1 शमूएल 29:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

दाऊद ने आकीश से कहा, “मैंने क्या किया है? और जब से मैं तेरे सामने आया तब से आज तक तूने अपने दास में क्या पाया है कि मैं अपने प्रभु राजा के शत्रुओं से लड़ने न पाऊँ?”

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1 शमूएल 29:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का स्पष्ट सार

1 शमूएल 29:8 में दाऊद अपनी निर्भीकता और निष्क्रिय न होकर हर स्थिति में सत्यापन-पात्र भूमिका की मांग करता है। आकीश से कहता है कि उसने क्या किया है जिससे उसे राजा के साथ शत्रुओं से लड़ने में कमी हो या उसे नीचा माना जाए?

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह संदर्भ शाऊल के समय के विभाजन के भीतर आता है, जब दाऊद फिलस्तीन के साथ एक असली द्वंद्व में है और वह राजा आकीश के साम्राज्य में सुरक्षा की तलाश में है। आकीश उसे अपने दास के रूप में मानते हैं, पर दाऊद यह स्पष्ट करना चाहता है कि उसका उद्देश्य न तो राजा के विरुद्ध विरुद्ध है और न ही उसकी निष्ठा में कहीं कोई संदेह। यह संवाद यह दिखाता है कि दाऊद ने अपने आप को एक सेतु-व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है जो राजा के प्रति वफादार है, फिर भी उसके जीवन-परिणामों के लिए सचेत और तैयार है।

व्याख्यात्मक निष्कर्ष

- दाऊद आत्म-संरक्षण की एक पटरी पर है: वह अपने प्रभु राजा के शत्रुओं से लड़ने के अपने अवसरों के बारे में स्पष्ट है और राजा आकीश के साथ अपनी निष्ठा और व्यवहार के बारे में स्पस्ट-पत्र देता है।

- यह वक्तव्य उसकी निष्ठा और ईमानदारी का प्रमाण है; वह किसी प्रकार के छल-छद्म के बिना अपने राज-कामी इरादों को उघाड़ रहा है ताकि विश्वास-योग्य बने।

- परमेश्वर के चयनित राज्य के भाग के रूप में दाऊद की journeys में यह एक चेतावनी है कि जो लोग राजा के साथ जुड़ते हैं, वे भी अपने आचरण और निष्ठा के प्रति उत्तरदायित्व लें।

छोटा विषय-वस्तु सूची

  • दाऊद की स्पष्ट वफादारी और अपने आप को अपनावे का आग्रह
  • शत्रुओं के विरुद्ध लड़ने के अवसर पर नीति-निर्णय की महत्ता

अनुयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेस

1) 1 शमूएल 28:17 — Saul की समीक्षा और दाऊद की स्थिति के बारे में विरोधाभास; यह दिखाता है कि दाऊद की स्थिति कितनी संवेदनशील थी कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, उसकी ईमानदारी से समझौता नहीं हुआ।

2) 1 शमूएल 24:11-12 — दाऊद की विनम्रता और अपनी सुरक्षा के लिए शांति उत्पन्न करने की कोशिश; यह संकेत देता है कि दाऊद अपनी परिस्थिति में कैसे नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।

3) नम्रता और धैर्य का पाठ— भिन्न संदर्भों में दाऊद की नीति और आचार का संयम, जो आगे उसके सिंहासन के लिए प्रेरित भूमिका देता है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जो स्थितियाँ दाऊद के लिए चुनौतीपूर्ण थीं, उनमें भी उसने सत्य और निष्ठा से काम लिया। हमारा संदेश है कि कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदार रहना और अपने उद्देश्य के प्रति स्पष्ट होना चाहिए। एक विश्वसनीय सदस्य बनना, समाज में विश्वास बनाये रखना, और अपने प्रभु के साथ निर्णय लेते समय सत्य का समर्थक बनना—यही कदम हैं जो दाऊद की तरह हमारी आत्मा को मजबूत करते हैं।

सूत्रधार उद्धरण (युक्त): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—इनमें से निम्नरेखा मुक्त स्रोतों से उद्धरण उपलब्ध हैं यदि चाहें तो बताकर मांगे जा सकते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 29:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैं उपस्थित हूँ; इसलिए तुम यहोवा के सामने, और उसके अभिषिक्त के सामने मुझ पर साक्षी दो, कि मैंने किस का बैल ले लिया? या किस का गदहा ले लिया? या किस पर अंधेर किया? या किस को पीसा? या किस के हाथ से अपनी आँखें बन्द करने के लिये घूस लिया? बताओ, और मैं वह तुम को फेर दूँगा?” (प्रेरि. 20:33)

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फिर उसने कहा, “मेरा प्रभु अपने दास का पीछा क्यों करता है? मैंने क्या किया है? और मुझसे कौन सी बुराई हुई है?

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और तू अपने दास से कृपा का व्यवहार करना, क्योंकि तूने यहोवा की शपथ खिलाकर अपने दास को अपने साथ वाचा बँधाई है। परन्तु यदि मुझसे कुछ अपराध हुआ हो, तो तू आप मुझे मार डाल; तू मुझे अपने पिता के पास क्यों पहुँचाए?”

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