Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 12:1 2 शमूएल 12:2 2 शमूएल 12:3 2 शमूएल 12:4 2 शमूएल 12:5 2 शमूएल 12:6 2 शमूएल 12:7 2 शमूएल 12:8 2 शमूएल 12:9 2 शमूएल 12:10 2 शमूएल 12:11 2 शमूएल 12:12 2 शमूएल 12:13 2 शमूएल 12:14 2 शमूएल 12:15 2 शमूएल 12:16 2 शमूएल 12:17 2 शमूएल 12:18 2 शमूएल 12:19 2 शमूएल 12:20 2 शमूएल 12:21 2 शमूएल 12:22 2 शमूएल 12:23 2 शमूएल 12:24 2 शमूएल 12:25 2 शमूएल 12:26 2 शमूएल 12:27 2 शमूएल 12:28 2 शमूएल 12:29 2 शमूएल 12:30 2 शमूएल 12:31



मुख्य इन्तेज़ार (2 शमूएल 12:4) — एक नैतिक वचन का पाठ
कहावत का सार यह है कि ईश्वर देखकर, और मनुष्य की करुणा को ध्यान में रखकर, दीन-दलित के प्रति अन्याय कितना घटित हो सकता है जब विनम्रता और समानता के आदर्श को छोड़ दिया जाए। यहाँ दानी व्यक्ति, धनकुबेर और निर्दोष भेड़-बकरियों के बीच एक चयन से मोड़ लिया गया है: दोनो के बीच का नैतिक परीक्षण देवयातनाओं की वास्तविक परिसीमाओं को उजागर करता है।
लेखन-परिप्रेक्ष्य और साहित्यिक अध्ययन
यह् भाग सुलैमान के शासनकाल के पश्चात् एक नैतिक कथा का प्रभाव छोड़ता है, जहाँ एक निर्धन व्यक्ति की भेड़ एक अमीर यात्री के भोजन के लिए हंक से छीनी जाती है। यह 2 शमूएल की ਸਾਹिक कथा में एक स्पष्ट जलसा है जो यह दर्शाती है कि सत्यापित न्याय के अनुसार ईश्वर के समक्ष सबके लिये समान मान है। संदर्भ-स्त्रोत के रूप में यह नाटक यहूदियों की सामाजिक व्यवस्था, दया, और दायित्व के प्रश्न उठाता है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
यह पाठ न केवल अन्याय के विरुद्ध एक नैतिक चेतावनी है, बल्कि बड़ी आय का सामयिक अनुपात भी है। दूसरे व्यक्ति के भोजन के लिए अपने पशुओं का उपयोग न कर के, निर्धन की भेड़ को चुरा लेने की प्रवृत्ति से स्पष्ट है कि पूँजीपति या ताकतवर व्यक्ति कैसे कमजोरों की हक़दारी को दबाने में सक्षम होते हैं। ईश्वर के नजदीक न्याय सभी के लिए समान है; अगर धन के पास अधिकार है, तो वह अधिकार भी जिम्मेदारी के साथ जुड़ा होना चाहिए।
पूर्व-आत्मप्रेरणा और बहुवाचन
यहाँ के पात्र एक काव्यात्मक दृष्टि से बताते हैं कि धन के दुरुपयोग से नैतिक समाज ध्वस्त होता है। यह विषय 1) आंतरिक विवेक की कमी, 2) सामाजिक दबाव के कारण गलत निर्णय, 3) दूसरों की भलाई के प्रति असंवेदनशीलता—इन तीनों के संयुक्त परिणाम दिखाता है।
नैतिक और आस्थागत संकेतन
न्याय और करुणा के बीच संतुलन निर्माण एक प्रमुख प्रश्न बनता है: क्या धन, शक्ति और प्रतिष्ठा ईश्वर की सच्ची आशीष हैं यदि वे निर्बलों के अधिकारों का परित्याग कर दें? यह पाठ हमें यह सिखाता है कि ईश्वर की दृष्टि में सही व्यवहार वही है जो सबसे कमजोर के हक की रक्षा करे।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेपित संबंध)
इन संदर्भों से समझ आता है कि बाइबल में धन का उपयोग सही दिशा में हो तो समाज में न्याय बढ़ता है, अन्यथा अत्याचार बढ़ सकता है।
अनुवादित विश्लेषण से प्रश्न-चिन्ह
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 12:4 का पाठ सामाजिक न्याय का एक उभरता हुआ पाठ है: धन और शक्ति की सीमा वही है जो दीन-दलित के हित में काम करे। महत्त्व यह है कि ईश्वर की दृष्टि में सभी के लिए समान अवसर और सुरक्षा हो, और सचेत कार्रवाई से ही नैतिक समाज बन सकता है।
उद्धरण नोट: यदि उपलब्ध हों, तो मूल पंक्तियों से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण और उनके विश्लेषण नीचे जोड़े जाते हैं।