Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 23:3 — सरल अर्थ
इस पद का सीधा अर्थ है: वे अपने बचपन से ही वेश्या-कार्य में लिप्त रहीं, वे मिस्र में इसकी शुरुआत करती हैं और वहाँ उनका विवाहित जीवन भी शुरू होता है। यहeyes-पाठ एक प्रतीकात्मक कहानी के रूप में बहुविध निहितार्थ देता है: निर्बलता, उमीद की कमी, और आत्म-उत्पीडन के विरुद्ध ईश्वर का न्याय और प्रेरणा के साथ पुनःस्थापना का संदेश।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यहेजकेल किताब में दो बहनें (ओनन और अन्य) द्वारा देशों के आचरण का प्रतीकात्मक चित्रण मिलता है। यहाँ मिस्र एक तरह से दुविधा, भटकाव और भक्तिभाव के अभाव का प्रतिनिधित्व करता है। प्राचीन इब्रानी संदर्भ में वेश्या-गतिविधि एक नैतिक और आध्यात्मिक अव्यवस्था को बताती है जिसे ईश्वर चेतावनी के साथ दिखाते हैं।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
सूत्रधार टिप्पणियाँ (संक्षेप)
हिनिर्व अनुवाद के अनुसार यह पाठ व्यक्त करता है कि सामाजिक और पारिवारिक जीवन में निरंतर भटकाव से मति-भ्रष्टता बढ़ती है। यहूदियों के लिए मिस्र का चित्रण न केवल एक भौगोलिक स्थान है, बल्कि भटकाव और गैर-ईश्वर-आधारित जीवन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत है।
कौम-संबंधी मार्गदर्शन (छोटी सूची)
अन्य संदर्भ-रोशनी (संक्षेप में)
1) यह नागरिक-राजनीतिक अव्यवस्था के संकेत देता है: जब लोग इश्वर के नियमों से विचलित होते हैं, तो राष्ट्रीय जीवन पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
2) परमेश्वर की करुणा और न्याय—भटके हुए लोगों के लिए उद्धार की राह खुली रहती है, यदि वे मन से लौटें।
3) नैतिक-सत्य और प्रतिफल: कर्मों के फल का तात्पर्य है कि सजग हों तो जीवनस्थापन संभव है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पाठ चेतावनी देता है कि प्रारम्भ से ही गलत मार्ग चुनना जीवन के कई आयामों को प्रभावित कर सकता है। परन्तु परमेश्वर के साथ वापसी और परिवर्तन की राह सदैव खुली है। समुदाय और व्यक्ति दोनों को पथ-भ्रष्टता से बचने के लिए आत्म-जागरूकता और श्रद्धा-निष्ठा को बढ़ाना चाहिए।
पाठ-आवृत्ति के लिए クロस संदर्भ
कृपया नीचे दिए तीन क्रॉस-रेफरेंस देखें जिनमें बाइबल के अन्य हिस्सों में भटकाव, दया और पुनःस्थापन की विचारधारा का स्पर्श मिलता है—
नोट: इस पंक्ति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उन्हीं उद्धरणों का संक्षिप्त उल्लेख आवश्यक हो तो उपलब्ध शुद्ध पाठों से ही लिया गया है; पूर्ण टेक्स्ट के लिए उनके पब्लिक-डोमेन कमेंटaries देखें।