Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 7:1 लूका 7:2 लूका 7:3 लूका 7:4 लूका 7:5 लूका 7:6 लूका 7:7 लूका 7:8 लूका 7:9 लूका 7:10 लूका 7:11 लूका 7:12 लूका 7:13 लूका 7:14 लूका 7:15 लूका 7:16 लूका 7:17 लूका 7:18 लूका 7:19 लूका 7:20 लूका 7:21 लूका 7:22 लूका 7:23 लूका 7:24 लूका 7:25 लूका 7:26 लूका 7:27 लूका 7:28 लूका 7:29 लूका 7:30 लूका 7:31 लूका 7:32 लूका 7:33 लूका 7:34 लूका 7:35 लूका 7:36 लूका 7:37 लूका 7:38 लूका 7:39 लूका 7:40 लूका 7:41 लूका 7:42 लूका 7:43 लूका 7:44 लूका 7:45 लूका 7:46 लूका 7:47 लूका 7:48 लूका 7:49 लूका 7:50



लूका 7:42—सूत्रबद्ध प्रभाव: क्षमा के महानlık
यह वचन पवित्र कथा के एक क्षण में प्रवेश कराता है जहाँ दो अपराधी या दो क़र्जदारों की कहानीindicative है। वह कहते हैं, “जब कि उनके पास वापस लौटाने को कुछ न रहा, तो उसने दोनों को क्षमा कर दिया। अतः उनमें से कौन उससे अधिक प्रेम रखेगा?” यह बयान यीशु के प्रेम और क्षमा की प्रकृति को उजागर करता है। तत्कालीन कथा-संदर्भ में यह बताता है कि एहसान का स्वरूप निर्धारण मानव के प्रेम से नहीं, बल्कि क्षमा के अनुपात से होता है।
पवित्र बात की व्याख्या
यह पाठ दिखाता है कि क्षमा देना परमेश्वर का अनुग्रह है, और वह निर्नाम नहीं बल्कि आंतरिक परिवर्तन का अभिनय है।Jesus ने यहाँ न केवल क्षमा की action दर्शाई, बल्कि यह भी निष्कर्ष दिया कि प्रेम का मापक किस प्रकार बदलता है। जो उऋणत (कर्ज) में है, वह भी प्रेम से परिपूर्ण हो सकता है जब उसे क्षमा मिलती है।
मुख्य शब्द और चित्रार्थ
अन्य सम्बन्धित बाइबल अंश
— Cross-reference 1: ईफिसियों 2:8-9, जहाँ कहा गया है कि उद्धार विश्वास के द्वारा है, न कि कर्मों से, ताकि कोई न कहे कि वह अपनी व्यवस्था से सच्चा प्रेम पा लेगा।
— Cross-reference 2: मत्ती 18:21-35, जहाँ दयालुता और क्षमा के अविभाज्य संबंध का उदाहरण दिया गया है—कृतज्ञता और प्रेम के साथ क्षमा का कर्म।
— Cross-reference 3: 1 पतरस 4:8, जहाँ प्रेम का सबसे बड़ा गुण कहा गया है और क्षमा को प्रेम के समीप रखने की प्रेरणा दी गयी है।
पूर्ववर्ती और बाद के पाठ के साथ सम्बन्ध
इस वाक्य में प्रेम की गहराई और क्षमा-प्रकृति एक साथ दीखती है—यह न सिर्फ “कौन अधिक प्रेम करेगा” की जिज्ञासा को शांत करता है, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर का दयालुता किस प्रकार मानवीय व्यवहारों को प्रेरित करती है। यह पाठ लूका के सामान्य उद्देश्य पर भी प्रकाश डालता है: यीशु पर विश्वास करने के साथ-साथ उन लोगों के जीवन-तटस्थ विश्वास को भी उद्धार के रूप में प्रस्तुत करना।
आज के समय में अनुप्रयोग
महत्वपूर्ण उद्धरण (एतिहासिक टिप्पणी)
यहाँ किसी स्पष्ट पूर्ण पाठ का उद्धरण नहीं दिया गया है, परन्तु Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के प्रमुख विचार इस प्रकार मिलते हैं: क्षमा एक ऐसे स्तर का आशीर्वाद है जो मानवीय बराबरी से परे है; प्रेम के वास्तविक गहराई को वहीं मापा जा सकता है जब हमें क्षमा दिया गया हो।
सार-सार में, यह वचन हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर का दयालु प्रेम अवसर-पर- अवसर ऊँचाइयाँ छूता है—और हमारा उत्तर भी उसी दयालु प्रेम के अनुरूप होना चाहिए।