Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 11:1 लूका 11:2 लूका 11:3 लूका 11:4 लूका 11:5 लूका 11:6 लूका 11:7 लूका 11:8 लूका 11:9 लूका 11:10 लूका 11:11 लूका 11:12 लूका 11:13 लूका 11:14 लूका 11:15 लूका 11:16 लूका 11:17 लूका 11:18 लूका 11:19 लूका 11:20 लूका 11:21 लूका 11:22 लूका 11:23 लूका 11:24 लूका 11:25 लूका 11:26 लूका 11:27 लूका 11:28 लूका 11:29 लूका 11:30 लूका 11:31 लूका 11:32 लूका 11:33 लूका 11:34 लूका 11:35 लूका 11:36 लूका 11:37 लूका 11:38 लूका 11:39 लूका 11:40 लूका 11:41 लूका 11:42 लूका 11:43 लूका 11:44 लूका 11:45 लूका 11:46 लूका 11:47 लूका 11:48 लूका 11:49 लूका 11:50 लूका 11:51 लूका 11:52 लूका 11:53 लूका 11:54



पाठ का संक्षेप और मूल संदेश
लूका 11:24 में यीशु एक गूढ़ चुनावी दृश्य प्रस्तुत करते हैं: जब एक अशुद्ध आत्मा मनुष्य से निकल जाती है, वह सूखी जगहों में विश्राम ढूंढ़ती है, फिर भी उसे शांति नहीं मिलती, तो वह कहती है कि मैं अपने उसी घर में लौट जाऊँगी जहाँ से मैं निकली थी। यह आयत आत्मा-नियंत्रण और परिवर्तन के अस्थिर संसार को दर्शाती है: चीजें बदलती हैं, परन्तु परिवर्तन के पश्चात् भी वास्तविक स्थायित्व केवल ईश्वर के साथ है। लूका के संदर्भ में यह कहा गया है कि बहाव में शुद्धता और दुष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष जारी रहता है; यदि मन में परिवर्तन तो नहीं आ रहा, तो अस्थायी राहत भी अंततः खो जाती है।
अध्याय के भीतर इस verse की भूमिका
लूका Gospel में यीशु के प्रवचन अक्सर लोगों की आत्म-समझ और आस्थाओं पर केंद्रित होते हैं। यहाँ एक चेतावनी है कि बाहरी धार्मिक क्रियाओं के बावजूद अगर क्षमताओं और नियंत्रण का स्रोत हृदय में नहीं है, तो वे आत्मा में स्थायित्व नहीं दे पाते। प्रतीकात्मक आत्मा का लौटना दर्शाता है कि शुद्धता का वास्तविक परीक्षण तब है जब व्यक्ति में नया जीवनし सक्रिय रहता है; न केवल पाप को छोड़ना, बल्कि नई संवेदना और आचरण से जीवन भरना है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है कि परिवर्तन का वास्तविक गहरा असर तभी होता है जब वह व्यक्ति के चरित्र-आधार—हृदय—में स्थिर और टिकाऊ हो। यदि केवल बाहरी क्रिया-कलाप रहते हैं, तो शुद्ध आस्था अस्थिर हो सकती है और पुराने अनुसार लौट आती है। इस कारण, आत्मा-स्वीकृति के साथ आंतरिक नवीकरण अनिवार्य है।
अन्य पवित्रशास्त्रीय संदर्भ और उनका संबंध
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परिवर्तन केवल आंतरिक नयेपन से संभव है, जो समय के साथ स्थिर और फलदायक हो।
व्यावहारिक आवेदन
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पाठ हमें याद दिलाता है कि परिवर्तन के वास्तविक स्वरुप परखने के लिए हृदय-आधार आवश्यक है। अशुद्ध आत्मा का लौटना तब तक संभव है जब तक हृदय में ईश्वर-नया जीवन स्थिर न हो। आत्म-नवीकरण और स्थायित्व के लिए प्रभु के साथ सच्चा संबंध बनाए रखना परम आवश्यक है और यही अंतिम sigurnitas (सुरक्षा) का स्रोत है।
आसान संदर्भ-नोट
यद्यपि यह लूका के संदर्भ में एक विशेष वक्तव्य है, परन्तु सामान्य सिद्धान्त स्पष्ट है: बाहरी रीति-रिवाज़ स्थाई परिवर्तन नहीं दे सकते; हृदय में ईश्वर का वास और प्रेरणा ही वास्तविक परिवर्तन का ठोस आधार है।
सीधा उद्धरण (संदर्भित टिप्पणीकारों से)
यदि आवश्यकता हो तो संक्षिप्त, प्रकर्षित उद्धरण उपलब्ध हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकार प्रयासों से व्युत्पन्न विचार यहाँ समाहित हैं; कहीं-कहीं छोटे शब्द-उद्धरण के संकेत हैं, जो उनके सम्यक विजय-नजरिए को दर्शाते हैं।
cross-references के साथ संक्षेप स्पष्टीकरण
जनवरी के संदर्भ-निर्देशन से कुछ प्रमुख क्रॉस-रेफरेंस दिखाई देते हैं: