1 शमूएल 29:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब पलिश्तियों के सरदार अपने-अपने सैकड़ों और हजारों समेत आगे बढ़ गए, और सेना के पीछे-पीछे आकीश के साथ दाऊद भी अपने जनों समेत बढ़ गया।

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1 शमूएल 29:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

तुम्हारे सामनेImmediate Setting: 1 शमूएल 29:2

तब पलिश्तियों के सरदार अपने-अपने सैकड़ों और हजारों लेकर आगे बढ़ गए, और सेना के पीछे-पीछे आकीश के साथ दाऊद भी अपने जनों समेत बढ़ गया। यह पंक्ति दाऊद के जीवन के एक संग्रामपूर्ण समय का चित्र है, जब वह फिलस्तियों की सेना के साथ इस्राएल के सीमाओं पर अवस्थित है। पलिश्तियों के युद्ध-परिदृश्य में आकीश, जो दाऊद के मित्रतापूर्ण प्रवास के बीच एक प्रमुख श्रेष्ठ थे, उनका साथ देता दिखता है, परन्तु इसी डोर में दाऊद एक बार फिर अपने दायित्वों और पहचान के साथ आंका गया है।

कथा का निहितार्थ: परमेश्वर और विश्वास

यह दृश्य हमें यह संकेत देता है कि अच्छे और बुरे के बीच की जंग अक्सर बाहरी विपरीतताओं से नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वासी के समर्पण से तय होती है। दाऊद एक बार फिर अपने नागरिक-रिश्तों, राज्य-निष्ठा और परमेश्वर की योजना के प्रति अपने दायित्व का सामना कर रहा है। भगवान के आशीर्वाद के बिना भी, सत्य यह है कि वह कभी-भी संकट से मुक्त नहीं रहा; परन्तु विश्वास और ईमानदारी से किया गया क्रम उसे प्रस्तुत करता है कि वह किस दिशा में जा रहा है।

शब्दों और मिश्रित चित्रों की स्पष्टता

■ पलिश्तियों की सशस्त्र टुकड़ियाँ: यह चित्र एक बाहरी खतरे की स्पष्ट परिणति है—युद्ध के समय राष्ट्रों के बीच संघर्ष।

■ आकीश के साथ दाऊद और उसकी पार्टी: यह संकेत देता है कि वह उस सीमा पर है जहाँ उसकी पहचान और स्थान की पुष्टि के लिए निर्णय लिए जाते हैं।

अन्य संदर्भ और प्रेरक विचार

• पूर्वकथा: 1 शमूएल 27–28 में दाऊद पलिश्ती क्षेत्र में रहते हुए अपनी सुरक्षा के लिए एक चाल चलता है; यह कड़ी दिखाती है कि विश्वस्त विमान और विकल्प अक्सर मानसिक नैतिक परीक्षणों के साथ आते हैं।

• दया और न्याय की परख: शमूएल समेत अन्य संदर्भों में यह दिखता है कि परमेश्वर के साथ विश्वास रखने वालों के लिए सुरक्षित मार्ग वही है जो विनम्रता और ईमानदारी से भरा हो।

क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

  • यहोशू 1:9 — साहस और परमेश्वर के साथ विश्वास बनाए रखना चाहिए, क्योंकि वह हमारे साथ है।
  • 1 समूएल 28:6-7 — परमेश्वर से निर्देश की कमी पर संकेत; नबी और पंथ की कमी के समय में भी विश्वास की परीक्षा होती है।
  • भजन 56:3-4 — विपत्ति के समय परमेश्वर में आश्रय लेने से भय कम होता है।

इन सभी संदर्भों में संकेतक यही है कि कठिन समय में भी परमेश्वर के निर्देश और विश्वास की स्थिरता ही मार्गदर्शक हो सकती है।

आज का अनुप्रयोग

हममें से प्रत्येक के लिए यह पाठ वह अवसर देता है जब हम यह पूछते हैं कि कौन-सी दिशा हमारी आस्थाओं के अनुरूप है। जीवन के युद्धों में, चाहे वह नैतिक, सामाजिक या व्यक्तिगत हो, परमेश्वर के साथ निर्भयता बनाए रखना और अपने कर्मों को उनके अनुरूप ढालना ही सच्चे विश्वास की कसौटी है। यह समझनी चाहिए कि संकट में भी ईमानदारी, नैतिक धैर्य और परमेश्वर-निर्देश को प्राथमिकता दें।

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1 शमूएल 29:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 शमूएल 28:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 28:1 (HINIRV) »
उन दिनों में पलिश्तियों ने इस्राएल से लड़ने के लिये अपनी सेना इकट्ठी की तब आकीश ने दाऊद से कहा, “निश्चय जान कि तुझे अपने जवानों समेत मेरे साथ सेना में जाना होगा।”

यहोशू 13:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहोशू 13:3 (HINIRV) »
(मिस्र के आगे शीहोर से लेकर उत्तर की ओर एक्रोन की सीमा तक जो कनानियों का भाग गिना जाता है; और पलिश्तियों के पाँचों सरदार, अर्थात् गाज़ा, अश्दोद, अश्कलोन, गत, और एक्रोन के लोग), और दक्षिणी ओर अव्वी भी,

1 शमूएल 29:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 29:6 (HINIRV) »
तब आकीश ने दाऊद को बुलाकर उससे कहा, “यहोवा के जीवन की शपथ तू तो सीधा है, और सेना में तेरा मेरे संग आना जाना भी मुझे भावता है; क्योंकि जब से तू मेरे पास आया तब से लेकर आज तक मैंने तो तुझ में कोई बुराई नहीं पाई। तो भी सरदार लोग तुझे नहीं चाहते।

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