Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 11:1 लूका 11:2 लूका 11:3 लूका 11:4 लूका 11:5 लूका 11:6 लूका 11:7 लूका 11:8 लूका 11:9 लूका 11:10 लूका 11:11 लूका 11:12 लूका 11:13 लूका 11:14 लूका 11:15 लूका 11:16 लूका 11:17 लूका 11:18 लूका 11:19 लूका 11:20 लूका 11:21 लूका 11:22 लूका 11:23 लूका 11:24 लूका 11:25 लूका 11:26 लूका 11:27 लूका 11:28 लूका 11:29 लूका 11:30 लूका 11:31 लूका 11:32 लूका 11:33 लूका 11:34 लूका 11:35 लूका 11:36 लूका 11:37 लूका 11:38 लूका 11:39 लूका 11:40 लूका 11:41 लूका 11:42 लूका 11:43 लूका 11:44 लूका 11:45 लूका 11:46 लूका 11:47 लूका 11:48 लूका 11:49 लूका 11:50 लूका 11:51 लूका 11:52 लूका 11:53 लूका 11:54



लूका 11:50 — तुरंत संदर्भ और अभिप्रेत उद्देश्य
यूहन्नी-युग में यीशु के धर्मचर्च-कार्य के क्रम में यह कथन आता है कि भविष्यद्वक्ताओं के लहू का लेखा इस युग के लोग उठाएं। इसका आशय यह है कि ईश्वर का न्याय स्पष्ट रूप से यहूदियों के इतिहास में भरा-भरा रहा है: जिन्होंने भविष्यद्वक्ताओं को मार डाला या उनके संदेश को अस्वीकार किया, उन्हें उसी समय के लोगापेक्षित परिणाम भुगतने होंगे। यह पवित्र पाठ भविष्यद्वक्ताओं के रक्त-आख्यान को मानवीय दायित्व के साथ जोड़ता है और समुदाय को सचेत करता है कि ईश्वर का हाकीम और न्याय निर्भय है।
ईश्वर और आस्था के बारे में इस पाठ से क्या सीखें
यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर की निष्ठा और न्याय समयानुसार प्रकट होता है। मानवीय कठोरता और समान्य अस्वीकृति के बावजूद, ईश्वर के संदेशवाहकों के प्रति विश्वास की अपेक्षा बनी रहती है। यदि कोई समाज अपने भविष्यद्वक्ताओं को अनसुने कर देता है, तो वे अपने इतिहास के पन्नों में उसी निर्णय का लेखा पाएंगे। साथ ही यह भी संकेत देता है कि विश्वास और निष्ठा किसी एक पीढ़ी तक सीमित नहीं, बल्कि सभ्यता के हर दौर के लिए आवश्यक है।
मुख्य शब्द-विवरण
भविष्यद्वक्ताओं का लहू: वे व्यक्ति जो परमेश्वर के संदेशों को सजीव तरीके से प्रेषित करते हैं; उनके रक्त से न्याय की मांग जुड़ी है, क्योंकि विरोध और हत्या से क्या संदेश बना रहता है, यह समाज की नैतिक तस्वीर बनाता है।
लेखा: एक कानूनी, नैतिक हिसाब जो परमेश्वर की दृष्टि में पवित्र रिकॉर्ड बन जाता है।
इस युग के लोग: वे साथी जो इतिहास के इस भाग से जुड़े हैं तथा जो उनके समय के संदेश को सुनते और स्वीकारते या अस्वीकारते हैं।
अन्य धर्मवाक्यों के साथ संबंध
• ईश्वर की न्याय-योजना पर टिप्पणी करते हुए अन्य संस्थानों में भी भविष्यद्वक्ताओं के शिकार के बारे में संकेत मिलता है (यूहन्ना या अन्य गवाहियाँ)।
• नबियों के रक्त के लेखे का विषय पवित्र बपतिस्मा और धर्म-सत्य के प्रचार में निरंतर संघर्ष को उजागर करता है।
• पुराने नियम में भी न्याय और धैर्य की मांग के साथ भविष्यद्वक्ताओं के कष्ट का चित्रण मिलता है, जो नए नियम में पूर्णता पाता है।
आज के जीवन में लागू करने योग्य विचार
संক্ষिप्त निष्कर्ष
यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर के संदेशवाहकों के प्रति हमारी प्रतिक्रिया इतिहास में दर्ज होती है। भविष्यद्वक्ताओं के रक्त-लेखे जैसा सत्य, आज के समाज के नैतिक-PERSONAL जिम्मेदारी की कसौटी बन जाता है। सही-खुला समर्पण और नैतिक साहस ही जीवन को सच्चे विश्वास के अनुरूप दिशा देते हैं।
कथन-संदर्भ
यह क्षेत्रीय संदर्भ के साथ पढ़ना उपयोगी है: लूका 11 में यीशु का संदेश और इसी संदर्भ में मसीह की आत्म-प्रगटी, ईश्वर के न्याय की ठोस मांग और शास्त्र-प्रेषणों के साथ मानवीय-प्रतिक्रियाओं का संयोजन स्पष्ट होता है।
उद्धृत के गए विचार: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेकेटर टिप्पणी-सार से उपयुक्त बिंदु प्रकृत किए गए हैं। (कुल अंश-उद्धरण केवल आवश्यक हिस्सों तक सीमित हैं और पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।)