Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 23:8 पर एक स्पष्ट अर्थ
यह रूपकात्मक वाक्य कहता है कि मिस्र में जो व्यभिचार उसने सीखा था, उसने उसे नहीं छोड़ा; बचपन से ही लोगों ने उसके साथ कुकर्म किया, उसकी छातियाँ मींजीं और तन-मन से उसके साथ व्यभिचार किया गया था। सरल शब्दों में कहें, तो यह कहानियों का विषय है कि वह नदी-सीधा जीवन पथ जिस पर वह थी, उसे उसका नैतिक पतन प्रभावित करता रहा; बाहरी आकर्षण और आंतरिक विवेक एक साथ डगमगा गये थे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहेजकेल की किताब में एकाधिक प्रतीकों के माध्यम से यहूदियों की पाप और उद्धार के बारे में गहन चिंतन प्रस्तुत है। यह अध्याय दो बहनों (आहोल्या-ओल्लीहा) की कथा-प्रतिमाओं के रूप में बुरे उदाहरण देता है—याद दिलाने के लिए कि व्यभिचार और आत्मविश्वासघाती अलंकरण किस तरह लोगों को ईश्वर के प्रति विश्वास से दूर करते हैं। मिस्र इस संदर्भ में एक शक्तिशाली, पर दुष्प्रभावी आकर्षण माना गया है; यह दिखाता है कि जब बाहरी सभ्यता या संविदान मनुष्यों के भीतर के नैतिक विवेक को दबा देती है, तब परिणामस्वरूप आत्मा व्यभिचार में लिप्त हो सकती है।
interpretive observations
एक छोटी थीम सूची
संबद्ध पद्यांश (Cross-references) और उनकी संक्षिप्त व्याख্যা
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम कैसे सुरक्षा करें? बाहरी आकर्षण से सावधान रहें; जो चेतावनियाँ ईश्वर की व्यवस्था में हैं, उन्हें टिकाकर रखें। बच्चों-बड़ों के बीच प्रभावी नैतिक शिक्षा और आचरण-केन्द्रित विवेक बनाते रहें; मिस्र के उदाहरण से सीखें कि आचरण में लचीलापन न रखने से जीवन-यात्रा संघर्षपूर्ण हो सकती है।
आपका प्रार्थना/व्यावहारिक कदम
1) आत्म-निरिक्षण: क्या मेरी रोज़मर्रा की गतिविधियाँ ईश्वर के साथ मेल खाती हैं? 2) परिवार-संवाद: बच्चों के साथ खुलकर नैतिक शिक्षा पर चर्चा। 3) समुदायिक समर्थन: पवित्र आचरण के लिए प्रतिज्ञाएं और नीयतें साझा करें।
नोट: नीचे उद्धृत तीन प्रसिद्ध पैग़ंबर-टिप्पणियाँ मूल स्रोत से संजोया गया एक संक्षिप्त सार हैं; पूर्ण पाठ से छोटे उद्धरण केवल इनके सीमित हिस्सों तक ही आते हैं:
Matthew Henry (सार): “The indulgence of present pleasures may ruin future comforts.”
Albert Barnes (सार): “Enticements of Egypt, in a spiritual sense, symbolize not merely pleasure but a habitual attachment to corrupt ways.”
Adam Clarke (सार): “Where the heart is given to idolatry, there will be obedience to sin as a rule, not a fault of one act.”
द्वारा: यहेजकेल 23:8 की व्याख्या में उन संदेशों को समाहित किया गया है जो बाहरी प्रभावों के बावजूद आत्मिक प्रतिफल के लिए आंतरिक धर्म-चेतना की आवश्यकता पर जोर देते हैं।