1 शमूएल 20:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि जब तक यिशै का पुत्र भूमि पर जीवित रहेगा, तब तक न तो तू और न तेरा राज्य स्थिर रहेगा। इसलिए अभी भेजकर उसे मेरे पास ला, क्योंकि निश्चय वह मार डाला जाएगा।”

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1 शमूएल 20:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

वचन का सरल अर्थ

1 शमूएल 20:31 में कहा गया उद्घोष आशय यह है कि यिशै के पुत्र (योनातान के मित्र के रूप में) राजा के स्थायित्व के लिए बाधक बना सकता है यदि वह जीवित रहता है; इसलिए उसे हटाने की योजना के साथ उसे लाकर मेरे पास ला कर निश्चय हत्या कर दी जाएगी। यह वाक्य स्पष्ट करता है कि दाऊद को मार डालने की आकांक्षा सत्ता-हित के लिए अत्यंत निंदनीय है और एक राजनीतिक दल की अस्थिरता को भी बढ़ाती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह भाग शंकर/यदो के समय का है जब दाऊद क्रूर राजनीतिक संघर्ष के बीच बचाव चाहता है। शाऊल के राज्य-यत्नों में दाऊद एक प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बन चुका था; यिशै का पुत्र होने के बावजूद वह सत्ता के जोखिम में था। यहाँ राजा के मंत्री इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि दाऊद को समाप्त करना अनिवार्य है ताकि राज्य की स्थिरता बनी रहे।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • राज्य-सुरक्षा बनाम मानवीय जीवन: सत्ता की स्थिरता के तर्क कभी-कभी नैतिक दायित्वों से टकराते हैं, पर उत्तरदायित्व यह है कि हत्या जैसे कदम संभव नहीं हैं यदि वह परमात्मा के निर्देशों से विचलित हो।
  • राजनीतिक चक्र में आश्वासन और भय: शासक की भयावहता और उसकी सुरक्षा-नीति दुष्परिणामों को जन्म दे सकती है; कभी-कभी यह आत्म-आत्म-ह्रास तक ले जा सकता है यदि न्याय और धर्म पर नहीं, तो सत्ता पर अधिक जोर दिया जाए।
  • विश्वास और सुरक्षा के दायरे: दाऊद को मारने की धमकी एक नैतिक संकट है, जिसमें नेताओं को धर्मीय मार्ग से मार्गदर्शन ढूंढ़ना चाहिए।

सम्बन्धी आयतें

• किंग्स/राजा के मामलों में नैतिकता और कर्तव्य के प्रश्न: पुराने vivent पाठों में पवित्रता और कर्तव्य की परंपरा बताती है कि राजसी शक्ति के प्रयोग में भी ईश्वर के कानून सर्वोपरि रहते हैं।

• दया और न्याय से प्रेरित निर्णय: अन्यत्र उपलब्ध संदर्भ बताते हैं कि दया से नीति-निर्णय अधिक स्थिरता देता है, और बलपूर्वक हत्या से शासन अस्थिर होता है।

• विश्वासघात और मित्रता के मान: यिशै पुत्र के साथ मित्रता का मूल्य और राजनीति के दांव-पेच के बीच सत्यनिष्ठा की भूमिका की संकेत देता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह श्लोक सत्ता-स्थिरता के नाम पर नैतिक सीमा और मानवीय मूल्य के बीच चलने वाले तनाव को दिखाता है। परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप मार्ग ही दीर्घकालिक शांति और स्थिरता का मार्ग है; हत्या या छल से प्राप्त स्थिरता अस्थायी और अपूर्ण है।

टेकअवे

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 20:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 शमूएल 26:16 (HINIRV) »
जो काम तूने किया है वह अच्छा नहीं। यहोवा के जीवन की शपथ तुम लोग मारे जाने के योग्य हो, क्योंकि तुम ने अपने स्वामी, यहोवा के अभिषिक्त की चौकसी नहीं की। और अब देख, राजा का भाला और पानी की सुराही जो उसके सिरहाने थी वे कहाँ हैं?”

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1 शमूएल 20:8 (HINIRV) »
और तू अपने दास से कृपा का व्यवहार करना, क्योंकि तूने यहोवा की शपथ खिलाकर अपने दास को अपने साथ वाचा बँधाई है। परन्तु यदि मुझसे कुछ अपराध हुआ हो, तो तू आप मुझे मार डाल; तू मुझे अपने पिता के पास क्यों पहुँचाए?”

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1 शमूएल 19:6 (HINIRV) »
तब शाऊल ने योनातान की बात मानकर यह शपथ खाई, “यहोवा के जीवन की शपथ, दाऊद मार डाला न जाएगा।”

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