1 शमूएल 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु उसकी सौत इस कारण से, कि यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी, उसे अत्यन्त चिढ़ाकर कुढ़ाती रहती थी।

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1 शमूएल 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का संक्षेप और संदर्भ

1 शमूएल 1:6 में स्त्री-सतिवार "परन्तु उसकी सौत इस कारण से, कि यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी, उसे अत्यन्त चिढ़ाकर कुढ़ाती रहती थी" का अर्थ है कि पनीह नामक महिला की सौत उसकी कोख की कमी पर ईर्ष्या कर‑कर के उसे तिरस्कृत करती थी; यहोवा के विधान से वह गर्भवती नहीं हो पा रही थी, और इसका दुष्प्रभाव दोनों स्त्रियों के बीच तनाव और पीड़ा बन गया। यह वाक्य इस पंक्ति के सामाजिक-परिवारिक तनाव को उजागर करता है, जहाँ गर्भधारण की योग्यता परिवार की प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत भावनाओं के केंद्र में रहती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह कथा पुत्रारोहण के समय की है जब एल्कना (हन्नाह) एक परमेश्वर‑भरोसे और भावनात्मक संघर्ष से गुजर रही थीं। उनकी सौत, पनीह, ईश्वर द्वारा हो रहे गर्भ-रोक के कारण कुढ़ना और तिरस्कार करना चाहती थी, ताकि एल्कना की पीड़ा बढ़े। 1 शमूएल के प्रारम्भ में इस संघर्ष का उद्देश्य यह दिखाना है कि परमेश्वर के कार्य में मानवीय अनुभव—युद्ध, असफलता, और धैर्य—कैसे रूप लेते हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • ईर्ष्या बनाम कृपा: गर्भधारण का असफल होना समाज में प्रतिस्पर्धा का कारण बन सकता है; परमेश्वर के चयन और कृपा का विजय इस争्म को चुनौती देता है।
  • धैर्य और प्रार्थना: एल्कना की कथा में, असफलता के बावजूद वह परमेश्वर से सहायता माँगती है, जो आगे के अध्यायों में हन्नाह की प्रार्थना और उत्तर के रूप को दिखाता है।
  • सामाजिक तनाव: सौतेपन का दर्द पारिवारिक जीवन को प्रभावित करता है; यह पाठक को परिवारिक बंधुत्व और संवेदना की आवश्यकता सिखाता है।

संबद्ध वाक्यों के विचार

प्रभु की योजना में पंक्ति—निराशा के समय भी दीपक जल सकता है, और वह समय आता है जब ईश्वर अपने चयन को साकार करते हैं।

छोटे थीम-विक्रय

  1. ईश्वर की दृष्टि में प्रत्येक व्यक्ति का मूल्य
  2. धैर्य और प्रार्थना का प्रभाव
  3. परिवारिक संघर्ष के दौरान नैतिक संवेदना

अन्य आपसी संदर्भ (Cross-references)

– सीमाबद्ध भावनात्मक तनाव पर 1 समोएल 1:3‑8 के पैटर्न के साथ तुलना। यह दिखाता है कि कैसे सामाजिक संघर्ष पवित्र नीतियों के अनुसार हल होते हैं।

– 1 समूएल 2:1‑10 में हन्नाह के प्रार्थना-गीत से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर पर भरोसा कैसे पीड़ा को प्रेरणात्मक आराधन में परिवर्तित कर सकता है।

– महत्वाकांक्षा बनाम विश्वास: नीति-वाक्यों के साथ इसे जोड़कर यह समझ आता है कि व्यक्तियों के भीतर विश्वास और परमेश्वर की कृपा कब कैसे उभरती है।

व्यावहारिक takeaway

जो स्थिति चाहे कैसी भी हो, परमेश्वर पर विश्वास और प्रार्थना हमारी आंतरिक पीड़ा को भी सम्भाल सकता है। सामाजिक दबाव और ईर्ष्या के बीच भी ईश्वर की कृपा में आशा बनी रहती है।

कथन‑टिप्पणी (नोट्स)

यहाँ लेखक‑नोट में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त संदर्भ उपलब्ध हैं। अगर पूर्व के उद्धरण मिलते हैं, तो वे संक्षेप में उद्धृत किए जा सकते हैं।

उद्धृत स्रोत संकेत

यदि उपलब्ध हो, तो नीचे दिए गए के डेड-सीमित उद्धरण का प्रयोग करें: 1) "Anger and oppression produce great inward sorrows" (सारांशित विचार) 2) "Prayer elevates the humble" (एल्कना के प्रार्थना‑आह्वान के संदर्भ) 3) "God's purposes are fulfilled in patient waiting" (निर्धारण विचार)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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