लूका 7:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उन्होंने उसके पास आकर कहा, “यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने हमें तेरे पास यह पूछने को भेजा है, कि क्या आनेवाला तू ही है, या हम दूसरे की प्रतीक्षा करे?”

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लूका 7:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 7:20 — इसका सीधा अर्थ

यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले द्वारा भेजे गए संदेश के भीतर यह पूछतरी है कि क्या ईसा वही मसीह हैं जिनकी प्रतीक्षा थी, या हमें और प्रतीक्षा करनी होगी। अर्थात् यीशु के पदार्पण के प्रमाण और पहचान के बारे में स्पष्ट पुष्टि चाही गई है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला जेल में है, पर उसके शिष्यों ने यीशु की कार्यवाही की जाँच के लिए उसे सूचना दी। उस समय यह विचार चल रहा था कि मसीह कौन हैं, क्योंकि यीशु ने अलावद्रष्टा-उद्धार के संकेत दिखाए थे पर शुद्ध साबितियाँ कब मिलेंगी? लूका इस प्रसंग के जरिये न सिर्फ यीशु की पहचान पर प्रकाश डालता है, बल्कि आत्मीय विश्वास और प्रतीक्षा के बीच के संतुलन को भी प्रस्तुत करता है।

मुख्य विश्लेषण

- ईसा के बारे में स्पष्ट पहचान चाहना: यह प्रश्न दर्शाता है कि उनके अद्भुत कार्य, बोलचाल और सिद्ध-चिह्न दर्शाते हैं कि वह मसीह हैं या नहीं।

- विश्वास और प्रतीक्षा की नमनीयता: प्रेरितों के मन में यह संदेह है, पर वे ईमानदारी से पूछते हैं; इसका अर्थ है कि বিশ্বাস कभी-कभी स्पष्ट प्रमाण माँगत है, पर वह भी परमेश्वर के योजनाबद्ध समय के भीतर होता है।

- आस्था और उपलब्ध प्रमाण: यद्यपि जेल की स्थिति और शंका मौजूद है, पर यीशु के कार्य एक पाठ देते हैं कि मसीह कौन हैं, यह प्रत्यक्ष संकेतों से ही नहीं, बल्कि उसकी सेवकाई के परिणामों से भी पहचाना जा सकता है।

थीमेटिक बिंदु

  • प्रत्यक्ष पहचान बनाम प्रतीक्षा की अवधि
  • विश्वास के प्रमाण और क्रिया-प्रभाव
  • स्वर्गीय लक्ष्य के प्रति सच्ची आस्था

अनुयायनियाँ और क्रॉस-रेफरेंसे

Related passages (संक्षेप व स्पष्टीकरण):

  • मत्ती 11:3-5 — यीशु के चमत्कारों और उद्धार के संकेतों के द्वारा मसीहियत की पुष्टि
  • यूहन्ना 5:36-39 — पिता के कार्यों के द्वारा पुत्र की पहचान
  • मारीय 11:2-3 — प्रतीक्षा की धार्मिक धारणाओं से हटकर, यीशु की पहचान में संकेत

महत्त्वपूर्ण संकल्पना

हर परिस्थिति में प्रभु की पहचान के प्रमाण खोजने चाहिए, पर यह भी याद रखना चाहिये कि प्रभु के आशीर्वाद और सेवकाई के परिणाम हमारे विश्वास की दिशा तय करते हैं। आवश्यक है कि हम यीशु के चमत्कार और शिक्षाओं के सम्मिलन से मसीह की पहचान ग्रहण करें, न कि केवल शांत धारणाओं से।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यूहन्ना के शिष्य जब यीशु के बारे में पूछते हैं, वह स्पष्ट संकेत चाहते हैं—पर अंततःospels के कार्यों से यह सिद्ध हो जाता है कि यीशु वह है जिसकी प्रतीक्षा थी। हमारी भी दृष्टि यही होनी चाहिए कि हम मसीह के कार्यों और संदेश से उनकी पहचान को दृढ़ करें, और अपने विश्वास को उनके समर्पण में स्थिर करें।

पूर्व-ग्रंथ उद्धरण (सार,北京)

यूहन्ना 7:22-23 के संदर्भ में, पुराने कानून के प्रतीकों के भीतर यीशु का उद्धारकार्य स्पष्ट होता है; Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों, उन्हें यहाँ संक्षेप में समायोजित किया गया है। नीचे दिए गए पंक्तियाँ इन टिप्पणियों के वैध स्वरूप को दर्शाती हैं:

महत्वपूर्ण उद्धरण (केवल यदि उपलब्ध हों):

• "यह न केवल शास्त्र का ज्ञान है, बल्कि उद्धारकर्ता के आगमन की पुष्टि है" — Matthew Henry के अंदाज में संक्षेपित अर्थ।

नोट

कृपया देखें कि उपर्युक्त उल्लेखित उद्धरण सीधे शाब्दिक उद्धरण नहीं हैं; यदि पाठ्यभास में उपलब्ध हों, तो वे केवल संक्षेप में प्रस्तुत हैं ताकि पाठक मूल विचार समझ सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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तब यूहन्ना ने अपने चेलों में से दो को बुलाकर प्रभु के पास यह पूछने के लिये भेजा, “क्या आनेवाला तू ही है, या हम किसी और दूसरे की प्रतीक्षा करे?”

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