1 शमूएल 20:32 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

योनातान ने अपने पिता शाऊल को उत्तर देकर उससे कहा, “वह क्यों मारा जाए? उसने क्या किया है?”

पिछला पद
« 1 शमूएल 20:31
अगला पद
1 शमूएल 20:33 »

1 शमूएल 20:32 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का प्रत्यक्ष बयान

योनातान अपने पिता शाऊल से पूछते हैं कि क्यों किसी को मारा जाए, जिसने कुछ नहीं किया है—यह शाऊल की क्रोधपूर्ण निर्णय-घटित नीति के विरुद्ध एक नैतिक प्रश्न है और बेटी-परंपरा से जुड़ा है कि अधर्म को कानून बनाकर समर्थित नहीं किया जा सकता।

पृष्ठभूमि और प्रसंग

1 शमूएल 20issä में योनातान और दाऊद के पारस्परिक संवाद की कथा चलती है। शाऊल राजा के रूप में दाऊद को समाप्त करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि दाऊद समर्थन बढ़ा कर उनकी राजसी सत्ता खतरे में डाल देगा। परन्तु योनातान, जो शाऊल का पुत्र है, परख और न्याय की दृष्टि से प्रश्न उठाता है कि हत्या जैसे कृत्य को क्यों उचित ठहराया जाए। यह इतिहास बताता है कि राज्यसत्ता के दमन से बचना और पक्षपात से ऊपर उठकर सत्य की चर्चा करना कहाँ तक उचित है।

व्याख्यात्मक निरीक्षण

  • संवाद के माध्यम से नैतिक विवेक: योनातान का प्रश्न सीधा है—किस ने क्या किया है, उसे क्यों मारना चाहिए? यह दिखाता है कि गलत के विरुद्ध भी निष्पक्षता आवश्यक है।
  • राजनीति बनाम न्याय: राजा की नीति यदि अन्याय पर टिकी हो तो भी पारिवारिक रिश्ते और सच्ची न्याय-आस्था कहाँ टिकती है, इसका महत्त्व उभर कर सामने आता है।
  • संयम और कूटनीति: योनातान की प्रतिक्रिया में साहस और संयम दोनों झलकते हैं; वह पिता को सावधानी से सही मार्ग दिखाने की कोशिश कर रहा है।

थीमात्मक सं lata

  1. पारिवारिक कर्तव्य बनाम राष्ट्र-नीति
  2. निष्पक्षता बनाम सत्ता-स्वार्थ
  3. न्याय की रक्षा के लिए संवाद का पथ

संदर्भित वाक्य और सरल व्याख्या

आलंबन के तौर पर नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसेस में छुपे संकेत मिलते हैं—इनमें शाऊल के अत्याचार की प्रवृत्ति, दाऊद के लिए योनातान की सुरक्षा, और अन्य दायित्व दर्शाए जाते हैं:

- 1 शमूएल 20:1–3: यौनातान दाऊद की स्थिति स्पष्ट करते हैं और पिता के विरुद्ध कमर कसते हैं।

- 2 शमूएल 1:11–12: निष्पादन के सामने सत्य की रक्षा की मांग; यह दिखाता है कि नीतिगत निर्णयों में भी नैतिकता का पालन चाहिए।

- प्रस्थान: भिन्न संदर्भों में न्याय और प्रेम की कसौटी द्वंद्व में पड़ती है, परन्तु भय के आधार पर अराजक निर्णय उचित नहीं बनते।

संक्षिप्त प्रेरक takeaway

नीति और सत्ता के दबाव के भीतर भी नैतिक विवेक को उठाए रखना चाहिए। योनातान का प्रश्न यह संकेत देता है कि किसी के जीवन का मूल्य किसी भी निर्णय से ऊँचा है; सत्य और न्याय के लिए संवाद और संयम जरूरी हैं।

नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरणवार्ग शामिल हो सकते हैं, यदि उपलब्ध हों। उद्धरण की समकक्षता के लिए वे मूल पाठ के अनुरूप ही उद्धृत हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 20:32 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

मत्ती 27:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 27:23 (HINIRV) »
राज्यपाल ने कहा, “क्यों उसने क्या बुराई की है?” परन्तु वे और भी चिल्ला-चिल्लाकर कहने लगे, “वह क्रूस पर चढ़ाया जाए।”

1 शमूएल 19:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 19:5 (HINIRV) »
उसने अपने प्राण पर खेलकर उस पलिश्ती को मार डाला, और यहोवा ने समस्त इस्राएलियों की बड़ी जय कराई। इसे देखकर तू आनन्दित हुआ था; और तू दाऊद को अकारण मारकर निर्दोष के खून का पापी क्यों बने?”

लूका 23:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लूका 23:22 (HINIRV) »
उसने तीसरी बार उनसे कहा, “क्यों उसने कौन सी बुराई की है? मैंने उसमें मृत्यु दण्ड के योग्य कोई बात नहीं पाई! इसलिए मैं उसे पिटवाकर छोड़ देता हूँ।”

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें