Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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1 शमूएल 20:1 1 शमूएल 20:2 1 शमूएल 20:3 1 शमूएल 20:4 1 शमूएल 20:5 1 शमूएल 20:6 1 शमूएल 20:7 1 शमूएल 20:8 1 शमूएल 20:9 1 शमूएल 20:10 1 शमूएल 20:11 1 शमूएल 20:12 1 शमूएल 20:13 1 शमूएल 20:14 1 शमूएल 20:15 1 शमूएल 20:16 1 शमूएल 20:17 1 शमूएल 20:18 1 शमूएल 20:19 1 शमूएल 20:20 1 शमूएल 20:21 1 शमूएल 20:22 1 शमूएल 20:23 1 शमूएल 20:24 1 शमूएल 20:25 1 शमूएल 20:26 1 शमूएल 20:27 1 शमूएल 20:28 1 शमूएल 20:29 1 शमूएल 20:30 1 शमूएल 20:31 1 शमूएल 20:32 1 शमूएल 20:33 1 शमूएल 20:34 1 शमूएल 20:35 1 शमूएल 20:36 1 शमूएल 20:37 1 शमूएल 20:38 1 शमूएल 20:39 1 शमूएल 20:40 1 शमूएल 20:41 1 शमूएल 20:42



1 शमूएल 20:12 पर टिप्पणी — दाऊद और योनातान की मित्रता का प्रमाण
यह श्लोक इस बात का स्प्ष्ट उदाहरण है कि कैसे वहम-युक्त राजनीति के बीच भी सच्ची मित्रता और ईमानदार रिश्ते जीवित रहते हैं। योनातान दाऊद से कह रहा है कि वह इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की शपथ को स्मरण रखे और वही समय बताए जब उसे दाऊद के बारे में भला लगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
जल्दी से स्पष्ट करें कि तल्मा-युद्ध की स्थिति में दाऊद राजा बनना चाहता है, परंतु सशंकित राज्य-अधिकार संभावित खतरे के कारण योनातान का संबंध उसे ईमानदारी से बताने पर निर्भर है। जब योनातान कह रहा है कि वह कल या परसों अपने पिता से भेद पाते ही दाऊद को सूचित करेगा, वह यह भी दर्शाता है कि उनका रिश्ता सत्ता से ऊपर है।
व्याख्यात्मक विचार
महत्वपूर्ण क्रॉस-रेफरेंसेस
- सेला: 1 शमूएल 20:12 के प्रकार्य में योनातान की प्रतिज्ञा दाऊद के प्रति उसकी स्थिर मित्रता को पुष्ट करती है, जो आगे की घटनाओं में भी गवाह है।
- 1 शमूएल 20:16-17: योनातान की निष्ठा दाऊद के प्रति स्पष्ट रहती है; दोनों मित्र एक-दूसरे के पक्ष के लिए जोखिम उठाने को तैयार दिखते हैं।
- प्रेषित इमान: इस बातचीत से दिखता है कि चुनाव-समय में नैतिकता और सच्चाई सबसे आगे रहते हैं, भले राजनीतिक लाभ होते हों या नहीं।
हिंदी में तुलनात्मक टिप्पणियाँ
हिनिर्व संस्करण में यह श्लोक सीधे और सहज भाषा में है, जो रिश्ते की ईमानदारी और साहस को उभारता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष और व्यावहारिक takeaway
योनातान का यह वचन मित्रता की जिम्मेदारी और सत्य के प्रति वफादारी का नमूना है। हर रिश्ते में जहाँ सत्ता या खतरे हों, वहाँ सच्चे मित्र एक-दूसरे के भले के लिए सच से परहेज़ नहीं करते, बल्कि समय-समय पर खुले रूप से संवाद करते हैं।
इस परिच्छेद का पाठक के लिए छोटा नीति-नोट: मित्र के साथ कठिन बातें साझा करें, पर निर्भीक सत्य के साथ और प्रेम के साथ।