Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 12:1 मरकुस 12:2 मरकुस 12:3 मरकुस 12:4 मरकुस 12:5 मरकुस 12:6 मरकुस 12:7 मरकुस 12:8 मरकुस 12:9 मरकुस 12:10 मरकुस 12:11 मरकुस 12:12 मरकुस 12:13 मरकुस 12:14 मरकुस 12:15 मरकुस 12:16 मरकुस 12:17 मरकुस 12:18 मरकुस 12:19 मरकुस 12:20 मरकुस 12:21 मरकुस 12:22 मरकुस 12:23 मरकुस 12:24 मरकुस 12:25 मरकुस 12:26 मरकुस 12:27 मरकुस 12:28 मरकुस 12:29 मरकुस 12:30 मरकुस 12:31 मरकुस 12:32 मरकुस 12:33 मरकुस 12:34 मरकुस 12:35 मरकुस 12:36 मरकुस 12:37 मरकुस 12:38 मरकुस 12:39 मरकुस 12:40 मरकुस 12:41 मरकुस 12:42 मरकुस 12:43 मरकुस 12:44



मरकुस 12:3 —Immediate setting
यह पद यीशु के कथा-परिप्रेक्ष्य में एक कठोर घटनाक्रम को दर्शाता है, जहाँ उन लोगों ने किसी को पकड़कर पीटा और खाली हाथ लौट आए। यह दृश्य पाठक को धार्मिक नेताओं के विरोध और Jesús के संदेश के प्रतिपादन के बीच के तनाव से अवगत कराता है। परन्तु यह पंक्ति अपने आप में एक “कथा-घटना” नहीं खोलती; इसे समझना है कि क्यों और किन परिस्थितियों में विरोध हुआ, ताकि विश्वास की दृढ़ता में उच्च मार्ग क्या है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
यह वाकया मानवीय दमन के विरुद्ध ईश्वर की सत्ता और चूक-क्षमा की मांग के सामने एक आंतरिक प्रश्न छोड़ता है: विश्वास के भीतर कठोरता या दमन कैसे प्रतिफलित होता है? घटती घटनाओं के बीच, भरोसा मानवीय असफलताओं के बावजूद भी स्थिर रहता है, और ईश्वर की योजना के अनुरूप घटनाओं को देखना सीखना पड़ता है।
महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्टता
“पकड़कर पीटा” का चित्रण अपराधियों के विरुद्ध एक कठोर दमन के रूप में प्रस्तुत होता है। यह शब्द-चिह्न पाठक को नैतिक असंयम और सामाजिक दबाव के बीच चयन का एहसास कराते हैं। आधुनिक संदर्भ में यह दर्शाता है कि सत्ता-शक्ति किस प्रकार कमजोरों पर अत्याचार कर सकती है, जबकि नाममात्र के शांतन समय भी परमेश्वर के न्याय के दायरे में आता है।
संबंधी दास्य उद्धरण (cross-references)
व्याख्या-प्रस्तावन में इन संदर्भों से संकेत मिलता है कि पीड़ा के समय भी परमेश्वर की उपस्थिति और योजना अग्रणी रहती है, और विश्वासियों को स्थिर रहना चाहिए।
प्रचलित उद्धरणों से समेकित विचार
Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के आधार पर संकलित सार यह है कि—फुल-न्याय के समय में मानव-धर्म परखता है, परन्तु ईश्वर की कृपा और अधिकारिकता के कारण विश्वास की राह सुरक्षित रहती है। Henry कहते हैं कि दमन के बावजूद सत्य का प्रकाश समाप्त नहीं होता; Barnes बताते हैं कि अनुचित सहमति के विरुद्ध साहस और सत्य के साथ खड़ा होना चाहिए; Clarke का संकेत है कि दमन में भी परमेश्वर की योजना की दिशा स्पष्ट रहती है, और हमें धैर्य रखना चाहिए। इन विचारों से निकला निष्कर्ष यह है कि सांसारिक हिंसा भले बदला न दे, पर ईश्वर के उद्देश्य सर्वदा सत्य रहते हैं और हमारा दायित्व है कि विश्वास में स्थिर रहें। उल्लेखयोग्य छोटे उद्धरण जिनका उल्लेख आवश्यक है, वे नीचे हैं:
“The power of men is not the measure of God’s truth.” (सम्भवित सारव्याख्या)
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