Old Testament
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जकर्याह 4:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब मैंने उस दूत से जो मुझसे बातें करता था, पूछा, “हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं?”
जकर्याह 4:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 4:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 6:4 (HINIRV) »
तब मैंने उस दूत से जो मुझसे बातें करता था, पूछा, “हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं?”

जकर्याह 1:9 (HINIRV) »
तब मैंने कहा, 'हे मेरे प्रभु ये कौन हैं?' तब जो दूत मुझसे बातें करता था, उसने मुझसे कहा, 'मैं तुझे दिखाऊँगा कि ये कौन हैं।'

दानिय्येल 12:8 (HINIRV) »
यह बात मैं सुनता तो था परन्तु कुछ न समझा। तब मैंने कहा, “हे मेरे प्रभु, इन बातों का अन्तफल क्या होगा?”
उद्धरण का सरल अर्थ
जकर्याह 4:4 में दूत से मुँहलों सवाल का सरल अर्थ है—मतलब स्पष्ट न होकर भी, दयालु कृपा से क्या काम मान्य होता है? इस वचन में दूत से मिलने वाले दृश्य काल में, नबी जकर्याह अपनी जिज्ञासा को सामने लाकर परमेश्वर के उद्देश्य को समझना चाहते हैं। उद्धार की बात में यह प्रश्न यह संकेत देता है कि लौओ को समझाने के बजाय, वह पवित्र योजना के भाग के रूप में यह जानना चाहते हैं कि यह दृश्य उनके लिए क्या संकेत देता है।
प्रसंग-परिप्रेक्ष्य
होज-याकूब के साथ का संदर्भ लेते हुए जकर्याह अध्याय 4 में यह दृश्य पाषाण-प्रकट (Zerubbabel) के नेतृत्व की पुष्टि के लिए है। दूतों के संवाद में नबी को दिखाई देने वाले क्रियात्मक संकेत स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर की योजना न केवल विजयी पुनःनिर्माण है, बल्कि उसका अभिप्राय आत्म-विश्वास और मंत्रालय की स्थिरता भी है। तबाही और अनिश्चितता के बीच यह प्रश्न दर्शाता है कि मिलन-काल में नबी के हृदय को दिशा देने वाला क्या है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संरचना-उपयुक्त बिंदु
संबंधित अनुभाग और संक्षेप
- उत्पत्ति से जुड़ी प्रार्थना-धारणा: पुराने नियम के प्रेरितों के लिए प्रभु की योजना का स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है; यह अक्सर प्रश्नों के साथ शुरू होता है और विश्वास के साथ पूरा होता है। अन्य संदर्भों में भी संकेत मिलता है कि भगवान जो दिखाते हैं, उसे समझना विश्वास और प्रयोग से जुड़ा है।
- प्रेरित वचन: यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ संपर्क बनाए रखता है और सही समय पर स्पष्टीकरण देता है ताकि परियोजना आगे बढ़ सके।
- नबी-उमंग: नबी का प्रश्न दर्शाता है कि भक्ति में जागरूकता और परिशोधन आवश्यक है—ताकि वह स्थिरता से आगे बढ़ सके।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
किसी भी धार्मिक योजना में हमें परमेश्वर के कार्य और संकेतों को समझने के लिए विनम्र पूछताछ करनी चाहिए, और जब योजना स्पष्ट न हो, तब धैर्यपूर्वक उसकी राह देखनी चाहिए ताकि विश्वास में वृद्धि हो और काम सही दिशा में चले।
क्रॉस-रेफरेंस और उनसे जुड़ी बातें
1) संदेषण-प्रश्न (यूहन्ना 14:6 तक): यीशु एक मार्ग, सत्य और जीवित मार्ग के रूप में दिखते हैं—यानी स्पष्टता के लिए उनका अनुसरण करें।
2) परमेश्वर की योजना की पुष्टि (याकूब 1:5): यदि किसी को ज्ञान की कमी हो, तो ईश्वर से माँगना चाहिए ताकि मार्ग स्पष्ट हो।
3) धैर्य और कार्य-आत्मा (रोमियों 8:25): अपेक्षा में धैर्य रखना और आत्मा के नेतृत्व से आगे बढ़ना सीखना चाहिए।