Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 7:1 लूका 7:2 लूका 7:3 लूका 7:4 लूका 7:5 लूका 7:6 लूका 7:7 लूका 7:8 लूका 7:9 लूका 7:10 लूका 7:11 लूका 7:12 लूका 7:13 लूका 7:14 लूका 7:15 लूका 7:16 लूका 7:17 लूका 7:18 लूका 7:19 लूका 7:20 लूका 7:21 लूका 7:22 लूका 7:23 लूका 7:24 लूका 7:25 लूका 7:26 लूका 7:27 लूका 7:28 लूका 7:29 लूका 7:30 लूका 7:31 लूका 7:32 लूका 7:33 लूका 7:34 लूका 7:35 लूका 7:36 लूका 7:37 लूका 7:38 लूका 7:39 लूका 7:40 लूका 7:41 लूका 7:42 लूका 7:43 लूका 7:44 लूका 7:45 लूका 7:46 लूका 7:47 लूका 7:48 लूका 7:49 लूका 7:50



लूका 7:36 का पार्श्व-संदर्भ: भोजन के निमन्त्रण और सजगता
फिर किसी फरीसी ने उससे विनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; अतः वह उस फरीसी के घर में जाकर भोजन करने बैठा।
तुरंत का दृश्य और पाठ का संकेत
यह वाक्य दर्शाता है कि यीशु परिष्कार की सीमा से आगे बढ़कर एक भोग-यात्रा के समान सामाजिक परिस्थिति में प्रवेश करते हैं—एक फरीसी के घर। फरीसी की तीर्थ-निष्ठा और मान-प्रतिष्ठा के बीच यीशु का आना एक आध्यात्मिक शिक्षा का मंच बन जाता है। यह तैयारी एक पारंपरिक भोज का हिस्सा है, जिसमें शास्त्रज्ञ और देव-प्रेमी लोग एक साथ बैठकर गहराई से विचार-विमर्श करते हैं।
दर्शाया गया है क्या: ईश्वर, विश्वास और व्यवहार
- ईश्वर के प्रति विश्वास का खुलना: यीशु का घर में आना यह दर्शाता है कि ईश्वर का राज्य लोगों के दैनिक जीवन के केंद्र में आ सकता है, भले ही उनके सामाजिक स्थान अभी अस्वीकृत क्यों न हों।
- समुदाय की बाधाओं पर विजय: फरीसियों के साथ बैठना समाज में नियम-नियमों के अनुसार निर्णय नहीं, बल्कि प्रेम और करुणा के आधार पर होता है।
- दयालुता की मिसाल: यह दृश्य बाद की घटनाओं के संकेत देता है कि यीशु अपने आगन्तुकों को भी सम्मान और मूल्य प्रदान करते हैं, भले वे किन्हीं सामाजिक सीमाओं से क्यों न जुड़े हों।
महत्वपूर्ण शब्दों तथा छबियों की स्पष्ट व्याख्या
- भोजन-आमन्त्रण: यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि खुली करुणा, स्वीकार्यता और आत्म-परख को आमंत्रण है।
- घर का अवसर: घर समाज का छोटा-सा समाज होता है जहाँ एक व्यक्ति के विचार और विश्वास ताने-बाने की तरह जुड़े होते हैं; यीशु वहाँ पहुंचकर इन धारणाओं को चुनौती देते हैं।
संयुक्त पारिवारिक-आत्मिक संदर्भ
1) मत्ती 9:10-11 और मरकुस 2:15-17 में_seen: यीशु ने समाज के बहिष्कृत पात्रों के साथ समय बिताया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रभु इच्छा नहीं कि कोई खोया रहे।
2) लूका 5:29-32 में: पेय-भोजन के दृश्य के साथ करुणा और पश्चात्ताप की सीख मिलती है—यही प्रेम-पूर्ण संबंध ईश्वर के राज्य का भाग है।
3) प्रेरक प्रत्यक्ष: लूका में पवित्र प्रेम के सामाजिक स्वरूप का चित्रण—प्रभु के साथ आने से परिस्थिति नहीं बदलती, बल्कि व्यक्ति नया जीवन पाता है।
आज के लिए अनुप्रयोग
उद्धृत कथन (उद्धरण-उद्धृत विशेषज्ञ)
एतिहासिक टिप्पणीकारों के सार्वजनिक-domain विचारों से संकेतित पथ: मॉथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों से प्रेरणा ली गई है, ताकि पाठ को एक सुसंगत, स्पष्ट पाठ्य-रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
यद्यपि यहाँ सीधे किसी विस्तार-उद्धरण का पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है, उनका समकालीन मूल्यांकण पाठ के समरूप संकेतों के साथ एकीकृत किया गया है ताकि पाठक को गहरे अर्थ मिलें।
संक्षेप में समझाया गया भाव
यह वाक्य दिखाता है कि ईश्वर का राज्य विविधता में एकता को स्वीकार करता है—खासकर वे लोग जो समाज के बाहरी हिस्से में माने जाते हैं या जिन्हें लोग उपेक्षा करते हैं—उनके साथ भी Jesus का रिश्ता खुला है। भोजन—एक सामान्य, दैनिक क्रिया—कथन-प्रभाव से ऊपर उठकर आस्था की वास्तविक अभिव्यक्ति बन जाता है: एक स्वागत-भाव औरgemeinschaft.