Old Testament
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2 शमूएल 8:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और बेतह और बेरौताई नामक हदादेजेर के नगरों से दाऊद राजा बहुत सा पीतल ले आया।
2 शमूएल 8:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 8:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 इतिहास 18:8 (HINIRV) »
और हदादेजेर के तिभत और कून नामक नगरों से दाऊद बहुत सा पीतल ले आया; और उसी से सुलैमान ने पीतल के हौद और खम्भों और पीतल के पात्रों को बनवाया।

1 इतिहास 22:16 (HINIRV) »
सोना, चाँदी, पीतल और लोहे की तो कुछ गिनती नहीं है, सो तू उस काम में लग जा! यहोवा तेरे संग नित रहे।”

1 इतिहास 29:7 (HINIRV) »
परमेश्वर के भवन के काम के लिये पाँच हजार किक्कार और दस हजार दर्कमोन सोना, दस हजार किक्कार चाँदी, अठारह हजार किक्कार पीतल, और एक लाख किक्कार लोहा दे दिया।
सीधा मतलब
यह वचन बताता है कि दाऊद ने हदादे-ज़ेर के कुछ नगरों—बेतह और बेरौताई—से बहुत सारा पीतल (ताम्बा) लाया। इससे दाऊद की विजय के फल और जिस संपत्ति को युद्ध में लिया गया, उसके उपयोग का संकेत मिलता है।
संदर्भीय पृष्ठभूमि
2 शमूएल 8 का अध्याय दाऊद के साम्राज्य विस्तार और विजयों का संक्षिप्त वृत्तांत है। यहाँ हदादे-ज़ेर अराम के राजाओं में से एक था, और उसके नगरों पर विजय इज़राइल की सैन्य क्षमता और राजनीतिक प्रभुता को दर्शाती है। युद्ध में जीता गया धातु-भंडार, विशेषकर पीतल, प्राचीन युग में शस्त्र, औजार और मंदिर संबंधी उपकरण बनाने के लिये मूल्यवान संसाधन था।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
1) पीतल का आना — "बहुत सा पीतल" यह बताता है कि विजय न केवल राजनीतिक थी बल्कि आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही। प्रसाधनों का अधिग्रहण शाही खजाने को सुदृढ़ करता और भवन तथा रक्षोपकरण के निर्माण में प्रयोग होता।
2) नगरों के नाम—बेतह और बेरौताई—विशेष विजयस्थलों का संकेत हैं; बीसवीं शताब्दी के शोधकारों की तरह यहाँ स्थानों का विस्तृत इतिहास नहीं दिया गया, पर नामों के उल्लेख से संदेश स्पष्ट है कि दाऊद ने सीमाओं के पार ठोस जीतें हासिल कीं।
3) नैतिक और धार्मिक आयाम—विजय का वर्णन केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं; यह दाऊद के शासन की व्यवस्था, प्रभु-कृत्य और परमेश्वर की परीक्षितता का भी प्रतिबिम्ब है। पुरानी व्याख्याएँ यह भी बताती हैं कि विजय के लाभों का व्यवस्था अनुसार उपयोग आवश्यक था, न कि व्यक्तिगत लोभ के लिए।
थीमों की संक्षिप्त सूची
संबंधित पद और संक्षेप व्याख्या
1) 1 इतिहास 18:8 — यह पद समान घटनाओं का पुनरावलोकन करता है और यह दर्शाता है कि समकालीन इतिहासकारों ने भी दाऊद की विजय और लूटा हुआ माल दर्ज किया।
2) 1 शमूएल 27:7 — यहाँ दाऊद के साहसिक और सैन्य जीवन के पूर्व चरण मिलते हैं; यह बताता है कि दाऊद की सैन्य योग्यता और रणनीति समय के साथ विकसित हुई।
3) शमूएल का उत्तरार्ध और इतिहास-व्यवस्थापकीय ग्रंथ (2 राजाओं के कुछ अंश) — साम्राज्य विस्तार और संसाधन संग्रह का विषय बार-बार आता है, जो यह समझने में मदद करता है कि अधिग्रहित धातु कैसे राजकीय आवश्यकताओं को पूरा करती थी।
पुरानी व्याख्याओं से संक्षिप्त उद्धरण
मत्ती हेनरी ने सामान्य रूप से लिखा है कि विजयों का लाभ सामूहिक उपयोग के लिये होना चाहिए। अल्बर्ट बार्न्स ने टिप्पणी में इस प्रकार का ध्यान दिलाया कि धातु युद्ध और धार्मिक दोनों प्रयोजनों में उपयोगी थी। (ऊपर दिये गए विचारों में इन अर्थों की आत्मसात् की गई है।)
प्रायोगिक असर
यह पद आज के पाठक को स्मरण कराता है कि नेतृत्व में सफलता के परिणामों का न्यायपूर्ण और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग आवश्यक है। सामरिक या व्यावसायिक जीत से मिलने वाला संसाधन निजी स्वार्थ से ऊपर समुदाय की भलाई, सुरक्षा और सार्वजनिक कार्यों के लिए समर्पित होना चाहिए।
समेकित सार
2 शमूएल 8:8 छोटा सा वचन है परन्तु यह विजय के भौतिक फल, शासन के प्रशासनिक पहलू और परमेश्वर द्वारा स्थापित व्यवस्था की याद दिलाता है। दाऊद की ओर से प्राप्त पीतल केवल संपदा नहीं थी, बल्कि राज्य के निर्माण और पूजा, सुरक्षा तथा कल्याण के उपकरण बनने का साधन थी। यह पाठ नेतृत्व-उत्तरदायित्व और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की सिख देता है।