Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 1:1 1 शमूएल 1:2 1 शमूएल 1:3 1 शमूएल 1:4 1 शमूएल 1:5 1 शमूएल 1:6 1 शमूएल 1:7 1 शमूएल 1:8 1 शमूएल 1:9 1 शमूएल 1:10 1 शमूएल 1:11 1 शमूएल 1:12 1 शमूएल 1:13 1 शमूएल 1:14 1 शमूएल 1:15 1 शमूएल 1:16 1 शमूएल 1:17 1 शमूएल 1:18 1 शमूएल 1:19 1 शमूएल 1:20 1 शमूएल 1:21 1 शमूएल 1:22 1 शमूएल 1:23 1 शमूएल 1:24 1 शमूएल 1:25 1 शमूएल 1:26 1 शमूएल 1:27 1 शमूएल 1:28



1 शमूएल 1:27 पर टिप्पणी
पाठ-संदर्भ: यह वही बालक है जिसके लिये मैंने प्रार्थना की थी; और यहोवा ने मुझे मुँह माँगा वर दिया है। इस वचन के पीछे शिलो की आदरणीय माता हन्ना की प्रार्थना और परमेश्वर की कृपा की पुष्टि है। जब दायित्वपूर्ण प्रार्थना ईश्वर के समक्ष स्वीकार की जाती है, तब वह हमारी इच्छाओं को नहीं केवल पूरा करता, वरन् हमारे जीवन को उसका उपयोग करने के योग्य बनाता है। हन्ना का बेटा और उसके जन्म का कारण एक संतुष्टि-भरी स्वीकारोक्ति है कि ईश्वर ने उनके आशीषों को कबूल कर लिया।
मुख्य अर्थ
यह श्लोक दुआ का फल और ईश्वर की प्रतिज्ञा के पूरा होने की पुष्टि है। हन्ना ने वर्षों-भर कठोर असंतोष के बीच प्रभु से पुत्र माँगा था; उनके विनम्र, ईमानदार प्रार्थना के उत्तर में परमेश्वर ने एक दिव्य योजना के अनुसार शमूएल को जन्म दिया, जिसे उन्होंने और उसके पिता एल्कनहा ने स्वीकार किया। अब प्रार्थना का लक्ष्य पूरा हो चुका है और माता उससे यह बताती है कि यह बालक ईश्वर की देन है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध वाक्यांश (Cross-references) और उनसे जुड़ी समझ
कई अन्य कथा-काव्यों में भी प्रार्थना-उत्तर की स्पष्टता दिखती है:
व्यावहारिक विचार
हममें से जो किसी दीर्घ प्रतीक्षा, असंतोष या असहाय स्थिति में हैं, वे हन्ना के उदाहरण से सीख सकते हैं: आप जिस बात के लिए रोते हैं, उसे ईश्वर के सामने रखिए; वह आपके समयानुसार उत्तर दे सकता है। साथ ही यह याद रहे कि प्रतिक्रियात्मक आशीष एक निर्धारित उद्देश्य के लिए होती है—हमारा जीवन भी ईश्वर के हाथों में एक उद्देश्य के लिए रखा गया है।
संक्षेप
यह श्लोक हमें बताता है कि परमेश्वर ने हन्ना की प्रार्थना सुनी और उसे पुत्र प्रदान किया; यह बालक ईश्वर के लिए समर्पित था और इसी कारण उसे माँगने वाले की भांति ही स्वीकार किया गया। यह कथा विश्वास, प्रभु-भरोसा और जीवन-उद्देश्यों की कसौटी है—प्रार्थना का उत्तर परमेश्वर की योजना के अनुरूप आता है।
नोट्स और प्रभावी उद्धरण
यहां तक कि मैथ्यू हेन्री, ऐल्बर्ट बर्न्स या एडम क्लार्क के सीधे उद्धरण खुले रूप में शामिल नहीं किए गए हैं, पर उनके विचारों के अनुसार यह पाठ-प्रत्यय आस्था, समर्पण और ईश्वर-प्राप्ति की प्रबल शक्ति को उजागर करता है।