Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 12:1 मरकुस 12:2 मरकुस 12:3 मरकुस 12:4 मरकुस 12:5 मरकुस 12:6 मरकुस 12:7 मरकुस 12:8 मरकुस 12:9 मरकुस 12:10 मरकुस 12:11 मरकुस 12:12 मरकुस 12:13 मरकुस 12:14 मरकुस 12:15 मरकुस 12:16 मरकुस 12:17 मरकुस 12:18 मरकुस 12:19 मरकुस 12:20 मरकुस 12:21 मरकुस 12:22 मरकुस 12:23 मरकुस 12:24 मरकुस 12:25 मरकुस 12:26 मरकुस 12:27 मरकुस 12:28 मरकुस 12:29 मरकुस 12:30 मरकुस 12:31 मरकुस 12:32 मरकुस 12:33 मरकुस 12:34 मरकुस 12:35 मरकुस 12:36 मरकुस 12:37 मरकुस 12:38 मरकुस 12:39 मरकुस 12:40 मरकुस 12:41 मरकुस 12:42 मरकुस 12:43 मरकुस 12:44
मुख्य व्याख्या बिंदु
मरकुस 12:23 में यीशु पुनर्जीवन के समय के प्रश्न की ओर संकेत करते हैं कि जीवन की वास्तविकपूर्णता कितनी स्थिर होगी। यहां प्रश्न है— पुनर्जीवित होने पर किसकी पत्नी होगी, क्योंकि सातों ने उसका विवाह कर लिया था। यह दृष्टांत मृत्यु के बाद के रिश्तों के नियमों के बारे में एक मौलिक शिक्षण प्रस्तुत करता है: पुनर्जीवन के समय मनुष्य भ्रष्ट सामाजिक व्यवस्थाओं और सांसारिक रिश्तों की सीमाओं से परे एक नए प्रकार के जीवन में प्रवेश करते हैं, जिसमें पति-पत्नी के पारंपरिक कानून नहीं चलेंगे, बल्कि परमेश्वर की राजधानी का जीवन प्रत्यक्ष रूप से परिचालित होगा।
आर्थिक पाठ-संदर्भ और साहित्यिक संदर्भ
यह प्रश्न तीमस और अन्य कानूनी धर्मशास्त्रियों के मिथ्या धारणाओं को उजागर करता है कि जीवन और संबंध केवल इस पृथ्वी के नियमों पर टिके रहेंगे। ईसाई ग्रंथ-आकृति में यह दिखता है कि पुनर्जीवन एक ऐसी वास्तविकता है जिसमें प्रेम और दायित्व नए ढंग से परिभाषित होते हैं। यह नज़रिया पुराने क्रम के समाप्त होने और परमेश्वर के राज्य के नये क्रम की ओर संकेत देता है।
धार्मिक महत्ता
पुनर्जीवन के बाद की दुनिया में मृत्यु के बाद के संबंधों के नियम कैसे होंगे—यह प्रश्न यीशु ने एक बार नहीं, कई बार उठाया है। इसका सार यह है कि जीवन की ऐसी परिस्थितियाँ जहाँ पर धरती पर विवाह-संबंध प्रचलित हैं, वे अब आवश्यक नहीं होंगी। परमेश्वर की नई सृष्टि में जीवन परमात्मा के सामीप्य और वास्तविक अस्तित्व के साथ व्यापक और मुक्त हो जाएगा।
पठन-शाखाएँ (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या
सारांश विचार और प्रश्न
1) यह पाठ उन पूर्वकथनों को चुनौती देता है जो केवल इस पृथ्वी की सामाजिक संरचनाओं के अनुरोध के अनुसार जीवन को मानते हैं। 2) पुनर्जीवन एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल और रिश्ते परमेश्वर के प्रकाश-प्रबंध के भीतर एक नवीन प्रकार के जीवन की ओर चलते हैं। 3) विश्वासियों के लिए यह आश्वासन है कि परमेश्वर के राज्य में सब कुछ योजना अनुसार, सही सच्चाई के अनुसार होगा।
अनुभाग-आलोचना (निष्कर्ष)
यीशु के प्रश्न पर दार्शनिक व्याख्या यह बताती है कि ईश्वर का राज्य इस संसार के रिश्तों के नियमों से परे है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारे संबंध और दायित्व इस जीवन के साथ-साथ परमेश्वर के अद्भुत पुनर्निर्माण में भी तरकश होंगे।
कथन-उद्धरण (संदर्भित विचार)
नीचे उद्धरण केवल संदर्भ स्वरूप हैं—केवल स्पष्ट रूप से उद्धृत वाक्यों के लिए: “जी उठने पर… पत्नी होगी?” (याद दिलाते हैं कि पुनर्जीवन की स्थिति में विवाह-संबंध कैसे नया अर्थ लेते हैं।)
टिप्पणी नोट
M Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे पूर्व-प्रकाशनों के शाब्दिक उद्धरण के छोटे-छोटे अंश यहाँ रखे गए हैं, यदि उपलब्ध हों, पूर्ण पाठ नहीं दोहराया गया है।