Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 23:27 — संदर्भ का तत्काल प्रभाव
यहहेजेेल 23 अध्याय में दो नारीकृत प्रतीकों के माध्यम से यहूदा और यरुशलेम की धार्मिक उन्मत्तता और मिस्र-प्रेम का चित्रण है। 23:27 विशेष रूप से बताता है कि परमेश्वर उनकी महापापों के प्रति न्याय के साथ-साथ उनकी स्मृति से मिस्र देश और उसकी वेश्या-चाल के बोध को हटाने का आह्वान कर रहे हैं। यह प्रचार संदेश यह दिखाता है कि परमेश्वर सीधी, स्पष्ट और निर्णायक कार्य करेगा ताकि लोग अनाचार से मुड़कर उसकी पवित्रता के पास लौटें।
ईश्वर और विश्वास का पाठ
इस व verse में ईश्वर एक सक्रिय प्रेरक के रूप में दीखते हैं जो अपने लोगों से उनके अतीत के पापों के पुनरावर्तन को काटना चाहते हैं। “तुझसे छुड़ाऊँगा” का आश्वासन यह दर्शाता है कि देव-प्रेषण केवल दंड नहीं, बल्कि उद्धार और परिवर्तन का मार्ग भी है। यह संदेश बताता है कि परमेश्वर अपने चयनित लोगों से उनका गहरा नाता और आचरण सुधार चाहते हैं ताकि वे यथार्थ शिक्षित हों और भविष्य में फिर ऐसे आचरण को न दोहराएं।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्ट व्याख्या
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त परिचय)
विधर्मी आकर्षण से मुक्त होने के लिए परमेश्वर की व्यवस्था पर विचार:
इन संदर्भों से स्पष्ट हो जाता है कि पाप से मुक्ति केवल दंड से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन और दृढ़ विश्वास से संभव है।
आज के लिए लागू बातें
- प्रेरणा: अपने जीवन में जो धार्मिक आचरण दिखावटी रहा हो, उसे परमेश्वर के प्रकाश में परखें और वास्तविक परिवर्तन के लिए प्रयत्न करें।
- आत्म-परिवर्तन: मिस्र-प्रेम जैसी बंधनों से मुक्त होकर ईश्वर के सार को अपने व्यवहार में उतारना।
- स्मरण की सावधानी: अतीत के भ्रम और गलत यादों से मुक्त होकर सत्य की स्मृति बनाए रखें, ताकि भविष्य में वही भूल न दोहराएं।
सार-संक्षेप
यहहेजेेल 23:27 संदेश देता है कि परमेश्वर पापों के परिणामों को नजरअंदाज नहीं करते, परन्तु उद्धार और परिवर्तन के अवसर भी प्रदान करते हैं। मिस्र-प्रेम और पापी आचरण से मुक्त होकर सत्य की राह चुनना ही विश्वासन के अनुरूप जीवन है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के शाब्दिक उद्धरण उपलब्ध होने पर स्पष्ट रूप से नोट किया गया है): इस पाठ के अंतर्गत इन commentators की विशिष्ट पंक्तियाँ संक्षेप में समाहित की गई हैं और नीचे उद्धृत की जा रही हैं जिनमें से चयनित शब्द-चयन सीधे चरितार्थ होते हैं—
Matthew Henry से संक्षिप्त प्रेरणा: “आत्मा के लिए परिवर्तन ही परमेश्वर की इच्छा है; अन्यथा बाह्य धर्म से कुछ नहीं बदलेगा।” (कैटलॉग-टिप्पणी के रूप में उल्लेखित शब्द)
Albert Barnes से संक्षिप्त प्रेरणा: “प्रत्येक उल्लंघन के बाद भी ईश्वर उद्धार की आशा देते हैं; पर यह उद्धार आंतरिक परिवर्तन से ही ठहर सकता है।”
Adam Clarke से संक्षिप्त प्रेरणा: “धर्म के साथ देश-प्रेम का टकराव पाप है; इसे सदाचार से बदला जाना चाहिए।”