Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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1 इतिहास 11:31 का संदर्भ और पाठ का तात्पर्य
यह पाठ गिबा नगर के एक विशिष्ट इतिहासात्मक पृष्ठभूमि में आता है, जहाँ बिन्यामीनियों के नगरवासियों के बारे में उल्लेख किया गया है। यह एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण विवरण है जो यह संकेत देता है कि राजा डेविड के समय की सेना-निर्माण और क्षेत्रीय कौन-कौन से समूह एकत्र थे। नीचे दिए गए टिप्पणी में हम देखते हैं कि यह वाक्य किस प्रकार विश्वास, आस्था और ईश्वर की योजना से जुड़ा है।
ईश्वर और विश्वास के प्रकाश में पाठ
सूत्र-शैली में यह पंक्ति यह दर्शाती है कि God की योजनाओं में छोटे-छोटे समूह भी एक भूमिका निभाते हैं; हर एक व्यक्ति की पहचान और उसका स्थान ईश्वर की संविधान में निर्धारित है। इतिहास के इन छोटे-छोटे उल्लेखों से यह स्पष्ट होता है कि परमেশ्वर किसी भी सामाजिक धुरी को अनदेखा नहीं करता, बल्कि हर समुदाय और परिवार को दिव्य योजना के भाग के रूप में उपयोग करता है।
मुख्य शब्द और चिह्नों की स्पष्ट व्याख्या
संदर्भ और अन्य आयाम
इस अवधि के अन्य भागों में इस प्रकार के छोटे-छोटे समूहों के गुणधर्म, नेतृत्व और उपलब्धियों का उल्लेख मिलता है। हलाल, सत्ता और सामरिक संगठन के बीच एक संतुलन बना रहता है जिसमें परमेश्वर की इच्छा प्रमुख होती है। नीचे दिए गए संदर्भों से विचार में गहराई आती है:
आज के पाठ के साथ व्यवहार
आज के विश्वास-पाठ में यह स्मरण दिलाता है कि: छोटे-छोटे समुदाय भी परमेश्वर के कार्य में योगदान देते हैं; कोई भी सामाजिक वर्ग या क्षेत्र ईश्वर की योजना के बाहर नहीं होता। हमारी आस्था एक समुदायिक ईमानदारी और सहयोग पर टिकती है, जहाँ हर सदस्य अपने परमेश्वर-निर्देश के अनुसार आगे बढ़ता है।
क्रॉस-रेफरेन्स संबोधन
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि पुराने नियम में जातीय-नियोजन और सामरिक नियोजन एक दूसरे के पूरक हैं:
कहने योग्य छोटे-परिचय
यह वाक्य एक संकेत है कि परमेश्वर योजना बनाते समय प्रत्येक व्यक्ति व समुदाय की भूमिका मानते हैं, भले ही वे गली-गली के शहर-जन के रूप में क्यों न हों।
सार-संक्षेप
गुप्त उद्देश्य से आगे बढ़ते हुए, यह पाठ हमें सिखाता है कि विश्वास और सेवा की छोटी-छोटी प्रस्तुतियाँ भी परमेश्वर के महान उद्देश्य में योगदान देती हैं।
उद्धरण स्रोत: यदि आवश्यकता हो तो प्रकाशित पुख्ता टिप्पणीकारों के मिलते-जुलते विचारों को संक्षेप में जोड़ा जा सकता है, परन्तु मूल टेक्स्ट से शब्द-शः उद्धरण केवल वही होंगे जो सीधे उल्लेखित हों।