1 शमूएल 20:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु यदि मैं लड़के से यह कहूँ, 'सुन, तीर उधर तेरे उस ओर हैं,' तो तू चले जाना, क्योंकि यहोवा ने तुझे विदा किया है।

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1 शमूएल 20:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 20:22 का मुख्य व्याख्यात्मक विचार

यह वचन बतला रहा है कि दाऊद को यहोवा की विधि से सुरक्षित रखने के लिए उसकी भलाई और शत्रु के समझौते से पूर्व चेतावनी दी जा रही है। जब बनामोใหม่ की स्थिति से डरो या डर के कारण क्रिया-प्रणाली में परिवर्तन आये, तब उसे यह बोलकर चले जाने की अनुमति मिलती है कि उसकी राह खुले और सुरक्षित रहे। यहाँ तीर-उद्धार और “विदा किया गया है” का संकेत न केवल भौतिक बचाव का संकेत है, बल्कि प्रभु की योजनाओं के अनुसार उसकी भूमिका और स्थान के निर्धारण को दर्शाता है।

साहित्यिक संदर्भ के भीतर पंक्ति-वार दृष्टिकोण

यह पाठ यहूदियों के भीतर एक गुप्त-तर्क का भाग है: যুদ্ধ-परिस्थितियों में मित्रता, भरोसे और परीक्षण का सामना। वहाँ के संवाद में दाऊद और य He यह प्रकृति दिखाती है कि कैसे एक निडर आचरण और भगवान के संकेतों पर विश्वास-निर्भर निर्णय भविष्य के मार्ग तय करते हैं। जब दोस्ती की सुरक्षा एक ओर है और शत्रु-जोखिम दूसरी ओर, तब समझ आता है कि जीवन के फैसलों में धैर्य और विवेक सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

धर्मशास्त्रीय महत्व

यह वचन दो मुख्य बातें उभारता है — एक, भगवान के निर्देशों के अनुसार दूरी बनाए रखना, और दो, सुरक्षा-योजना के भीतर कार्य को छोड़ना नहीं, बल्कि आवश्यक कदम उठाना। दाऊद के संदर्भ में यह दिखाता है कि वैयक्तिक निर्णयों से परमेश्वर की योजना कैसे संचालित होती है। यह शांति और विश्वास का संतुलन सिखाता है: खतरे के समय में भी समझदारी से दूर जाना, ताकि परमेश्वर के उद्देश्य बाधित न हों।

अन्य शास्त्रीय टिप्पणीकारों से संकलन (संयोजन)

एच. मैथ्यू हेनरी कहा करते हैं कि इस प्रकार की दूरी और संकेत यह बताती है कि भक्त के लिए प्रभु की योजना में स्वतः निर्णय नही, बल्कि परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप चलना आवश्यक है।

एल्बर्ट बार्न्स ने इस वाक्य को व्यवहारिक रूप में देखते हुए कहा है कि मित्र और शत्रु के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहिए ताकि परमेश्वर की सुरक्षा बनी रहे।

एडम क्लार्क भी इस बात पर बल देते हैं कि एक जमाने में भक्त की राह में निर्णायक संकेत परमेश्वर की मार्गदर्शक सत्ता के रूप में होते हैं; यहाँ भी तीर-उद्धार जैसे संकेत एक सुरक्षा-विधि के रूप में प्रस्तुत है।

पहचान-योग्य क्रॉस-रेफरेंसेज़

1 समूएल 20:12–13 — दोस्ती और विश्वास की गहराई पर आधारित संकेत; यह दर्शाता है कि निर्णय में मित्रता का भरोसा और परमेश्वर की योजना एक साथ कैसे चलते हैं।

यहोवा-आशीष की सुरक्षा के बारे में गीत 31:21— भय के समय भी परमेश्वर की रक्षा का भरोसा।

मती 28:20 — प्रभु का साथ हर कदम पर; यहाँ भी दाऊद के मार्ग में ईश्वर की उपस्थिति का विचार मिलता है।

स्व-चिंतन के कुछ प्रश्न

  • क्या कभी मैं जोखिम उठाने के बजाय सुरक्षित दूरी रखने से प्रभु की योजना के साथ सामंजस्य बना पाया हूँ?
  • क्या मेरा निर्णय भय के बजाय विश्वास और प्रमाणित संकेतों पर आधारित रहा है?

संक्षिप्त निष्कर्ष

1 शमूएल 20:22 में एक लोक-व्यावहारिक चेतावनी है— सचेत रहें, पर निर्भय रहें, और परमेश्वर के संकेतों के अनुसार चलें। यह पाठ न केवल सुरक्षा की बात करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि ईश्वर की योजना में हर कदम पर विवेक, विश्वास और संयम चाहिए। दाऊद के लिए यह मार्गदर्शक संकेत थे ताकि उसका लक्ष्य परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप रहे और उसकी सुरक्षा बनी रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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जब लड़का योनातान के चलाए तीर के स्थान पर पहुँचा, तब योनातान ने उसके पीछे से पुकारके कहा, “तीर तो तेरी उस ओर है।”

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