Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 11:1 लूका 11:2 लूका 11:3 लूका 11:4 लूका 11:5 लूका 11:6 लूका 11:7 लूका 11:8 लूका 11:9 लूका 11:10 लूका 11:11 लूका 11:12 लूका 11:13 लूका 11:14 लूका 11:15 लूका 11:16 लूका 11:17 लूका 11:18 लूका 11:19 लूका 11:20 लूका 11:21 लूका 11:22 लूका 11:23 लूका 11:24 लूका 11:25 लूका 11:26 लूका 11:27 लूका 11:28 लूका 11:29 लूका 11:30 लूका 11:31 लूका 11:32 लूका 11:33 लूका 11:34 लूका 11:35 लूका 11:36 लूका 11:37 लूका 11:38 लूका 11:39 लूका 11:40 लूका 11:41 लूका 11:42 लूका 11:43 लूका 11:44 लूका 11:45 लूका 11:46 लूका 11:47 लूका 11:48 लूका 11:49 लूका 11:50 लूका 11:51 लूका 11:52 लूका 11:53 लूका 11:54



लूका 11:49 पर टिप्पणी — भविष्यद्वक्ताओं और प्रेरितों का संदेश
पद का मूल वाक्य उन लोगों के बारे में है जो परमेश्वर की योजना के अनुसार प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं को भेजने की बात को मानने या अस्वीकार करने में लगे हुए थे। यीशु के समय यह कथन उस संदर्भ में है जहाँ समाज और धार्मिक नेताओं के पास परमेश्वर की मार्गदर्शक बातों को सुनने की जगह विरोध और निंदा की प्रवृत्ति थी। यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर की बुद्धि और उनके चयन से भरे संदेश मानव जाति के लिये कभी-कभी प्रत्यक्ष प्रशंसा नहीं पाते, बल्कि दृढ़ विश्वास और सहनशीलता की परीक्षा बनते हैं।
पद-विश्लेषण औरchapter के संदर्भ में
यह वाक्य लूका के Gospel के भीतर एक समापन-संकेत की तरह है। Jesus बताता है कि परमेश्वर ने भविष्यद्वक्ताओं और प्रेरितों को भेजना तय किया है, ताकि लोग उनके द्वारा दिया गया सत्य स्वीकार करें; किंतु जिनमें से कई उन्हें मार डालेंगे या सताएंगे। यह एक दार्शनिक-यथार्थवादी चेतावनी है कि ईश्वर की बुलाहट कभी-कभी मानवीय स्वार्थ और धार्मिक मानदंडों के खिलाफ पड़ती है। साथ ही, इसे एक प्रकार की न्याय-व्यवस्था के रूप में भी पढ़ा जा सकता है: जो लोग प्रभु के संदेश को अस्वीकार करते हैं, उन्हें उनके दायरे से बाहर कर दिया जाएगा, ताकि पूरी संस्थापना—पिछड़ेपन से लेकर दु:ख तक—पूरे डिग्री में उभर आ सके।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य शास्त्रीय संबंधी पाठ
येसु की इस उद्घोषणा के साथ कुछ अन्य स्थलों की दिशा-निर्देश एक दूसरे को जोड़ती हैं:
इन सभी संदर्भों से एक संगत निष्कर्ष निकलता है: परमेश्वर की बुद्धि कभी व्यक्तिगत लाभों से बड़ा उद्देश्य रखती है, और हमारे लिए आवश्यक है कि हम उसकी आवाज़ में विश्वास करें, भले ही रास्ता कठिन दिखाई दे।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
हम आज के समय में भी जब परमेश्वर के संदेश विविध रूपों में आता है—पवित्रशास्त्र के स्पष्ट शिक्षण के रूप में, प्रेरितों के शिक्षाओं के रूप में, या आधुनिक विश्वासियों की गवाही के रूप में—तो हमारी प्रतिक्रिया पांच कदमों में सोचनी चाहिए:
संक्षेप
यूहन्ना के सुसमाचार से परे, इस पद की सार यह है कि परमेश्वर की बुद्धि मानव-यात्रा के ऊपर है। वह भविष्यद्वक्ताओं और प्रेरितों के द्वारा सत्य को प्रकाशित कराते हैं, भले ही वह समाज के भीतर विरोध और पीड़ा का कारण बनें। हमारी भूमिका है कि हम उनकी आवाज़ को पहचानें, विश्वास से स्वीकार करें, और उनके उद्देश्य के अनुरूप अपने जीवन को ढालें।
Cross-references (संक्षिप्त परिचय)
1) मत्ती 23:34 — धर्म-निष्ठ नेताओं के विरुद्ध स्पष्ट चेतावनी: भविष्यद्वक्ताओं के मार्ग को रोकना मानव-हित से ऊपर न हो।
2) प्रेरिती 9:15-16 — प्रेरणाओं के प्रति प्रभु का निर्देश और मतभेदों के बावजूद उद्धार की योजना का पूर्ण होना।
3) भजन 2:1-3 — परमेश्वर की शासन व्यवस्था के खिलाफ मानव-प्रतिरोध का सचेतन दृश्य और उद्धार के उद्देश्य की प्रधानता।
नोट: नीचे उद्धृत सीधे शब्द Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के हैं यदि उपलब्ध हों—परन्तु यहां कुल मिलाकर पाठ की प्राकृतिक भाव-भाषा के अनुरूप सार दिया गया है।