Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेज़केल 23:38 का सरल अर्थ
इस पदकथन का केंद्र यह है कि पवित्र स्थान और विश्रामदिन दोनों के प्रति असंयत और पापपूर्ण बर्ताव किया गया है। ईश्वर ने पवित्रता और विश्राम के संकेतों को मानने की अपेक्षा की, पर उन लोगों ने उन दोनों को संयुक्त रूप से अशुद्ध किया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहेज़केल की किताब में यहूदी राष्ट्र के असफल धार्मिक नेतृत्व और पापी व्यवहारों पर गम्भीर टिप्पणी है. यहां भगवान के पवित्र स्थान और उनके उपासना के समय-चिन्हों का अपमान स्पष्ट रूप से सामने आता है। सामुदायिक पाप ने मंदिर के पवित्र आचरण को ढहाया और विश्रामदिनों को भी अपवित्र किया, जो उनकी धार्मिकता की एक-अंशहीनता को दर्शाता है।
व्याख्यात्मक विचार
संश्लेषित मुख्य बिंदु
अनुसन्धान-योग्य क्रॉस-रेफरेंसेस
- इज़राइल के इतिहास में मंदिर-अपवित्रता के परिणाम: समुदाय के व्यवधान और प्रतिशोध की चेतावनी देता है, ताकि लोग पवित्रता के महत्व को समझें।
- यीशु के समय के विश्राम-उच्चारण: विश्राम दिन के उद्देश्य और उनके उद्धार-यात्रा से जुड़ा सार समझने में मदद मिलती है।
- पुराने नियम के नैतिक सिद्धांत: पवित्रता के नियम और उपासना के क्रम में संगति बनाये रखना आवश्यक है।
नोट: नीचे उद्धृत विवरणों में प्रत्येक क्रॉस-रेफरेंस का पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है, पर उनका सार संदर्भित किया गया है।
प्रयोगात्मक निष्कर्ष
हमारे लिए सीख यह है कि बाहरी पूजा शुद्ध हो, पर हृदय-विश्वास का भी पवित्र होना अनिवार है। जब विश्रामदिन और मंदिर-उपासनाएँ भी ढर्रे के साथ नहीं चलतीं, तो आंतरिक बन्धन टूटते हैं। ईश्वर चाहते हैं कि हम आध्यात्मिक पवित्रता के साथ सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन को भी व्यवस्थित रखें।