिखाता है कि प्रेम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए है।
2) एडम क्लार्क की टिप्पणी के अनुसार, पड़ोसी की परिभाषा सक्रिय सेवा और व्यक्तिगत निर्णयों में प्रकट होती है; यह धर्मशास्त्र से ऊपर उठकर व्यवहार का प्रश्न बन जाती है।
3) ऐल्बर्ट बार्न्स कहते हैं कि सच्चा धार्मिकता वही है जो दूसरे के सम्मान और कल्याण के लिए कदम उठाए।
व्यावहारिक अनुप्रयोग (आज के संदर्भ में)
- प्रवास, गरीबी, मानसिक स्वास्थ्य, या अस्पष्ट पहचान के बावजूद हर मानव है जिसे प्रेम के साथ सहायता चाहिए।
- अपनी सीमाओं के बावजूद पड़ोसी की जरूरतों में भागीदारी करें—स्वयं की सुविधा से ऊपर उठकर सामुदायिक सहयोग को मजबूत करें।
समाप्ति निष्कर्ष
इस पाठ के केंद्र में वही है जो यीशु ने दिखाया—करुणा का मोड़ एक क्रिया है, न केवल एक विचार। डाकिये के पड़ोसी की तरह, हमें भी ऐसी राह चुननी है जिसमें बाँटना, सहायता और सम्मान शामिल हो।
संदर्भित अनुभागसार
यदि आप चाहें, तो इस उपदेश के साथ अन्य प्रेरक संदर्भ देखें जहाँ करुणा और पड़ोस का वास्तविक मान सामने आता है—परिवार, समुदाय और शासन के बीच सम्मानपूर्ण सेवा का आदर्श।
नोट: नीचे दिए गए उद्धरण केवल समान विचारधारा के स्रोतों के भाग हैं। पूर्ण ग्रंथ की टोली में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे-छोटे सीधे उद्धरण उपलब्ध हो सकते हैं—ये पाठ में रहते हुए संक्षेप में प्रयुक्त हैं।