Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 11:1 लूका 11:2 लूका 11:3 लूका 11:4 लूका 11:5 लूका 11:6 लूका 11:7 लूका 11:8 लूका 11:9 लूका 11:10 लूका 11:11 लूका 11:12 लूका 11:13 लूका 11:14 लूका 11:15 लूका 11:16 लूका 11:17 लूका 11:18 लूका 11:19 लूका 11:20 लूका 11:21 लूका 11:22 लूका 11:23 लूका 11:24 लूका 11:25 लूका 11:26 लूका 11:27 लूका 11:28 लूका 11:29 लूका 11:30 लूका 11:31 लूका 11:32 लूका 11:33 लूका 11:34 लूका 11:35 लूका 11:36 लूका 11:37 लूका 11:38 लूका 11:39 लूका 11:40 लूका 11:41 लूका 11:42 लूका 11:43 लूका 11:44 लूका 11:45 लूका 11:46 लूका 11:47 लूका 11:48 लूका 11:49 लूका 11:50 लूका 11:51 लूका 11:52 लूका 11:53 लूका 11:54



मुख्य बिंदु
येशु यहाँ यह कहते हैं कि दक्षिण की रानी (स्मरणयोग्य रूप से सेवाओं और बुद्धि की खोज में चली आई) सुलैमान की बुद्धि सुनने के लिए आई थी; परन्तु अब उनसे भी बड़ा—येशु स्वयं—उन्हें देखने को मिला। इसलिए जो लोग ईश्वर के भेजे हुए संदेशों को न समझते या न मानते हैं, वे अंतिम न्याय में दोषी ठहरेंगे।
साहित्यिक प्रसंग
लूका के सन्दर्भ में यह वचन 'निशानियाँ और विरोध' के बड़े अध्याय के बीच आता है जहाँ येशु शास्त्रियों और भीड़ से संवाद कर रहे हैं। दक्षिण की रानी के उदाहरण का उपयोग बुद्धि और खोज की सकारात्मक छवि देने के लिए किया गया है। इस वाक्य का तात्पर्य यह है कि यदि अजनबी और गैर-यहूदी सुलैमान की प्रतिष्ठा सुनने आएँ तो उनकी तुलना में येशु—जो शिक्षित, चमत्कार करने वाला और परमेश्वर के राज का उद्घोषक है—देख कर भी इन्कार करने वाले अधिक दोषी होंगे। संदर्भ में येशु की उपाधियाँ और उनके विरोधियों की अकम्प्रहेन्सन का विषय बार-बार आता है।
धार्मिक-थीमाटिक महत्व
यहाँ दो प्रमुख theological विचार मिलते हैं:
शास्त्रीय टिप्पणी के संदर्भ
मैथ्यू हेनरी का एक संक्षिप्त विचार मिलता है जो ध्यान दिलाता है कि इतिहास की भीड़ में बुद्धि के प्रमाण होने पर भी यदि हृदय नहीं बदलता तो दण्ड अनिवार्य है। अल्बर्ट बार्न्स नज़रिए से यह वाक्य उस निष्कर्ष की पुष्टता है कि ज्ञान का अनादर अधिक कठोर दण्ड लाएगा। एडम क्लार्क ने भी सुलैमान की प्रसिद्धि और रानी के दृष्टांत को, आत्मिक खोज की प्रशंसा और अनुत्तरित बुलावे के गंभीर परिणाम के रूप में देखा है। (उल्लेखनीय उद्धरण: अगर उद्धरण प्रदान करना आवश्यक हो तो Matthew Henry के छोटे उद्धरणों में प्रायः यही भाव मिलता है—“जानकारी के बावजूद अविश्वास का दंड”।)
बाइबिल के अन्य स्थानों से संबंध
1) 1 राजा 10:1-10 और 2 इतिहास 9:1 का सीधा ऐतिहासिक संदर्भ: यहीं से सुलैमान और दक्षिण की रानी की कथा ली गई है—यहाँ वह कृत्रिम पृष्ठभूमि है जो येशु के तर्क को समर्थन देती है।
2) मैथ्यू 12:42—मैथ्यू में भी यही तुलना आती है; वहां भी सुलैमान की रानी का उदाहरण प्रयोग हुआ है ताकि येशु की महानता और लोगों की करुणा-हीनता प्रदर्शित हो।
3) रोमियों 2:12-16—यहां दायित्व और ज्ञान के अनुसार न्याय की सामान्य सृष्टि-नीति पर विचार है; जो अधिक ज्ञान प्राप्त हुआ उसके लिए उत्तरदायित्व भी बढ़ता है।
विचारार्थ प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
लूका 11:31 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के सत्य का सामना करना केवल बौद्धिक ग्रहण नहीं, बल्कि जीवन पर प्रभुत्व जमाने वाली प्रतिक्रिया का विषय है। सुलैमान की प्रसिद्धि को सुन कर भी जो लोग बदलते नहीं, वे अधिक कठोर न्याय के योग्य होंगे, क्योंकि अब उनसे भी बड़ा येशु सामने है। इस वचन का तात्पर्य है: सत्य की उपलब्धि बढ़ने पर उत्तरदायित्व भी बढ़ जाता है—इसलिए स्वीकार और अनुगमन आवश्यक है।