Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 7:1 लूका 7:2 लूका 7:3 लूका 7:4 लूका 7:5 लूका 7:6 लूका 7:7 लूका 7:8 लूका 7:9 लूका 7:10 लूका 7:11 लूका 7:12 लूका 7:13 लूका 7:14 लूका 7:15 लूका 7:16 लूका 7:17 लूका 7:18 लूका 7:19 लूका 7:20 लूका 7:21 लूका 7:22 लूका 7:23 लूका 7:24 लूका 7:25 लूका 7:26 लूका 7:27 लूका 7:28 लूका 7:29 लूका 7:30 लूका 7:31 लूका 7:32 लूका 7:33 लूका 7:34 लूका 7:35 लूका 7:36 लूका 7:37 लूका 7:38 लूका 7:39 लूका 7:40 लूका 7:41 लूका 7:42 लूका 7:43 लूका 7:44 लूका 7:45 लूका 7:46 लूका 7:47 लूका 7:48 लूका 7:49 लूका 7:50



अर्थ का प्रत्यक्ष सार
लूका 7:38 में हम एक अनोखी भक्ति की छवि देखते हैं: एक महिला जो यीशु के पाँवों के सामने रोते-रोते अपने आँसुओं से उन्हें धोती है, अपने बालों से पोंछती है और पाँव पर इत्र जगह-जहां छू लेती है। यह व्यवहार दर्शाता है कि वह अत्यंत विनय, अनुराग और तोड़-फोड़ कर देने वाली स्वीकृति में है। यह पवित्र समर्पण है, जिसमें भक्ति और पापस्वीकृति एक साथ निहित है।
पृष्ठ कथा के संदर्भ
यह घटना नैतिक शिक्षा देने वाले एक गुरु-छात्र के समाज-परिदृश्य के भीतर घटती है। यीशु नबियों और दीन-दलित के बीच स्थित एक ऐसे शिक्षक थे जिन्हें लोग आत्म-समर्पण और आस्था से परखते थे। इस पथ में एक महिला, जो समाज के दृष्टिगोचर मापदंडों में बहिष्कृत मानी जाती है, उनके सामने आकर अपना समर्पण प्रकट करती है। उसका रुदन और आँसुओं से पाँव धोना, बालों से पोंछना, और इत्र लगाना, तीनों क्रिया मिलकर एक गहरी श्रद्धा और अपराध बोध की प्रकृति को दर्शाती हैं।
interpretive observations
छोटे थीमेटिक बिंदु
संबद्ध आयतें (संश्लेषित अंतर्दृष्टि)
1) अन्य घटनाओं से सीखा गया संदेश: "तुम्हें बहुत अधिक प्रेम मिला है, क्योंकि तुमने बहुत क्षमा पाई है"—यह संदेश न केवल इस महिला के लिए है, बल्कि हमारी अपनी आत्म-सम्पूर्णता के लिए भी है।
2) एक आतिथ्य-भाव: जिनके पाप अधिक थे, उनकी आस्था भी दिखाई देती है; प्रभु यीशु उनके प्रति समानकरुणा दिखाते हैं।
3) चरित्र-परख: भक्ति के प्रदर्शन से यह स्पष्ट होता है कि यीशु का स्वागत हर उस व्यक्ति के लिए खुला है जो खुले दिल से आता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे दैनिक जीवन में यह पाठ है: अपने भीतर के अपराधबोध से मुक्त होकर, विनम्रता और प्रेम के साथ ईश्वर के सामने आना चाहिए; भक्ति का यह अर्पण समाज के आदर्शों से ऊपर उठकर सच्चे अंतःकरण के साथ किया जाना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या)
नोट: नीचे उद्धृत भागों में मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और अडम क्लार्क के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध हों तो भी वे केवल संकेतिक पंक्तियाँ हैं और मूल पाठ के साथ ही साथ वहाँ से उद्धृत किए गए हैं।