Old Testament
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सपन्याह 2:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इससे पहले कि दण्ड की आज्ञा पूरी हो और बचाव का दिन भूसी के समान निकले, और यहोवा का भड़कता हुआ क्रोध तुम पर आ पड़े, और यहोवा के क्रोध का दिन तुम पर आए, तुम इकट्ठे हो।
सपन्याह 2:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 2:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 17:13 (HINIRV) »
राज्य-राज्य के लोग बाढ़ के बहुत से जल के समान नाद करते हैं, परन्तु वह उनको घुड़केगा*, और वे दूर भाग जाएँगे, और ऐसे उड़ाए जाएँगे जैसे पहाड़ों पर की भूसी वायु से, और धूल बवण्डर से घुमाकर उड़ाई जाती है।

भजन संहिता 1:4 (HINIRV) »
दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।

विलापगीत 4:11 (HINIRV) »
यहोवा ने अपनी पूरी जलजलाहट प्रगट की, उसने अपना कोप बहुत ही भड़काया; और सिय्योन में ऐसी आग लगाई जिससे उसकी नींव तक भस्म हो गई है।
सपन्याह 2:2 का तत्कालीन संदर्भ और दैविक चेतावनी
पद यह संकेत देता है कि दण्ड और उद्धार के दिन एक ही समयरेखा में पृथ्वी पर आते हैं। भविष्यवाणी बताती है कि जब तक दण्ड की आज्ञा पूरी न हो, तब तक बचाव का दिन निकलना लगता है, फिर यहोवा का क्रोध लोगों पर आ पड़ता है। यह पुराने समय के संदर्भ में यहूदियों के लिए चेतावनी है कि वे अल्पाल्प, चंचल सुरक्षा-आश्रयों में न रहें, बल्कि परम परमेश्वर की महिमा और निर्णय के सामने सचेत रहें।
ईश्वर के स्वरूप में दर्शित तत्व
यह पाठ बताते हैं कि परमेश्वर का क्रोध न्याय के साथ जुड़ा है और उसकी कुर्सी पर क्रोध का दिन है। साथ ही यह भी दिखता है कि वह दयालु होने के साथ-साथ पवित्र भी है — गलत पर अंकुश लगाते हैं ताकि न्याय का राज्य स्थिर रहे। यहूदियों के लिए यह संदेश है कि वे अपनी चपलता छोड़कर स्मरण रखें कि उनका भाग परमेश्वर के दयालु आशीर्वाद से ही है, और वे उसे दोषपूर्ण मार्गों से रोक दें।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
“दण्ड की आज्ञा पूरी हो” से आशय है कि परमेश्वर ने निर्धारित समय सारिणी बनाई है, और उसकी प्रतिक्रिया उसी क्रम के अनुसार आएगी। “भड़कता हुआ क्रोध” एक सजीव चित्र है जो भगवान की पवित्र घृणा और न्याय को दर्शाता है। “दिन” का प्रयोग समय-काल को स्पष्ट करता है कि यह एक सार्वजनिक, निर्णायक अवसर है, न कि निजी अनुभव।
अनुदेशक टिप्पणियाँ और संबंधित पद
1) यह भविष्यवाणी यह स्पष्ट करती है कि परमेश्वर का निर्णय एक संगठित क्रम में आता है; पाप की अति पर रोक नहीं होती।
2) पवित्रता के कारण, भगवान अन्याय पर चुप नहीं रहते; यह प्रवृत्ति धर्मी रीति-नीति का हिस्सा है।
आमतौर पर समझी जाने वाली बातें (Cross-references)
इन संदर्भों में पाठ यह बताता है कि परमेश्वर का न्याय स्थिर और अपरिवर्तनीय है, तथा उसकी दयालुता के साथ पालन करने पर उद्धार भी संभव है।
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
- अपनी जीवनचर्या में नियमों, धार्मिक समारोहों या लतीफों पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के मार्ग पर टिके रहें; अविवेकपूर्ण आत्म-विश्वास से बचें।
- अनिर्णय की अवस्था में भी ईश्वर की चर्या के अनुसार चलना सीखें; उसकी आज्ञाओं के क्रम को समझना आवश्यक है।
- दया और न्याय के बीच संतुलन बनाए रखें: आपसी प्रेम और सत्य की जड़ें मजबूत करें ताकि भय के समय में भी विश्वास बना रहे।
सारांश
स्पष्ट संदेश है कि दण्ड का समय पहले आ सकता है और फिर उद्धार का दिन नजदीक आ सकता है; परमेश्वर की पवित्रता और न्याय के कारण यह क्रोध आता है, परन्तु वह चाहते हैं कि लोग पलायन न करें बल्कि लौटकर वही करें जो सही है। यह पाठ आज भी चेतावनी देता है: अपने रास्तों को सुधारो, परमेश्वर के सामर्थ्य और दया पर भरोसा रखो।
मूल धरोहर से उद्धरण (केवल जिनमें उपलब्ध)
जहाँ आवश्यक हो, नीचे उनके स्पष्ट उद्धरणों के स्थान दिए जा सकते हैं: - मैथ्यू हेन्ले के अनुसार: “...” - एल्बर्ट बार्न्स के अनुसार: “...” - एडम क्लार्क के अनुसार: “...”