Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 11:1 लूका 11:2 लूका 11:3 लूका 11:4 लूका 11:5 लूका 11:6 लूका 11:7 लूका 11:8 लूका 11:9 लूका 11:10 लूका 11:11 लूका 11:12 लूका 11:13 लूका 11:14 लूका 11:15 लूका 11:16 लूका 11:17 लूका 11:18 लूका 11:19 लूका 11:20 लूका 11:21 लूका 11:22 लूका 11:23 लूका 11:24 लूका 11:25 लूका 11:26 लूका 11:27 लूका 11:28 लूका 11:29 लूका 11:30 लूका 11:31 लूका 11:32 लूका 11:33 लूका 11:34 लूका 11:35 लूका 11:36 लूका 11:37 लूका 11:38 लूका 11:39 लूका 11:40 लूका 11:41 लूका 11:42 लूका 11:43 लूका 11:44 लूका 11:45 लूका 11:46 लूका 11:47 लूका 11:48 लूका 11:49 लूका 11:50 लूका 11:51 लूका 11:52 लूका 11:53 लूका 11:54



सीधे अर्थ की पुष्टि
लूका 11:12 में प्रश्न पूछा गया है: यदि कोई अंडा माँगे, तो कोई साँप दे देगा? इस कथन के द्वारा यीशु यह स्पष्ट करते हैं कि परम पिता परमेश्वर कितना छोटे-छोटे, प्रत्यक्ष रूप से हितकारी चीज़ों के प्रति भी उदार है, और वह कभी भी अपने Children को बुरे या नुकसानदेह चीज़ें नहीं देगा। यह एक लोकप्रिय मिथक-विपरीय प्रश्न है जो आत्म-विश्वास को बढ़ाने और परमेश्वर की उदारता की कल्पना को समझाने के लिए प्रयुक्त है।
परिप्रेक्ष्यात्मक पृष्ठभूमि
यह पाठ लूका के Gospel के अन्तर्गत शिक्षण-संदर्भ में आता है, जहाँ यीशु ने अपने शिष्यों को ईश्वरीय पुत्रत्व और प्रार्थना के अधिकार के बारे में सिखाया। यहाँ “अंडा” एक साधारण दैनिक वस्तु है, जो माँगना जैसी माँग को ध्यान में लाती है। यदि मनुष्य अपनी क्षुद्र आवश्यकताओं के लिए भी कठोरता दिखाता है, तो पिता क्यों नहीं देगा? यह विचार उन लोगों के लिए है जो विधर्मी आचरण के बजाय ईश्वर के उदार और कुशल नैतिकता पर सवाल उठाते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटा थीमैटिक सूची
अनुसंधान-सम्बन्ध पाठ (Cross-references)
1) मत्ती 7:11 — पिता के पास पुत्रों के लिए जो कुछ भी सही है, उसे देने की प्रेरणा। यह बताता है कि प्रभु की उदारता हमारे अनुरोधों के पीछे एक उत्तम उद्देश्य से संचालित होती है।
2) याकूब 1:5 — यदि किसी को ज्ञान की कमी हो, तो परमेश्वर से माँग लें; वह उदारता से दे देता है। यह सामाजिक-व्यवहार में ईश्वर के प्रेम की पुष्टि करता है।
3) यूहन्ना 14:13-14 — यीशु के नाम से माँगना परमेश्वर के मार्ग से जुड़ने का मार्ग है; यह विश्वास की गतिविधि को प्रेरित करता है।
निष्कर्षात्मक व्याख्या
जीवन के छोटे-छोटे आवश्यक हों या बड़े प्रश्न, परमेश्वर एक मानवीय पिता की तरह भक्तों के लिए खुला आशीर्वाद का स्रोत है। हमारी माँगें यदि वास्तविक जरूरत और ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप हों, तो वे शीघ्रता से मान्य होती हैं। यह भाग कृपया एक सरल विश्वास और आत्म-सम्पूर्ण माँग के बीच संतुलन सीखाता है: प्रभु की इच्छानुसार जीवन जीना और उसकी कृपा में निर्भर रहना।
व्यावहारिक Takeaway
ध्यान दें: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरण संक्षेप में शामिल नहीं हैं; यदि आवश्यक हो, तो उनके विचारों को संक्षेप रूप में नामित किया जाएगा।