Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 23:45 पर दृश्य-विवेचन
प्रश्न में प्रस्तुत वाक्य यहेजकेल की कठिन figura-चित्रण का भाग है, जहाँ परमेश्वर अपने चुने हुए समुदाय की भ्रष्ट-यातनाओं को उद्घाटित करते हैं। यहहर एकिश्वासी असल में यह देखता है कि धर्मी न्याय को कैसे चलना चाहिए—न केवल व्यक्तियों के कर्मों के आधार पर, बल्कि उनके आचार-विचार के संपूर्ण प्रभाव के कारण। यह विशेष श्लोक यह बताता है कि जब लोग बहोत अधिक भ्रष्ट हो जाते हैं, तब ईश्वर की विभीषिका के योग्य कदम उठाने पड़ते हैं।
मुख्य अर्थ
शब्दों का सीधा आशय यह है कि धर्मी व्यक्ति उन लोगों के विरुद्ध न्याय करते हैं जो व्यभिचार और हत्या के दोषी माने जाते हैं। यहाँ ज्यादातर पाठ यह संकेत करता है कि व्यवहारिक न्याय की मांग तब उभरती है जब समाज में भ्रष्टाचार गहराई तक प्रवेश कर चुका हो, और परमेश्वर के मानक के अनुरूप ही सज़ा तथा विवेकपूर्ण निर्णय उचित माने जाते हैं।
मुख्य विषय
दिलचस्प cross-reference (संक्षेप)
संकेतित पाठ्यांशों में यह विचार उभरता है कि धार्मिक नेताओं और समुदाय के लिए पवित्रता के मानक बनाए रखना आवश्यक है, ताकि दुष्कर्मों से समाज में डर और सुधार दोनों बने रहें।
व्यावहारिक विचार
आज के संदर्भ में भी यह संदेश चेतावनी देता है कि अन्याय के विरुद्ध खड़े रहना और सत्ता-शासन के भीतर भी निष्पक्षता बनाए रखना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि किसी के अपराध पर निर्भर करते हुए भी सच्चे न्याय की प्रक्रिया निष्कपट और सचेत ढंग से पूरी करनी चाहिए, ताकि दयालुता और सच्चाई दोनों सम्मिलित रहें।
संक्षेप
यहेजकेल 23:45 एक कठोर परन्तु आवश्यक संकेत है: अगर समाज में गहरे भ्रष्टाचार फैले, तो धर्मी कानून के अनुसार उचित न्याय करना आवश्यक है ताकि पवित्रता बनी रहे और जवाबदेही की भावना पुष्ट हो। यह विषय पुराने अभिलेखों में बहुधा पनपता रहा है—सांस्कृतिक ढांचे के भीतर न्याय और पवित्रता की संतुलित भूमिका को समझना हर समय उपयोगी है।
उद्धरण टिप्पणी: Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से यदि उपलब्ध हों तो शिशुओं की भाषा में हूबहू नहीं, पर उनके संकेतों के अनुरूप संक्षेप में समाहित किया गया है; पाठ में वे स्वीकृत वाक्यांश सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं।