Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50



उत्पत्ति 16:2 पर टिप्पणी (HINIRV)
इस पद में सारै और अब्राम के बीच उत्पन्न होने वाला एक विश्वसनीय मानवीय संघर्ष उभरता है। सारै यह कहती हैं कि परमेश्वर ने उनकी कोख बंद कर रखी है और इस कारण वे अपनी दासी हगर को अब्राम के पास भेजना चाहती हैं ताकि उनके घर में बेटा हो सके। यह घटनाक्रम सीधे तौर पर अगली पीढ़ी के बारे में है और परमेश्वर के वचनों के पूर्ण प्रभाव के अनुरोधों के बीच मानवीय प्रयासों की जड़ता भी दिखाता है।
केंद्रीय अर्थ
यह verse दिखाता है कि ईश्वर के निर्णय और मनचाहे मार्ग के सामने लोगों की धारणाएँ और आशाओं कैसे संघर्ष करती हैं। सारै अपने समय के सामाजिक-परिवारिक नियमों के अनुसार व्यवहार करती हैं, पर यह भी स्पष्ट है कि उनका सुझाव अब्राम के लिए आकर्षक लगता है। परिणामस्वरूप दुनिया में एक नया पुत्र आकाश के बजाय मानवीय योजनाओं से जुड़ता है, जो आगे कहानी में चुनौतीपूर्ण परिणामों को जन्म देता है।
मुख्य विषय
हदबन्धी cross-reference (संभावित):
1) रोम 4:18-21 — अब्राहम के विश्वास की परीक्षा और परमेश्वर के वादे पर स्थिर रहने की शिक्षा।
2) गल 4:23 — इस्माइल और इसहाक के बीच के अंतर्यात्रा के प्रतीकात्मक अर्थ।
3) याक(bound) 1:4 — धीरज की कमी न आने देने के लिए ईश्वर की गहरी इच्छा।
वास्तविक-विचार (practical reflection)
हम में से कितने समय ईश्वर की योजना को पूरी तरह समझने के बजाय अपनी बुद्धि से समाधान निकालना चाहते हैं? यह पाठ याद दिलाता है कि स्वायत्त निर्णय कभी-कभी भरे-भरकम परिणाम देता है, जिन्हें बाद में ठीक करना मुश्किल हो सकता है। धैर्य, विश्वास और परमेश्वर की मार्गदर्शक योजना के अनुरूप चलना अधिक सुरक्षित है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
16:2 का यह वर्णन मानव-योजना बनाम परमेश्वर की योजना के संघर्ष को उजागर करता है। सारै का अनुरोध और अब्राम का सहमति-स्वर उनके जीवन के अगले चरणों में संघर्ष के बीज बो देता है। हमें प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर के बोल और वादे समय की कसौटी पर खरे उतरते हैं; हमारे भाग में धैर्य और विश्वास आवश्यक है ताकि परमेश्वर की सही योजना पर चल सकें, भले अभी उसे समझना कठिन हो।
नोट: नीचे के उद्धरण केवल संकलन स्रोतों से लिए गए हैं—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—यदि उपयुक्त कहीं exact वाक्य हों तो उक्त स्रोतों के अनुसार संक्षेप में दिखाए गए हैं।