Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 23:21 पर टिप्पणी—महापाप की याद और दया की उद्घोषणा
मुख्य interpretive बिंदु: यहेजकेल 23:21 में परमेश्वर के द्वारा इशारा किया गया गैहों के बीच के पुर्नविचार और चमत्कारिक स्मृति का क्षण है—जब इस्राइल की बहनें मिस्र के प्रतीक में अपने बचपन के पापों को याद कराती हैं, परन्तु इसी स्मृति के साथ उद्धार का मार्ग भी उभर के आता है। यहाँ “महापाप” की स्मृति से तात्पर्य यह है कि इतिहास की पुनरावृत्ति से बचने के लिए ईश्वर की चीत्कार और दया की मांग है।
कथानक और साहित्यिक संदर्भ
यशायाह-युद्ध की गाथा की तरह यहेजकेल के गद्य-गीत यहाँ एक प्रतीकात्मक चित्रण प्रस्तुत करते हैं। इसमें मिस्र का उल्लेख एक सदियों पुराने पाप की स्मृति को उजागर करता है, जो इस्राइल के लिए दुष्कर और अनुभवजन्य था। लेखक ने बचपन के पाप को “महापाप” माना है—यानी एक ऐसी अवस्था जिसमें निश्चयपूर्वक गलत मार्ग अपनाने की प्रवृत्ति बनी रही। इसका उद्देश्य पाठक को यह दिखाना है कि परमेश्वर इतिहास के हर पहलू को देखता है: स्मृतियाँ, अफसोस, और परिवर्तन की आशा एक साथ उपस्थित हैं।
गूढ़ता और theological significance
यह संदेश निम्न बातों को गहराई से उभारता है:
Cross-references—कथन के साथ सूक्ष्म संबद्धताएँ
1) नियम 26:41—जहाँ स्मृतियाँ और चेतावनियाँ मिलकर धार्मिक परिशुद्धि बनाती हैं। यह दिखाता है कि पाप कैसे फिर से लौट सकता है, और वैसी स्थिति से बचने के लिए आस्था की एकाग्रता कितनी आवश्यक है।
2) यिर्मयाह 3:22—यहोवा की दया के लिए लौट आओ, क्योंकि तुम्हारे अपराध से तुम्हारे पास मुक्त होने की आशा है। यहग्रंथ यह दर्शाता है कि स्मृति के पश्चात भी दया और नवीनीकरण संभव है।
3) रोमियों 6:21—पाप की परिणति क्या थी? अब तुम्हें परिणाम स्पष्ट दिखते हैं; परिवर्तन की राह पवित्र आत्मा की सहायता से संभव है।
विचार-विमर्श के प्रश्न
सार और अनुपूरक निष्कर्ष
यहेजकेल 23:21 से हमें यह सीख मिलती है कि अतीत की गलतियों की स्मृति केवल दंड की जगह, परिवर्तन की प्रेरणा बन सकती है। परमेश्वर उन इतिहास-क्षणों को भी ग्रहण करता है जब वह अपने लोगों के प्रति चीत्कार देता है और उन्हें सचेत करता है। उद्धार का मार्ग उसी स्मृति के साथ, विश्वास और कृतज्ञता के बीच प्रयोग होता है—जहाँ दया का रौशन उजाला है, और पाप का अंधकार पीछे छूट सकता है।
उद्धरण नोट
यदि आवश्यक हो, इस पाठ के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के छोटे स्पष्ट उद्धरण नीचे उद्धृत किए जा सकते हैं—परन्तु पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।