Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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पंक्ति का तत्कालीन संदर्भ और अर्थ
यहेजकेल 23:22 में यहहोबा/ओहोलीबा के संदर्भ में ईश्वर का कहना है कि उनके मित्रों को उभार कर उनकी ओर से उन्हें आकर्षित किया जाएगा ताकि उनका मन फिर गिरा हुआ हो। यह दृश्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों की पतनों, अविश्वास और हृदय के टटोलने पर भी उद्धारक योजना के भीतर क्रिया कर रहा है, यहाँ मित्रों के माध्यम से उनके विरुद्ध परिस्थितियाँ बनती हैं ताकि वे उलटें और भरोसे को फिर से खोजें।
यह पाठ परमेश्वर के चरित्र और विश्वास पर क्या उजागर करता है
- परमेश्वर अपने लोगों के घृणा-भरे स्वभाव के बावजूद भी उन तक पहुँच बनाते हैं; वह उन्हें स्पष्ट रूप से चेतावनी और मार्गदर्शन देता है।
- यह पाठ यह दिखाता है कि ईश्वर अपनी उदार दया के साथ विपत्ति को भी उद्देश्यपूर्ण बनाते हैं, ताकि लोगों की दृष्टि सुधरे और वे पथ पर लौटें।
महत्वपूर्ण शब्दों और भावनाओं की सरल व्याख्या
- मित्रों को उभारना: यहाँ 'मित्र' से आशय उन लोगों से है जो पहले उनके साथ रिश्ते में थे या उनके जीवन में नजदीकी प्रभाव डालते थे; यह व्यवस्था God's sovereign plan से जुड़ी है जिसमें नज़दीकी परिवर्तनों के द्वारा परमेश्वर पुनरुद्धार के अवसर देता है।
- तेरे मन फिर गया: यह पलटाव, विश्वासघात या अविश्वास के कारण हुआ मानसिक परिवर्तन है, जिसे ईश्वर पुनः दिशा देकर मोड़ना चाहता है।
संबद्ध आयतें (Cross-references) और उनका संक्षिप्त सम्बन्ध
नोट: इन संदर्भों में पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है; केवल विषयगत जुड़ाव बताये गये हैं ताकि पाठक देख सकें कि कैसे एक समुदाय में विश्वास फिर से उभर सकता है।
आज के जीवन में अभ्यास (Present-day application)
- कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर की राह ढूँढना: मानें कि विपत्ति कभी-कभी आत्म-निर्दय नहीं होती, बल्कि उसे सुधार का अवसर बनाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
- सुसंवाद और समुदाय की भूमिका: मित्र और निकट सम्बन्धी भी कभी-कभी प्रेरक बनते हैं; उन्हें ईश्वर के हाथ में एक साधन के रूप में देखें।
- विश्वास की पुनर्स्थापना: अपने हृदय को फिर से ईश्वर की ओर मोड़ना और विश्वास के नायाब केंद्र पर लौटना एक जागृति का संकेत हो सकता है।
मैथ्यू हेन्न्री, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क से संक्षिप्त संयोजन
इन सार्वजनिक domain टिप्पणीकारों के शब्दों से प्रेरित विचार इस पंक्ति के सार को साफ करते हैं—ईश्वर अपनी गलतियों के बावजूद पथ दिखाते हैं, और उनके उद्देश्य लोगों को पुनः विश्वास के मार्ग पर ले आना है।
उद्धृत करने योग्य संक्षिप्त पंक्तियाँ (यदि उपलब्ध हों):
“क्योंकि परमेश्वर है जो दिल की खोज करता है और जो भी मार्ग में गिरा हो उसे उठाकर फिर से चलना सिखाता है।”
ध्यान दें: यहाँ ऊपर दी गई पंक्तियाँ वहाँ के टिप्पणीकारों के विचारात्मक स्वरूप को हिंदी में सारगर्भित करते हुए प्रयुक्त हैं; वास्तविक पूर्ण उद्धरण यदि मौजूद हों, तो केवल संक्षिप्त विचार प्रस्तुत कर रहे हैं।