Old Testament
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जकर्याह 4:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
दीवट के पास जैतून के दो वृक्ष हैं, एक उस कटोरे की दाहिनी ओर, और दूसरा उसकी बाईं ओर।”
जकर्याह 4:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 4:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 11:4 (HINIRV) »
ये वे ही जैतून के दो पेड़ और दो दीवट हैं जो पृथ्वी के प्रभु के सामने खड़े रहते हैं*। (जक. 4:3)

जकर्याह 4:14 (HINIRV) »
तब उसने कहा, “इनका अर्थ ताजे तेल से भरे हुए वे दो पुरुष हैं जो सारी पृथ्वी के परमेश्वर के पास हाज़िर रहते हैं।”

रोमियों 11:17 (HINIRV) »
और यदि कई एक डाली तोड़ दी गई, और तू जंगली जैतून होकर उनमें साटा गया, और जैतून की जड़ की चिकनाई का भागी हुआ है।
जकर्याह 4:3 के संदर्भ में दीवट और जैतून के वृक्ष
पवित्रग्रंथ के इस पद में देवदूत से राजा पेहाल (हायकिल) की दृष्टि में जो कुछ जोड़ा गया है, वह एक दिव्य दर्शन का भाग है। जकर्याह 4 अध्याय कुल मिलाकर यह सन्देश देता है कि यहोवा के कामों के लिए प्रेरणा और व्यवस्थापन उसकी शक्ति से है; मनुष्यों के प्रयास केवल साधन होते हैं। इस पद में दीवट (शमय) के पास जैतून के दो वृक्ष देखे जाते हैं—एक दाहिनी ओर और दूसरा बाईं ओर—जो यह संकेत करता है कि यह यहोवा की दी हुई योजना और सामर्थ्य की सम्पन्नता को प्रकट कर रहा है।
मुख्य अर्थ
यह दृश्य एक संदेश देता है कि दायित्व और कर्तव्य का संचालन देवालय के काम के लिए दिव्यता से संचालित होता है। दो जैतून के वृक्षों का आँकड़ा उनकी ओर से आने वाले एक ही स्रोत से अभिषिक्तते को दर्शाता है—आत्म-नियंत्रण और प्रभु-प्रेरणा का संयोजन जो शील, धैर्य और दृढ़ता से जुड़ा है। दीवट का स्रोत तेल को चायने के बजाय, वे दो वृक्ष उसी के साथियों से आते हैं—जो सौंपे गए कार्य के लिए निरंतर ऊर्जा और सफलता का आह्वान करते हैं।
दो मुख्य विषय
related passages (संकेत केवल, पूर्ण पद नहीं)
व्यावहारिक विचार
हमारी टोली में यह संदेश है किाधिकारी, प pastors, और ईमानदार सेवक—सब मिलकर काम करें, पर सफलता परमेश्वर की प्रेरणा पर निर्भर है। अपनी क्षमताओं से आगे देखने और पुकारे गये दायित्वों को पूरे मन से निभाने की प्रेरणा दें; कठिन समय में भी धैर्य बनाए रखें, क्योंकि तेल की निरंतर आपूर्ति उसी स्रोत से है जो हमें समर्पण के साथ आगे बढ़ाता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
जकर्याह 4:3 में दीवट के पास जैतून के वृक्ष यह स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर का संचालन विश्वसनीय आधार पर होता है। तेल का निरन्तर प्रवाह एक प्रतिबद्ध सेवक-जीवन का संकेत है—जो अनुभव कराता है कि शक्ति और दिशा एक ही स्रोत से मिलती है: परमेश्वर।
सीधा संदर्भ-व्याख्या
यह पंक्ति दिव्य दर्शन में एक अनिवार्य संदेश को दर्शाती है: हमारे कार्यों की सफलता ईश्वरीय प्रेरणा और कृपा से संचालित है।