Old Testament
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जकर्याह 4:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसने मुझसे कहा, “क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं?” मैंने कहा, “हे मेरे प्रभु, मैं नहीं जानता।”
जकर्याह 4:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 4:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 4:5 (HINIRV) »
जो दूत मुझसे बातें करता था, उसने मुझ को उत्तर दिया, “क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं?” मैंने कहा, “हे मेरे प्रभु मैं नहीं जानता।”

इब्रानियों 5:11 (HINIRV) »
इसके विषय में हमें बहुत सी बातें कहनी हैं, जिनका समझाना भी कठिन है; इसलिए कि तुम ऊँचा सुनने लगे हो।
जकर्याह 4:13 पर टिप्पणी
पद में देवदूत से ज़कर्याह को दिखाई देने वाले दृश्य के दौरान हिज्जे-परख के साथ दो कार्य-योजना प्रस्तुत होती है: एक तरफ तो यह बताता है कि परमेश्वर की बड़ी योजनाओं के सामने मानव समझ कितनी निम्न है, दूसरी तरफ यह साक्ष्य देता है कि मसीह के कार्यकलाप के रहस्यों को जानना पृथक-प्रेरणा और ईश्वरीय प्रकट-ज्ञान पर निर्भर है। इस संदर्भ में हरियास-आयुधों की वह परिकल्पना, जिनकी क्षमता और उद्देश्य अस्थिर समय के साथ विकसित होते हैं, एक-दूसरे के ऊपर निर्भर रहते हैं: वह दिव्य योजना जो ज़रूर पूरी होनी है, उसका बोध केवल ईश्वर के द्वारा खुलता है।
मुख्य अर्थ
भेदावरण का यह क्षण दिखाता है कि देवदूत के संकेत स्पष्ट नहीं होते—यह एक चेतावनी है कि संसार की योजना के पहुलों को समझना मानव-शक्ति से बाहर है जब तक परमेश्वर की ओर से उद्घाटन न मिले। "क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं?" कहकर दूत संकेत देता है कि याजक-नेता के लिए भी यह ज्ञान ईश्वरीय प्रकाश पर निर्भर है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध अंश (cross-references)
1) निर्गमन 33:19-20 — मांग पर परमेश्वर का आश्वासन कि उसका आभामय रूप नहीं दीख सकता, पर वह मार्गदर्शक है। यह दिखाता है कि दिव्य योजना के गूढ़ अंश मानव भाषा से परे हो सकते हैं, पर ईश्वरीय प्रकास से मार्ग मिलता है।
2) याकूब 1:5 — यदि किसी को Wisdom की कमी हो, तो ईश्वर से मांगे; ऐसा सच हमें बताता है कि ज्ञान परमेश्वर के उद्घाटन से आता है, अपने आप नहीं।
3) 1 कुरिन्थी 2:12 — धार्मिक ज्ञान आत्मा के द्वारा मिलता है, न कि केवल सीखने से; वह आध्यात्मिक गहराई को उद्घाटित करता है।
व्यावहारिक चिंतन
जब हम जीवन में अनिश्चित घटनाओं से गुजरते हैं, तो इस पद की सीख यह है: Pray और प्रयत्न के साथ-साथ परमेश्वर के प्रकाश की प्रतीक्षा करें। हर साथ आने वाला संकेत ईश्वर की पूर्ण योजना का भाग हो सकता है, पर उसे समझना तब संभव होता है जब आत्मा का प्रकाश हमारे मन-चेतना पर shine करता है। इसलिए daily निर्भरता और प्रार्थना हमारी दिशा होनी चाहिए, न कि अपने-अपने तर्कों से।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद यथार्थ से भरपूर है: मानव समझ की सीमाओं के बावजूद परमेश्वर अपनी योजनाओं को खुलकर दिखाते हैं जब वह चाहता है। दूत का सवाल और ज़कर्याह की विनम्र असमर्थता इस बात के प्रमाण हैं कि कृपा और ज्ञान दोनों ईश्वर के प्रकाश से प्राप्त होते हैं।
उद्धरण स्रोतों से प्रमुख विचार (संरचित):
मैथ्यू हेनरी, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से समेकित समझ को स्वर-संरचना में जोड़ा गया है। यदि रखा जाता है, तो उनके छोटे-से उद्धरण नीचे दिए गए हैं:
“जो भी स्पष्ट नहीं है, वह हृदय की विनम्रता से समझा जाता है।” (मैथ्यू हेनरी)
“ज्ञान का वास्तविक स्रोत परमेश्वर है; आत्मा के द्वारा उद्घाटन होता है।” (Albert Barnes)
“यही है कि ईश्वर की योजना को समझना मानव-क्षमता से परे है—पर आत्मिक प्रकाश उसे खोल सकता है।” (Adam Clarke)