Old Testament
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जकर्याह 4:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“जरुब्बाबेल ने अपने हाथों से इस भवन की नींव डाली है, और वही अपने हाथों से उसको तैयार भी करेगा। तब तू जानेगा कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।
जकर्याह 4:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
जकर्याह 4:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 6:14 (HINIRV) »
तब यहूदी पुरनिये, हाग्गै नबी और इद्दो के पोते जकर्याह के नबूवत करने से मन्दिर को बनाते रहे, और सफल भी हुए और उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार और फारस के राजा कुस्रू, दारा और अर्तक्षत्र* की आज्ञाओं के अनुसार बनाते-बनाते उसे पूरा कर लिया।

जकर्याह 6:12 (HINIRV) »
और उससे यह कह, 'सेनाओं का यहोवा यह कहता है, उस पुरुष को देख जिसका नाम शाख है, वह अपने ही स्थान में उगकर यहोवा के मन्दिर को बनाएगा। (यशा. 4:2)

एज्रा 5:16 (HINIRV) »
तब उसी शेशबस्सर ने आकर परमेश्वर के भवन की जो यरूशलेम में है नींव डाली; और तब से अब तक यह बन रहा है, परन्तु अब तक नहीं बन पाया।'
मतलबी अर्थ: जकर्याह 4:9 का स्पष्ट संदेश
इस वचन का मूल संदेश यही है: परमेश्वर की प्रेरणा से शुरू हुआ और उसकी कृपा से पूरा होने वाला कार्य है। यह दिखाता है कि यह भवन—याद करें जाकेर्याह 2–4 के संदर्भ में नबी के स्वप्न—न सिर्फ मानव प्रयास से बना है, बल्कि यह परमेश्वर की आत्मा की शक्ति से समर्थित है। पहले नींव डाली गई, फिर पूर्णता होगी; और इसके जरिए यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह परमेश्वर का काम है, न कि मनुष्यों की प्रतिभा की महिमा।
पृष्ठभूमि बुनियादी जानकारी
जकर्याह की पुस्तक के यह भाग यहूदियों के लौटने और मंदिर के पुनर्निर्माण से जुड़ा है। जकर्याह ने visions के माध्यम से ईश्वर के उद्देश्य बताये—कि वापस लौटना और मंदिर को फिर से स्थापित करना उनकी वजह से संभव हुआ है। “यहोहवा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है” यह उद्धारकर्ता-भावना को स्पष्ट करता है कि उसकी योजनाएं केवल मानव-योजनाओं पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि परमेश्वर की उपस्थितिक शक्ति और निर्देशन से संचालित होती हैं।
interpretive observations
2–3 खुदी-खास निष्कर्ष ( thematic notes )
अन्य प्रासंगिक पाठ और संक्षिप्त टिप्पणी
उद्धरण-आधारित धारणा को समझने के लिए नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसों को देखें:
इन क्रॉस-रेफरेंसों से स्पष्ट होता है कि मंदिर पुनर्निर्माण एक दिव्य योजना का हिस्सा है, जिसमें मानव कर्तव्य और परमेश्वर की प्रेरणा साथ चलते हैं।
संक्षिप्त practical takeaway
जो कुछ भी आप करें—चाहे वह नया प्रोजेक्ट हो या किसी पुराने कार्य की पुनरस्थापना—यकीन रखें कि परमेश्वर की प्रेरणा और मार्गदर्शन पहले कदम है। पहले से दिशा मिलती है, फिर काम शुरू होता है, और अंत में परमेश्वर की कृपा से परिणाम दिखते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (संदर्भित पंक्तियाँ)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समान सार्वजनिक-डायरे-योग्य टिप्पणीकारों के शब्द देखें, तो वे अक्सर कहते हैं कि शुरूआत ईश्वर के निर्देश से होती है और अंततः उसकी वचन-विश्वास के कारण कार्य सफल होता है। नीचे एक आदर्श संकेत के रूप में नोट किया गया है, इतनी मात्रा में संक्षेप में उद्धरणों का उल्लेख है—
“God’s work begun by His own Spirit will be carried forward by His power.”
यही धारणात्मक संदेश है: यह योजना केवल मानव-परिश्रम से नहीं चलती, बल्कि परमेश्वर के निर्देश और सहायता से पूरी होती है।