Old Testament
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लूका 11:1 लूका 11:2 लूका 11:3 लूका 11:4 लूका 11:5 लूका 11:6 लूका 11:7 लूका 11:8 लूका 11:9 लूका 11:10 लूका 11:11 लूका 11:12 लूका 11:13 लूका 11:14 लूका 11:15 लूका 11:16 लूका 11:17 लूका 11:18 लूका 11:19 लूका 11:20 लूका 11:21 लूका 11:22 लूका 11:23 लूका 11:24 लूका 11:25 लूका 11:26 लूका 11:27 लूका 11:28 लूका 11:29 लूका 11:30 लूका 11:31 लूका 11:32 लूका 11:33 लूका 11:34 लूका 11:35 लूका 11:36 लूका 11:37 लूका 11:38 लूका 11:39 लूका 11:40 लूका 11:41 लूका 11:42 लूका 11:43 लूका 11:44 लूका 11:45 लूका 11:46 लूका 11:47 लूका 11:48 लूका 11:49 लूका 11:50 लूका 11:51 लूका 11:52 लूका 11:53 लूका 11:54



अर्थ का संक्षिप्त सार
लूका 11:3 में प्रभु यीशु हमारे दैनिक निवास और आवश्यकताओं के बारे में एक सरल, गहन प्रार्थनात्मक तंत्र प्रस्तुत करते हैं: परमेश्वर से प्रतिदिन की रोटी के लिए सहायता माँगना। यह शिद्दत से बताता है कि हमारी संदिग्धता, नियंत्रण की चाह और भविष्य की चिंता के बजाय हमें अभी के दिन के लिए ईश्वर की निरंतर आपूर्ति पर निर्भर रहना चाहिए। यह पवित्र दिनचर्या की एक आदर्श शिक्षण है: हर दिन का भोजन, हर दिन का आशीर्वाद, और हर दिन की आवश्यकताओं के प्रति ईश्वर की विश्वसनीयता का acknowledgment।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
लूका की गवाही में यीशु ने शिष्यों को प्रेरित किया कि वे ईश्वर से पथ-निर्देशित माँग करें, न कि सांसारिक चिन्ताओं के नीचे डूब जाएँ। यह प्रार्थना का एक नमूना है जिसमें भगवान के देश और उसकी इच्छा के मानक के अनुरूप हमारी दैनिक आश्यकताओं की पूर्ति का अनुरोध है। यह परमेश्वर की कृपा के हर दिन के प्रसाद के अनुरोध की बात करता है, जिससे विश्वास बढ़ता है कि हम कठिन समय में भी ईश्वर पर भरोसा कर सकते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- दैनिक आवश्यकता का आशय: यहाँ “हमारी दिन भर की रोटी हमें आज दे” कहकर प्रभु बतलाते हैं कि प्रार्थना का लक्ष्य जीवन के वास्तविक खतरे वाले हिस्से से नहीं, बल्कि सामान्य, रोज़मर्रा की जरूरतों से है।
- ईश्वर की विश्वासयोग्यता: हमारी माँग ईश्वर की provision की याद दिलाती है कि वह निर्भरता-संवर्धक पिता है, जो हर दिन की ज़रूरतों के लिए इंतजाम करता है।
- आत्म-नियमन का संकेत: शिष्यत्व में यह अभ्यास हमें ईश्वर के समयसार और उसकी व्यवस्था के अनुरूप जीना सिखाता है, ना कि अपने लक्ष्यों और संसाधनों के बल पर जीवन बनाना।
थीमैटिक सूची
संदर्भित अन्य पवित्र वचन (cross-references)
- मत्ती 6:11: “हमारी दैनिक रोटी आज हमें दे”— यीशु के उसी पाठ में स्थिरता और परमेश्वर की कृपा का मूल पाठ। समझाता है कि प्रार्थना शैली और चिन्ता का क्रम कैसे संतुलित रहता है।
- योहान 6:35: “मैं अभी रोशनी हूँ; जो मेरे पास है वह नहीं रहेगा अँधेरा” — दैनिक आहार के साथ आत्मिक आहार का भी संकेत देता है कि परमेश्वर के सन्तोष से ही जीवन का हर हरस का संतोष मिलता है।
- फिलिप्पियों 4:19: “परन्तु मेरा परमेश्वर आपकी आवश्यकता के अनुसार यथासामर्थ्य अपने धने से भर देगा” — ईश्वर की पूर्ति की व्यवस्था और भरोसे की पुष्टि करता है।
संभावित स्पष्ट उद्धरण (Public-domain commentators)
यहाँ सामान्य शिक्षा के लिए प्रयुक्त संहितीय टिप्पणी से मिलते-जुलते तर्क बॉर्न्स, अडम क्लार्क और मैथ्यू हेन्री के दृष्टिकोणों का समेकन प्रस्तुत है (छोटे उद्धरण स्रोत के रूप में):
मैथ्यू हेन्री: “यह प्रार्थना की सरलता है; प्रतिदिन की रोटी के लिए माँग, ताकि सांसारिक चिंताओं से ऊपर उठकर परमेश्वर की कर्तव्य-लाभ को याद किया जाए।” (संश्लेषित सार)
अल्बर्ट बर्न्स: “हमारी दैनिक आवश्यकताएँ भी परमेश्वर के भरोसे पर टिकी हैं; इसलिए भय के बजाय विश्वास रखें।” (संश्लेषित सार)
एडम क्लार्क: “यह प्रार्थना हमें अभ्यास कराती है कि ईश्वर के साथ दैनिक संबंध में रहें, और हर दिन की नरमी के साथ आगे बढ़ें।” (संश्लेषित सार)
निष्कर्षात्मक Practical takeaway
हम अपनी दैनिक जरूरतों के लिए ईश्वर से नियमित और सच्चे प्रत्यक्ष अनुरोध करें। चिंता से मुक्त होकर, विश्वास के साथ प्रार्थना करें कि ईश्वर वही दे जो आज हमारे लिए पर्याप्त है। यह प्रार्थना हमें आत्म-स्वास्थ्य और समुदाय के लिए नम्रता, भरोसा और धैर्य सिखाती है।