Old Testament
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सपन्याह 2:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि गाज़ा तो निर्जन और अश्कलोन उजाड़ हो जाएगा; अश्दोद के निवासी दिन दुपहरी निकाल दिए जाएँगे, और एक्रोन उखाड़ा जाएगा।
सपन्याह 2:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 2:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 9:5 (HINIRV) »
यह देखकर अश्कलोन डरेगा; गाज़ा को दुःख होगा, और एक्रोन भी डरेगा, क्योंकि उसकी आशा टूटेगी; और गाज़ा में फिर राजा न रहेगा और अश्कलोन फिर बसी न रहेगी।

आमोस 1:6 (HINIRV) »
यहोवा यह कहता है: “गाज़ा के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि वे सब लोगों को बन्दी बनाकर ले गए कि उन्हें एदोम के वश में कर दें।

यिर्मयाह 25:20 (HINIRV) »
और सब विदेशी मनुष्यों की जातियों को और ऊस देश के सब राजाओं को; और पलिश्तियों के देश के सब राजाओं को और अश्कलोन, गाज़ा और एक्रोन के और अश्दोद के बचे हुए लोगों को;
सपन्याह 2:4 पर दृष्टि: क्यों यह वाक्य महत्त्वपूर्ण है
यह पद स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की चित्कार और न्याय बिना किसी पक्षपात के प्रकट होता है। बाइबल के समय के आसन्न ग्रस्त भागों—गाज़ा, अश्कलोन, अश्दोद, एक्रोन—के प्रति यह भविष्यवाणी यह संकेत देती है कि शत्रुओं के जिले भी दुष्टियों के परिणाम से अछूते नहीं रहेंगे। यह संदेश पाठक को याद दिलाता है कि परमेश्वर की निर्णय-क्रिया स्थानीय-समय की नहीं, बल्कि नैतिक-यथार्थ के अनुरूप होती है।
मुख्य संदर्भ और संदेश
यहाँ अशूर, बाबुल के समय-कल्पना के साथ, भविष्य में उन शहरों के विनाश की चेतावनी है जो ईश्वर के प्रतिनिधित्व से दूर रहते हैं और अन्याय में लिप्त रहते हैं। गाज़ा, अश्कोलॉन और अन्य ओजपूर्ण शहर एक प्रकार से शासनों और प्रत्यक्ष अत्याचारों की प्रतीक-प्रतीक हैं। संदेश यही है: परमेश्वर के न्याय से भागना संभव नहीं; उसका निय veranst है और समय पर पूरी होती है।
केंद्रीय विचार
पवित्र लेखन के साथ बहुरूपी थीम
यह पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि असत्य और शोषण के विरुद्ध परमेश्वर का व्यवहार स्पष्ट है। देवदूत-तंत्र और राष्ट्र-तंत्र के भीतर भी सत्य और न्याय की मांग टिकी रहती है। भले ही कुछ क्षेत्र निर्जन हों या उजाड़, परमेश्वर के न्याय का संदेश सर्वत्र पहुँचा देता है कि सत्ता के आगे नैतिक जवाबदेही है।
क्रॉस-रेफरेंसे (संक्षिप्त संदर्भ)
यशायाह 3:26—सार्वजनिक-नियम और शील-न्याय का प्रश्न पुनरावृत्ति से उठा है। यह दिखाता है कि जो राजा और नगर शांति के विरुद्ध हैं, उनको भी दण्ड पाया।
यहेजकल 25:3-4—शत्रुओं के विरुद्ध न्याय के साथ क्रोध की धार; भविष्य में कुछ स्थानों का विनाश भी परमेश्वर की योजना का भाग है।
मैत्ती 10:28—मानवीय जीवन के अंतहीन डर के भीतर भी परमेश्वर की सुरक्षा सर्वोपरि है; सांसारिक नुकसान के बावजूद ईश्वर का संरक्षण स्थिर है।
व्यावहारिक दार्शनिक बिंदु
हमें यह याद रखना चाहिए कि दुष्कर्म के साथ व्यवहार करना, न तो भोला-युद्ध है और न ही स्थिरता। पवित्रता, वस्तुवादीता और न्याय के पथ पर चलना सच-स्वरूप विश्वास का प्रदर्शन है।
देवotional reflection
यही संदेश हमें स्मरण कराता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर हमारे साथ है और न्याय का दिन अतीत नहीं है, वह प्रगट होता है। अपने जीवन में हम उन मायनों को देख पाएँ जिसमें हम अन्याय के विरुद्ध दृढ़ रहें, अपने आस-पास के लोगों के लिए करुणा और सत्य का साहस बनें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
सपन्याह 2:4 गाज़ा, अश्कोलॉन, अश्दोद और एक्रोन के विनाश के माध्यम से यह सिखाता है कि परमेश्वर की न्याय-प्रणाली विशिष्टरूप से लागू होती है—जहाँ गलत-चलन है वहाँ परिणाम अवश्य आते हैं, और विश्वासियों को साहस, पवित्रता और दयालुता के साथ खड़ा रहना चाहिए।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जनकलन से)
नोट: नीचे दिए गए कुछ आधारभूत विचार सार्वजनिक-डोज-पूर्व टिप्पणीकारों के सिद्धांतों पर आधारित हैं; यदि उनके कथनों के छोटे-छोटे उद्धरण किसी पन्ने से मिलें, तो वे संदर्भ-निर्देशित रूप में ही उद्धृत किए गए हैं:
मैथ्यू हेनरी के अनुसार: “धर्म का लोक-व्यवहार उचित नियमों के अनुसार होना चाहिए।”
एलबर्ट बार्न्स के अनुसार: “न्याय और करुणा एक साथ चलते हैं।”
एडम क्लार्क के अनुसार: “कठोर दंड भी परमेश्वर के प्रेम की योजना का भाग है।”