Old Testament
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सपन्याह 2:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे कूशियों, तुम भी मेरी तलवार से मारे जाओगे।
सपन्याह 2:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सपन्याह 2:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 30:4 (HINIRV) »
मिस्र में तलवार चलेगी, और जब मिस्र में लोग मारे जाकर गिरेंगे, तब कूश में भी संकट पड़ेगा, लोग मिस्र को लूट ले जाएँगे, और उसकी नींवें उलट दी जाएँगी।

यशायाह 20:4 (HINIRV) »
उसी प्रकार अश्शूर का राजा मिस्री और कूश के लोगों को बन्दी बनाकर देश-निकाला करेगा, क्या लड़के क्या बूढे़, सभी को बन्दी बनाकर उघाड़े और नंगे पाँव और नितम्ब खुले ले जाएगा, जिससे मिस्र लज्जित हो।

यिर्मयाह 46:9 (HINIRV) »
हे मिस्री सवारों आगे बढ़ो, हे रथियों, बहुत ही वेग से चलाओ! हे ढाल पकड़नेवाले कूशी और पूती वीरों, हे धनुर्धारी लूदियों चले आओ।
सपन्याह 2:12 का संदर्भ एवं व्याख्या (HINIRV अनुवाद)
पद का संक्षिप्त संदर्भ: स्पष्ट रूप से यह भाग उन परिणामों की चेतावनी है जो परमेश्वर के विरुद्ध ईर्ष्या से भरी ताकतों पर पड़ेगी—कूशियों (कूश) सहित सभी जहाँ तक उन्हें उन्हें दी गई सत्ता के कारण अलग-अलग देशों पर तलवार चलाने से रोका नहीं जा सकेगा। यह संदेश यह बताता है कि परमेश्वर के न्याय से किसी को नहीं बचना है, और अस्थिर सामर्थ्य भी एक दिन टूट जाएगी।
मुख्य अर्थ पर केंद्रित विश्लेषण
यह वाक्य पूरक परिप्रेक्ष्य में आता है कि प्रभु यहूदियों के सौहार्द और सुरक्षा के लिए शांति और न्याय देता है, परंतु अन्य देशों की शक्तियाँ भी उसी न्याय के दायरे में आकर दंडित होंगी। सपन्याह के संदर्भ में यह भविष्यवाणी है कि “कूशियों” जैसे शक्तिशाली राष्ट्र भी परमेश्वर की तलवार से हताहत होंगे; क्षेत्रीय साम्राज्यों के अधिपत्यों के लिए यह चेतावनी है कि दुष्ट शासन को अंततः उद्धृत किया जाएगा।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य प्रकाशित बाइबिल टिप्पणी से संकलित त्वरित विचार
Matthew Henry और Adam Clarke दोनों ही इस प्रकार के संदेश को परमेश्वर की न्यायप्रियता तथा राष्ट्रों के आचरण के परिणाम के रूप में देखते हैं — कि दिव्य न्याय अंततः सबसे शक्तिशाली शासन तक पहुंच कर उन्हें भी चकित कर देता है। ये विचार दर्शाते हैं कि दूसरों पर शासन करने वालों को अपने आचरण की महत्ता समझनी चाहिए, क्योंकि प्रभु का उद्देश्य नीति और भय के माध्यम से नहीं, बल्कि सत्य और धार्मिकता के द्वारा सामने आता है। (नोट: नीचे दिए गए उद्धरण संदर्भ के लिए हैं और संक्षेप में प्रयुक्त हैं।)
धार्मिक पथ पर एक व्यवहारिक विचार
आज के संदर्भ में यह संदेश हमें याद दिलाता है कि हमारी सुरक्षा केवल मनुष्य की शक्ति पर नहीं, पर परमेश्वर के न्याय पर है। यदि हम निर्दोष रहते हुए भी अन्याय के सामने खड़े हों, तो धैर्य और विश्वास के साथ परमेश्वर की योजना की प्रतीक्षा करें। यह भी याद रखें कि बुराई पर दंड और न्याय का क्रम ईश्वर के समय के अनुरूप ही पूरा होता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा सार्थक स्पष्टीकरण
1) यशायाह 10:5-7 — शक्तिशाली राष्ट्रों की अगुवाई का दुष्परिणाम; परमेश्वर का न्याय उनके अहंकार पर टूट पड़ता है।
2) योएल 3:2 — राष्ट्र-गणों के निर्णय का समय आ गया है; प्रभु सबके मामलों की न्यायभावना दिखाते हैं।
3) अय्यूब 12:23-25 — परमेश्वर ही अक्षमता और विनाश के मार्ग को नियंत्रित करते हैं; वह ही समय और तिथि तय करते हैं।
संक्षिप्त समापन
सपन्याह 2:12 एक स्पष्ट स्मरण देता है कि परमेश्वर के न्याय से कोई भी पीछे नहीं रहता—न महत्त्वाकांक्षा, न सत्ता-स्थिरता, न शत्रुतापूर्ण साम्राज्य। इस ज्ञान के साथ विश्वासियों को धैर्य और ईमानदारी के साथ जीना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर की तलवार केवल दुष्टों के लिए है और वह समय पर न्याय करेगा।