Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 3:1 2 राजाओं 3:2 2 राजाओं 3:3 2 राजाओं 3:4 2 राजाओं 3:5 2 राजाओं 3:6 2 राजाओं 3:7 2 राजाओं 3:8 2 राजाओं 3:9 2 राजाओं 3:10 2 राजाओं 3:11 2 राजाओं 3:12 2 राजाओं 3:13 2 राजाओं 3:14 2 राजाओं 3:15 2 राजाओं 3:16 2 राजाओं 3:17 2 राजाओं 3:18 2 राजाओं 3:19 2 राजाओं 3:20 2 राजाओं 3:21 2 राजाओं 3:22 2 राजाओं 3:23 2 राजाओं 3:24 2 राजाओं 3:25 2 राजाओं 3:26 2 राजाओं 3:27


2 राजाओं 3:21 का संदर्भ और महत्व
पद यह बताता है कि मिस्र के मोआबियों के राजा-बहनों के साथ शत्रुता के समय, अन्य दोनों देशों के राजा मिलकर मोआब को चुनौती दे रहे हैं। यह घटना एक मिश्रित आक्रामक स्थिति को दर्शाती है जहाँ क्षेत्रीय शक्तियाँ एक साथ उठती हैं। ':'यह सुनकर कि राजाओं ने हमने युद्ध के लिये चढ़ाई की है… वे सब बुलाकर इकट्ठे हुए… सीमा पर खड़े हुए' से एक संगठित आक्रमण की तैयारी स्पष्ट होती है; परन्तु यहाँ मोआबी सेना की अवस्था हथियार बाँधने योग्य थी, यह बताता है कि खतरे के बावजूद सुरक्षा और तैयारी के संकेत हैं।
केंद्रीय अर्थ
इस verse में देवदत्त संकेत है कि मोआबियों के पास बाहरी खतरे के विरुद्ध एक मौजूदा संघर्ष का अनुभव था और संकट के समय वे एक साथ मिलकर सुरक्षा और योजना बना रहे थे। यह दिखाता है कि परमेश्वर के लोग जब बाहर से खतरा देखते हैं, तब वे एकजुट रहते हैं, परन्तु उनकी सामुदायिक तैयारी और आत्म-विश्वास का स्रोत कभी-न-कभी परमेश्वर की योजना से जुड़ा होता है।
मुख्य विषय
संबद्ध ग्रन्थ से संकेत
- प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, अक्सर राष्ट्र-युद्ध से पहले नेताओं के समूह मिलकर योजना बनाते थे; यह पंक्ति यह निश्चय देती है कि मोआब और उसके सहयोगी यह समझते थे कि खतरा वास्तविक है।
- यह हमें यह स्मरण दिलाता है कि संकट के समय सही समुदायिक निर्णय और सुरक्षा-व्यवस्था आवश्यक है।
अनुभवजनक व्यावहारिक विचार
जब हम जीवन के संघर्ष देखते हैं—या आध्यात्मिक संघर्ष—तो पहली चिंता न हो कि कठिनाई कितनी बड़ी है, बल्कि कैसे सामूहिक रूप से समन्वयित होकर मार्ग निकाला जाए। पुराने नीति-उद्धरणों की तरह, मोआबी सेना की तैयारी दर्शाती है कि योजना बनाना और साहस रखना एक साथ चलता है। परमेश्वर यदि हमारा भागीदार बनें, तो भय घटता है और साहस बढ़ता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके प्रयोजन
1) भूमिका-पूर्वक: प्रार्थना और नेतृत्व की योजना पर जोर देता है; यह घटनाक्रम दिखाता है कि समुदाय एक साथ प्रभु की योजना के अनुरूप कैसे ढलता है।
2) एकात्मता बनाम भय: संकट के समय एकता कैसे काम करती है, इसकी दृष्टि देता है।
3) तैयारी और भरोसा: हथियार बाँधना जैसे व्यवहारिक कदम—यही दिखाता है कि विश्वास में भी व्यावहारिकता आवश्यक है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 3:21 हमें सिखाता है कि संकट के समय एकता और सही तैयारी जरूरी है, पर असली विजय तब है जब हम परमेश्वर के मार्गदर्शन पर निर्भर रहते हैं। युद्ध की वास्तविकता दिखती है, लेकिन परमेश्वर के साथ जुड़े रहने से मार्ग स्पष्ट होता है।
यादगारी उद्धरण (मैक्थ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क)
यह सन्दर्भ उन पुराने_PUBLIC-domain टिप्पणीकारों के विचारों के अनुरूप है जो संकट के समय सामूहिक निर्णय, तत्परता और परमेश्वर पर निर्भरता—ये तीनों को संतुलित करते हैं।
इस पंक्ति में सीधे उद्धृत विशिष्ट वाक्यांश नीचे नहीं दिए जा रहे; उपलब्ध टिप्पणियाँ—जैसे Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकल्पनात्मक निष्कर्ष—संयुक्त ओचित्य के साथ उपयोग में आते हैं।
Cross-reference में मिलते संकेत: उदाहरणार्थ 1) अन्य राष्ट्रों के साथ संयुक्त योजना, 2) युद्ध-पूर्व सभा और 3) भरोसे के साथ तैयारी की महत्ता—ये सभी विचारों के साथ इस पंक्ति की व्याख्या को और गहराते हैं।