Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 12:1 2 शमूएल 12:2 2 शमूएल 12:3 2 शमूएल 12:4 2 शमूएल 12:5 2 शमूएल 12:6 2 शमूएल 12:7 2 शमूएल 12:8 2 शमूएल 12:9 2 शमूएल 12:10 2 शमूएल 12:11 2 शमूएल 12:12 2 शमूएल 12:13 2 शमूएल 12:14 2 शमूएल 12:15 2 शमूएल 12:16 2 शमूएल 12:17 2 शमूएल 12:18 2 शमूएल 12:19 2 शमूएल 12:20 2 शमूएल 12:21 2 शमूएल 12:22 2 शमूएल 12:23 2 शमूएल 12:24 2 शमूएल 12:25 2 शमूएल 12:26 2 शमूएल 12:27 2 शमूएल 12:28 2 शमूएल 12:29 2 शमूएल 12:30 2 शमूएल 12:31



2 शमूएल 12:27 — तत्कालीन संदर्भ और अर्थ
इस पद के बीच का दृश्य युद्ध-युद्ध के बाद की शांति के क्षण को दर्शाता है। दाऊद ने लोगों के बीच यह संदेश सुना कि यहूदाह के युद्ध-क्षेत्र में अचानक चल रहा भोज-प्रकाश है: योआब दूतों को दाऊद के पास भेजता है कि उसने रब से लड़ा और जलवाले नगर को ले लिया है। यह घटना बिंदुवार दिखाती है कि दाऊद के शासन के समय युद्ध-कामना के बीच ईश्वर की सहायता की प्रतीक्षा और उसके चिह्नों का प्रभाव बना रहता है।
यह पाठ परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
- विश्वास और निर्भरता: दाऊद के समय विश्वस्त सैनिक, शत्रु और देह-राज्य सब कुछ के बीच सत्य यही है कि परमेश्वर का संचालक हाथ ही विजय देता है। योआब के संदेश से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक और सैनिक रणनीतियाँ तो हैं, पर अंतिम जीत ईश्वर की कृपा से ही है।
- प्रत्यक्ष प्रभाव: नगर लेने की घटना से यह संकेत मिलता है कि ईश्वर अपनी बनावटी योजना के अनुसार घटनाओं को मोड़ देता है और मानव समझ से परे परिणाम देता है। यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि जो कुछ भी हमारे नियंत्रण से बाहर हो, उसे भी ईश्वर के हाथों में छोड़ना चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
- रब्बाह से लड़ा: यह अभिव्यक्ति युद्ध की संघर्ष-स्थितियों को दर्शाती है, किंतु यह भी संकेत है कि परमेश्वर की सेना और उसकी योजना, धनुष-बंधन या सैन्य शौर्य से अधिक सत्ता में है।
- जलवाले नगर: यह उस नगर का चित्र है जो युद्ध की तपिश और आग से प्रभावित है; परमेश्वर के साथ जुड़े सेतु के भीतर यह संकेत देता है कि विनाश और उद्धार दोनों उसकी योजना में आते हैं।
अन्य सम्बद्ध ग्रंथ
- 2 शमूएल 5:20: दाऊद ने कहा कि यहोवा ने सहायता की; इसका अर्थ है कि उपर्युक्त विजय ईश्वर की कृपा से है, न कि मानवीय शक्ति से केवल।
- 1 शमूएल 17:47: प्रभु की युद्ध-कला में सत्य है कि लोग और नगर उसकी सिद्धि से बनते और टूटते हैं; यह घटना उसी ध्वनि की पुष्टि करती है।
- योहन्ना 16:33: यीशु ने शांति और प्रेरणा दी है कि संसार में तनाव है परन्तु विश्वास रखने वालों को उसे जीतना होगा; यहाँ भी ईश्वर की सहायता का संकेत मिलता है।
आज की आत्म-प्रयोग
कुल मिलाकर यह पाठ हमें यह सिखाता है कि युद्ध-घड़ी में भी परमेश्वर के निर्देशों को याद रखना चाहिए। दाऊद के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि सफलता केवल सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा से आती है।
अवलेखन उद्धरण ( Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke ) - कहा गया है कि प्रभु की सहायता के बिना मानव शक्ति कुछ भी नहीं कर सकती; यह घटना इस विचार को प्रमाणित करती है कि परमेश्वर ही विजय देता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस: 2 शमूएल 5:20 — प्रभु की सहायता से विजय; 1 शमूएल 17:47 — यहोवा के नाम पर विजय; योहन्ना 16:33 — विश्व में अस्फुटताओं के बीच शांति और साहस।