Old Testament
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लूका 7:1 लूका 7:2 लूका 7:3 लूका 7:4 लूका 7:5 लूका 7:6 लूका 7:7 लूका 7:8 लूका 7:9 लूका 7:10 लूका 7:11 लूका 7:12 लूका 7:13 लूका 7:14 लूका 7:15 लूका 7:16 लूका 7:17 लूका 7:18 लूका 7:19 लूका 7:20 लूका 7:21 लूका 7:22 लूका 7:23 लूका 7:24 लूका 7:25 लूका 7:26 लूका 7:27 लूका 7:28 लूका 7:29 लूका 7:30 लूका 7:31 लूका 7:32 लूका 7:33 लूका 7:34 लूका 7:35 लूका 7:36 लूका 7:37 लूका 7:38 लूका 7:39 लूका 7:40 लूका 7:41 लूका 7:42 लूका 7:43 लूका 7:44 लूका 7:45 लूका 7:46 लूका 7:47 लूका 7:48 लूका 7:49 लूका 7:50



लूका 7:13 — प्रभु की दया और चिंता
यह छोटा वाक्य गहरी मानवता को उद्घाटित करता है: प्रभु के सामने एक टूटे दिल वाली माता-पिता जैसी पीड़ा देखने पर ईसा मसीह ने तरस खाकर कहा, “मत रो।” यह verse घटना के प्रारम्भिक संदर्भ में एक पल को पकड़ता है—सीधा,Competition से मुक्त करुणा का चरण। यह हमें याद दिलाता है कि यीशु केवल ज्ञान देता नहीं, बल्कि दिल से जुड़कर दुखित लोगों के साथ सहानुभूति दिखाते हैं।
ज orig inal context का सार
यह घटना लूका के अनुसार तब घटती है जब यीशु नूहित नगर वा शहर के लोगों के बीच जा रहे थे और उनके साथ एक में एक व्यक्ति की मौत पर मातमी रुदन हो रहा होता है। माता-पिता या रिश्तेदारों के बीच गहरी पीड़ा के बीच यीशु ने देख कर उनकी स्थिति समझी और अपने दिल से करुणा प्रकट की। वह दुःख में डूबे व्यक्ति के साथ खड़े होते हैं, और ऐसे क्षण में वही शब्द बोलते हैं जो आशा के संकेत होते हैं: मूरो नहीं, तुम रोते नहीं।
मुख्य संदेश
सम्पूर्ण ढांचा—थीम्स और संदर्भ
शीघ्र निष्कर्ष यह कि प्रभु की दया व्यक्ति-केन्द्रित है। यह दृश्य यीशु के उद्धारक कार्य की एक झलक है, जहाँ वे शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा से गुजर रहे लोगों के सामने आते हैं।
यह भी दिखाता है कि ईश्वर की कृपा न दुखों को अनदेखा करती है, न धार्मिक औपचारिकताओं में अटकी रहती है, बल्कि वे लोग जिनके दिल टूटे होते हैं, उनके साथ रहती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ-साथ समझ
कुछ सहायक संदर्भ:
इन संदर्भों में देखिए कि कैसे क्रिया और भावना एक साथ चलती है—पीड़ा में भी दया का काम संभव है, और यह विश्वास की जीवন্ত अभिव्यक्ति है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain पाठ से)
निर्गत commentators (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) के पूर्ण वाक्यों के छोटे-छोटे उद्धरण नीचे दिए जा रहे हैं, यदि उपलब्ध हों:
“मत रो”—यह शब्द प्रभु की गहराई से आयी करुणा का परिचायक है; वह दुख से निकलकर आश्वासन देता है।
यदि किसी वाक्य का स्पष्ट पूर्ण उद्धरण यहाँ न दिया गया हो, तो वह संदर्भ छोड़ दिया गया है ताकि मौचित शब्दों की शुद्धता बनी रहे।
संभावित पवित्र-संदर्भों के साथ एक संक्षिप्त चर्चा
1) करुणा बनाम आलोचना: पिता या शिष्य के दर्द पर प्रतिक्रिया—यीशु की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि उद्धारकर्ता कैसे संवेदना के साथ प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति को देखता है।
2) मातृ-आश्रय का संकेत: माता-पिता की पीड़ा में भी परमेश्वर का ध्यान सक्रिय रहता है; भरोसा की राह खुलती है।
3) डर से आगे बढ़ना: रोने से उठना, और जीवन की नई संभावना को ग्रहण करना—यही ईसाई जीवन का मार्ग है।
आध्यात्मिक plötzlich — एक अंतर्मनन
हम में से कई बार कठिन घड़ियों में रोते रहते हैं—पर प्रभु का हाथ हमारे साथ है। वह कहता है, मत रो—क्योंकि वे आँसू केवल क्षण के लिए होते हैं, और उनके पीछे आने वाला आश्वासन जीवन के नये मोड़ खोलता है। ऐसे समय में हमें उसकी दया पर भरोसा करना चाहिए और अपने दुःख को साझा करना चाहिए ताकि समुदाय पुनः एकजुट होकर आगे बढ़ सके।
यही संदेश है: प्रभु के पास हर शंका-पीड़ा के लिए जगह है, और वह हमारे नाजुक क्षणों में भी सहारा बनते हैं।