Old Testament
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सपन्याह 2:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा उनको डरावना दिखाई देगा*, वह पृथ्वी भर के देवताओं को भूखा मार डालेगा, और जाति-जाति के सब द्वीपों के निवासी अपने-अपने स्थान से उसको दण्डवत् करेंगे।
सपन्याह 2:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 2:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 10:5 (HINIRV) »
इनके वंश अन्यजातियों के द्वीपों के देशों में ऐसे बँट गए कि वे भिन्न-भिन्न भाषाओं, कुलों, और जातियों के अनुसार अलग-अलग हो गए।

भजन संहिता 22:27 (HINIRV) »
पृथ्वी के सब दूर-दूर देशों के लोग उसको स्मरण करेंगे और उसकी ओर फिरेंगे; और जाति-जाति के सब कुल तेरे सामने दण्डवत् करेंगे।

भजन संहिता 117:1 (HINIRV) »
हे जाति-जाति के सब लोगों, यहोवा की स्तुति करो! हे राज्य-राज्य के सब लोगों, उसकी प्रशंसा करो! (रोम. 15:11)
क्यों यह पद महत्वपूर्ण है
सपन्याह (सफन्याह) 2:11 में यहोवा की प्रक्षुब्धि और उसकी सार्वभौमिक अधिकारिता का दृश्यमान चित्रण मिलता है। यह पद बताता है कि धीरे-धीरे वैश्विक न्याय और ईश्वर के मुक़ाबले मानविक देवताओं की अस्थिरता प्रकट होगी। यह आज के पाठक के लिए सचेत करता है कि असली शक्ति मानवीय कल्पनाओं या मूर्तिपूजा में नहीं, बल्कि परमेश्वर में है।
मूल संदर्भ
सफन्याह की पुस्तक यहूदाह के रोम का पूर्वाभास और दिन-प्रभु के न्याय की चेतावनी समेटे हुए है। अध्याय 2 में पैरोकारी शत्रु देशों—अश्शूर, मोआब, अमोन इत्यादि—की निन्दा और गिरावट का वर्णन है। 2:11 उन राष्ट्राध्यक्षों को संदर्भित करता है जो खुद को देवता समझते हैं या जिनकी पूजा के लिये लोग उनके नामों पर निर्भर हैं। यहाँ ईश्वर इन 'देवताओं' को भूखा मार देगा—अर्थात् उनकी शक्ति और प्रभाव को छीन लेगा—और फिर पराक्रमी ईश्वर की महिमा से सब देश स्तब्ध होकर स्मरण करेंगे।
मुख्य संदेश
यह पद तीन मुख्य बिंदु देता है: (1) यहोवा की भयानक प्रकटता—ईश्वर न्याय के लिये प्रकट होता है और उसकी महिमा डराती भी है; (2) मूर्तिपूजा तथा मानव निर्मित देवताओं की विफलता—वे "भूखे" होते हैं, यानी अपनी रक्षा न कर पाने वाले और निर्भरशील; (3) सार्वभौमिक सबमिशन—अन्ततः जाति-जाति के लोग ईश्वर के सम्मुख विनम्रता से झुकेंगे। यह न्याय और दया दोनों का संकेत है: दया उन लोगों के लिये जो पलटते हैं, और न्याय उन देशों के लिये जो दुष्टता में टिके रहे।
समर्थक बाइबिल विषय
प्रासंगिक संस्पर्श (क्रॉस-रिफरेंसेस)
यशायाह 2:17—जो भी मानव गौरव पर टिका है वह पराजित होगा; यहा भी वही विषय आता है कि ईश्वर की उपस्थिति मानव अभिमान को तोड़ देती है।
भजन संहिता 96:5—कहा गया है कि मूर्तियाँ मनुष्य की रचना हैं और वे बोल भी नहीं सकतीं; सफन्याह 2:11 उन मूर्तियों के असहाय होने को रेखांकित करता है।
प्रकाशितवाक्य 15:4—राशियों के बीच परमेश्वर के कार्यों का गौरव मनाया जाता है; सफन्याह की भविष्यवाणी भी अन्ततः उस सार्वभौमिक रुतबे की ओर संकेत करती है।
पुराने टिप्पणीकारों से संक्षिप्त उद्धरण
मैथ्यू हेनरी परंपरागत रूप से कहता है कि "ईश्वर परम सत्ता है और सब देवताओं को नष्ट करेगा"—यह विचार सफन्याह के तर्क से मेल खाता है। (सटीक उद्धरण: "God will make himself terrible to them, he will cut off the gods of the earth by famine.")
अल्बर्ट बार्न्स ने लिखा कि यह वाक्य "दैनिक जीवन तथा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मूर्तिपूजा की असफलता" दिखाता है।
एडम क्लार्क ने इस प्रकार व्याख्या की कि ईश्वर का ताण्डव निस्संदेह होगा और वह अपनी अभिव्यक्ति से राष्ट्रों को पराजित करेगा।
निष्कर्ष और साधना-चिन्तन
सफन्याह 2:11 हमें याद दिलाता है कि डरावनी महानता और न्याय की शक्ति परमेश्वर के पास है। व्यक्तिगत स्तर पर यह हमें आमंत्रित करता है कि हम जिन "देवताओं" का अनुसरण करते हैं—शैली, धन, राष्ट्रवाद, या स्वयं की प्रतिष्ठा—उनकी सीमाएँ पहचाने और सच्चे ईश्वर के आगे झुकें। सामूहिक रूप से यह राष्ट्रों को चेतावनी है कि जो मार्ग अनैतिकता और अन्याय पर टिका है, वह टलेगा।
विवेक के लिये संक्षिप्त प्राथना: "हे ईश्वर, तू जो सर्वशक्तिमान है, हमारे अहंकार और असली-नसलों के देवताओं को उजागर कर दे; हमें सच्चाई के आगे विनम्र कर और अपनी महिमा से मार्गदर्शन दे। आमीन।"