Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 7:1 लूका 7:2 लूका 7:3 लूका 7:4 लूका 7:5 लूका 7:6 लूका 7:7 लूका 7:8 लूका 7:9 लूका 7:10 लूका 7:11 लूका 7:12 लूका 7:13 लूका 7:14 लूका 7:15 लूका 7:16 लूका 7:17 लूका 7:18 लूका 7:19 लूका 7:20 लूका 7:21 लूका 7:22 लूका 7:23 लूका 7:24 लूका 7:25 लूका 7:26 लूका 7:27 लूका 7:28 लूका 7:29 लूका 7:30 लूका 7:31 लूका 7:32 लूका 7:33 लूका 7:34 लूका 7:35 लूका 7:36 लूका 7:37 लूका 7:38 लूका 7:39 लूका 7:40 लूका 7:41 लूका 7:42 लूका 7:43 लूका 7:44 लूका 7:45 लूका 7:46 लूका 7:47 लूका 7:48 लूका 7:49 लूका 7:50


लूका 7:18 — संदर्भ और संदर्भित समाचार
यूहन्ना मसीह के एक भाग के भीतर, यूहन्ना दाऊद के पुत्र ने अपनी चेलाओं के साथ यीशु के कामकाज और उसका संदेश सुना था। इस वाक्य में वे यह बताते हैं कि यूहन्ना ने अपनी परिस्थिति के अनुसार, प्रत्यक्ष घटनाओं और चाय-परिवर्तन से प्रेरित होकर, अपने चेलों के माध्यम से Jesus के कार्यों की सूचना पाई। यह संदर्भ दर्शाता है कि प्रेरितों और गुरु-चेलों के बीच सूचना का समन्वय कैसे बना रहता है और कैसे प्रभु के संदेश की पुष्टि लोगों तक पहुँचती है।
मुख्य अर्थ
यह वचन यूहन्ना के विश्वासयोग्यता और उसकी प्रतीक्षा की पुष्टि दर्शाता है कि वह अभी भी मसीह के आगमन की वास्तविक क्रियाओं को देख रहा है, भले ही परिस्थितियाँ उसकी आत्मा में असुविधा पैदा कर दें। उसकी चेलों ने जो समाचार प्राप्त किया, वह यीशु के मसीहत्व के सार्वजनिक उपहार, चंगाई और शिक्षा की पुष्टि के रूप में देखा जा सकता है।
दो–तीन प्रमुख विषय
संबंधित पाठ
परिचयात्मक संदर्भ के लिए देखें: लूका 7:19–23 जहाँ यूहन्ना अपने चेलों से यीशु के चमत्कार पूछता है—यह दिखाता है कि विश्वास में प्रश्न व सावधानी सामान्य मानवीय अनुभव हैं। साथ ही लूका 7:24–28 में यीशु यूहन्ना के संदेश के संदर्भ को कैसे व्याख्या करते हैं, यह बताता है कि मसीहत्व के कार्य कैसे आत्माओं में उम्मीद जागाते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
हममें से प्रत्येक के लिए यह सीख है कि प्रभु के कार्यों के प्रमाण दिखते हैं या नहीं, पर विश्वास नहीं डगमगाना चाहिए। परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, ईश्वर के उपाय और योजनाएँ सत्य हैं। अपने अन्तःकरण के समाचारों को सुने रखें और विश्वास के साथ देखो कि मसीह कौन से निशान दिखाते हैं—चंगाई, प्रेम, आशीर्वाद और आशा के चिन्ह।
छोटा समापन
यूहन्ना के संवाद और उसके चेलों के समाचार से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के कार्य सत्यपरक और प्रमाणित होते हैं। यीशु के साथ उनका सामना हमें यह याद दिलाता है कि विश्वास के पथ पर सूचना और प्रमाण एक साथ चलते हैं, ताकि विश्वास गहरा और स्थिर हो सके।
Cross-references (संक्षेप में)
- लूका 7:23: प्रभु के चमत्कारों के संदेश का प्रत्यक्ष पुष्टि—यूहन्ना के संदिग्ध प्रश्नों के पीछे सत्य की चिंगारी।
- मत्ती 11:2–6: मसीहत्व पर दृष्टि और विश्वास के प्रमाण—जो कुछ देखा-समझा जा सकता है, वही शास्त्रों का सत्य है।
- मरकुस 16:20: प्रेरितों का प्रमाण और विश्वास—यीशु के आग्रहों की पुष्टि उनके कार्यों से होती है।
उद्धरण: यदि चाहें तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की स्पष्ट पंक्तियाँ यहाँ उद्धृत की जा सकती हैं, बशर्ते वे पाठ-विशिष्ट हों।