Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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उत्पत्ति 20:3 का सीधा अर्थ
रात को परमेश्वर ने अबीमेलेक के सपने में चेतावनी दी: जो स्त्री अबीमेलेक ने अपने साथ रखी है, वह उसकी पत्नी है, इसलिए उसे मरना होगा। इसका मतलब है कि परमेश्वर का सम्मान तब तक बना रहेगा जब तक उसके लोगों के संबंध और विवाह-संरक्षित नियमों का पालन होता है।
संदर्भ-संदर्भ और पृष्ठभूमि
इस अध्याय में अबीमेलेक राजा के रूप में स्थानीय लोगों पर शासन कर रहा था। Previously, Abraham और Sarah के साथ उसकी यात्रा के समय भी पति-पत्नी की झूठी स्थितियाँ बनीं थीं। परमेश्वर ने सपने में अबीमेलेक को सचेत किया ताकि वहSarah को उसकी पत्नी न समझे और अन्याय न करे। यह घटना मानव-निर्भरता और ईश्वरीय कृपा के बीच सन्तुलन दिखाती है: परमेश्वर अपने विश्वासी परिवार को सुरक्षा देता है और अन्याय होने से रोकता है।
interpretive observations
थीमेटिक लघु सूची
Related passages (संक्षेप एक-एक स्पष्ट संदर्भ और उनका तात्पर्य)
1) उत्पत्ति 12:10-20 जैसी घटनाओं में भी परमेश्वर ने आत्मीय सुरक्षा और सत्य की रक्षा के लिए मार्ग दिखाया; यहाँ भी परिवार की रक्षा में ईश्वर का हस्तगत निर्देश है।
2) उत्पत्ति 39:9 में जोय रूम में पवित्रता और पनपते समय नये अनुभव मिलते हैं—यही संदेश कि भगवान नैतिक पवित्रता को महत्व देते हैं।
3) निकायों के बीच विवाह-संरक्षण के प्रमुख सिद्धांत के लिए मत्ती 19:4-6 के साथ पुरानी वचन-सारणी का समन्वय पाठक को विवाह की पवित्रता का स्मरण कराता है।
कुल मिलाकर व्याख्या (संक्षिप्त निष्कर्ष)
यह पद ईश्वरीय निगरानी और संरक्षण की पुष्टि करता है: जब भी मानव गलत कदम उठाते हैं, परमेश्वर अपने विश्वासी परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। अबीमेलेक को सपने के माध्यम से सचेत कर उपचार किया गया ताकि उसकी नीति-न्याय में असंतुलन न रहे और परिवार के पवित्र रिश्ते की गरिमा ब intact रहे।
व्यावहारिक takeaway
अनुभावी टिप्पणी: Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेन पाठ्यांशों से यह संकेत मिलता है कि ईश्वर अपनी सत्ता से गलत निर्णयों पर भी प्रतिक्रिया करते हैं ताकि न्याय और पवित्रता बनी रहे. इस पाठ में उद्धृत स्पष्ट शब्द नहीं मिलते, पर इन टिप्पणीकारों के सामान्य निष्कर्षों के अनुसार ईश्वर की प्रेरणा और सुरक्षा बनी रहती है, जब मनुष्य अपने रिश्तों के प्रति ईमानदार रहते हैं।
Cross-references
- उत्पत्ति 12:10-20 में भी परिवार-सुरक्षा के लिए भगवान की चेतावनी का संकेत मिलता है।
- मत्ती 19:4-6 विवाह के पवित्र कानून का स्मरण कराता है।
नोट: नीचे दिए गए तीन चर्चित मौलिक टिप्पणीकारों के सहमत बिंदुओं की सामान्यता है: उनके उद्धरणों से प्रेरित विचारों का प्रयोग पाठ की धारणा को स्पष्ट करने के लिए किया गया है.