Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 22:1 1 शमूएल 22:2 1 शमूएल 22:3 1 शमूएल 22:4 1 शमूएल 22:5 1 शमूएल 22:6 1 शमूएल 22:7 1 शमूएल 22:8 1 शमूएल 22:9 1 शमूएल 22:10 1 शमूएल 22:11 1 शमूएल 22:12 1 शमूएल 22:13 1 शमूएल 22:14 1 शमूएल 22:15 1 शमूएल 22:16 1 शमूएल 22:17 1 शमूएल 22:18 1 शमूएल 22:19 1 शमूएल 22:20 1 शमूएल 22:21 1 शमूएल 22:22 1 शमूएल 22:23



औचित्य और संदर्भ: 1 शमूएल 22:16 (HINIRV)
मुख्य अर्थ: राजा अहीमील को आशीर्वाद-हीन चेतावनी नहीं, बल्कि कठोर निर्णय के रूप में कहा गया निर्देश-नोटिस; उसने और उसके पिता के घराने के लोगों के विरुद्ध मार डालने की आज्ञा पाई, जो कि य Recorded सत्ता के भीतर न्याय और प्रतिशोध के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत हुआ है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ उस समय का है जब दाऊद की सहायता से 400 वैद्य-प्रशासनियों ने राजा की अनिश्चित और खतरनाक नीतियों के खिलाफ शरण ली थी। तत्कालीन राजा शौल ने अहीमेलेक के हूबहू परिवार को मार डालने की घोषणा की, यह दर्शाता है कि सत्ता के कठोर निर्णय कभी-कभी धर्म-नियम और न्याय के बाहर भी निकल जाते हैं। यह घटना दाऊद की गुप्त सुरक्षा-योजना और भविष्य की संघर्ष-नीति को भी उभारती है, जहाँ अहीमेलेक का उत्तरदायित्व प्रभावित होता है।
व्याख्या के बिंदु
सूक्ष्म भटकाव से सीख
यहां का संदेश यह है कि मानव-निर्णय कभी-कभी अनैतिक परिणामों को जन्म दे सकता है और ईश्वरीय न्याय सदा सर्वोपरि रहता है। जब सत्ता अंधे होकर कार्य करती है, तो दुष्कर आयोजनों के बावजूद ईश्वर की योजना में विश्वास बनाए रखना चाहिए।
संदर्भ-आउटकम
संयुक्त विचार:
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) देह-न्याय और प्रतिशोध पर नीतिगत पाठ: प्रभाव-हिंसक आदेश के विरोध के बारे में शिक्षाएं देता है।
2) दया और विश्वास की भूमिका: कुछ परिस्थितियों में ईश्वर की आज्ञाओं के साथ आचरण जोड़ा जाना चाहिए, भले ही मानव आदेश कठोर क्यों न हो।
3) भविष्य की सुरक्षा और परमेश्वर की योजना: कठिन समय में भी परमेश्वर की सुरक्षा-योजना आशा देती है।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
स्थिति चाहे कितनी भी गहरी क्यों न हो, धीरज बनाए रखें, सत्य बोलें और परमेश्वर के उद्देश्य पर भरोसा करें। सत्ता के दायरे में कठोर निर्णय अक्सर मानवीय दृष्टि से अस्थिर होते हैं; पर परमेश्वर की दृष्टि में न्याय और करूणा कभी न टूटे।
नोट: नीचे उद्धृत समालोचकों के संक्षिप्त संकेत दिए जा रहे हैं, पर ये पूर्ण पाठ नहीं। आवश्यक संदर्भ संकेत ठीक-ठीक टिप्पणियों से मेल खाते हैं:
एलबर्ट Barnes के अनुसार यह घटनाक्रम सत्ता-नियमन की सीमा दिखाता है और ईश्वर के प्रति विश्वास बना रहने की आवश्यकता को उजागर करता है। (उद्धरण संक्षेप)
Matthew Henry की प्रवचन-शैली इस पाठ में नैतिक दायित्व और सत्ता के आदेश के बीच तनाव को प्रकाश में लाती है, ताकि पाठक सत्य-न्याय को पहचाने। (उद्धरण संक्षेप)
Adam Clarke यह बताने में सहायक है कि इस प्रकार के निर्णय राजनीति और धर्म के संकीर्ण क्षेत्र में कैसे उत्पन्न होते हैं, और कैसे विश्वासियों को आत्म-निरीक्षण करना चाहिए। (उद्धरण संक्षेप)