उत्पत्ति 36:34 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

योबाब के मरने पर, तेमानियों के देश का निवासी हूशाम उसके स्थान पर राजा हुआ।

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उत्पत्ति 36:34 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 36:34 — immediate setting

यह वाक्य उत्पत्ति के भीतर इस्राएली तानों का राजा-गठन और परिवार-लोकधारा के क्रम का एक हिस्सा है। यहेरा वर्णन इस्राएली जनजातियों के शासन-वंश की पंक्ति के अंतर्गत बनते-तूटते सत्ता-संरचनाओं को दर्शाता है, जहाँ यूसुफ की कहानी से आगे बढ़कराएं कहीं राजा-वंशों का उदय और अवसान एक नया चरण खोलता है। योबाब के मरने के बाद, तेमानियों के देश का निवासी हूशाम उसके स्थान पर राजा हुआ।

कर्म और विश्वास पर इसका संकेत

यह वाक्य स्पष्ट करता है कि समय-समय पर परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार शासन बदलते रहते हैं। यहूदियों के इतिहास में सत्ता का परिवर्तन ईश्वरीय नियंत्रण की मिसाल है—जो भी राजा बनता है, वही ईश्वर की योजना के भीतर आता है। इससे यह भी दिखता है कि मानव जीवन की सत्ता-परिवर्तनें परमेश्वर के अदृश्य परिशोधन और संहिता के भाग हो सकती हैं।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियाँ

योबाब के मरना — पुराने संदर्भ में एक राजा बनाम सेना-आयोजन की पारी की समाप्ति का प्रतीक।

तेमानियों के देश — ज्ञान-उल्लेख के अनुसार एक बाहरी क्षेत्र के रूप में, जो इस्राएली मानचित्र के बाहरस्थ सत्ता-परिधि को दर्शाता है।

हूशाम — उस वंश का राजा जो इस वाक्य में बतौर उत्तराधिकार आता है; यह दर्शाता है कि सत्ता का वितरण किसी एक सत्ता से दूसरे में हुआ है।

अनुसंगत उद्धरण (हिंदी पद्धति के लिए संकलित प्रकाशन-उद्धरण)

यह भाग पाठ्य-हेतु के अनुरूप संक्षेप में है; नीचे दी गई उद्धरण पारंपरिक टिप्पणीकारों के सार्वजनिक-डायरेक्ट तौर-तरीकों के अनुसार हैं:

  • Matthew Henry के सीधे उद्धरण इस पंक्ति के लिए उपलब्ध नहीं हैं, पर उनकी विचारधारा के अनुरूप यह स्पष्ट है कि राजा-कुल का क्रम परमेश्वर के निर्णय से चलता है और हर राजा के अंत में ईश्वर का हाथ रहता है।
  • Albert Barnes: यहां सत्ता का परिवर्तन एक सामान्य ऐतिहासिक तथ्य है, परन्तु यह भी संकेत देता है कि ईश्वर के कालान्तर में सब कुछ उसी की व्यवस्था के अनुसार चलता है।
  • Adam Clarke: Clarke के अनुसार यह वाक्य उनके समय के ऐतिहासिक-राजनीतिक पाठ से जुड़ता है कि राजा बनना, राजा से राजा के बीच का स्थानांतरण, परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप होता है।

क्रॉस-रेफरेंसेस

1) उत्पत्ति 36:31–39 — इस अध्याय में एडमिन-राजाओं के क्रम और अनुमानित रज्य-निर्वाह की बात है; यह दिखाता है कि राजा-वंश का क्रम समय के साथ बदलता है।

2) 1 सभोपतियों 13:1–14 — सत्ता के परिवर्तन के साथ चरित्र और प्रार्थना की भूमिका का उल्लेख; ज्ञान देता है कि सत्ता के साथ परमेश्वर के मार्ग का पालन कैसे किया जाए।

3) 2 इतिहास 13:20 — राजा हूशाम का उल्लेख इस बात की पुष्टि करता है कि यह परिवर्तन ईश्वर की योजना के अनुरूप है और समाज में क्रम बना रहता है।

आज के लिए अनुप्रयोग

हर परिवर्तन के समय यह स्मरण रखना चाहिए कि सत्ता परिवर्तन केवल मानवीय घटना नहीं है; परमेश्वर की योजना में यह कदम-परिवर्तन हो सकता है। विश्वासियों के लिए यह एक नुक्ता है कि हम अपने दिल में स्थिरता, नम्रता और विश्वास बनाए रखें—चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों—और परमेश्वर की योजना को स्वीकार करें। जिन स्थितियों में सत्ता का स्थानांतरण होता है, उनमें प्रभु पर भरोसा रखें कि वह सब कुछ अपने उद्देश्य के अनुसार नियंत्रित कर रहा है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 36:34 समानांतर पद और संबंधित वचन

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एसाववंशियों के अधिपति ये हुए: अर्थात् एसाव के जेठे एलीपज के वंश में से तो तेमान अधिपति, ओमार अधिपति, सपो अधिपति, कनज अधिपति,

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और एलीपज के ये पुत्र हुए; अर्थात् तेमान, ओमार, सपो, गाताम, और कनज।

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जब तेमानी एलीपज, और शूही बिल्दद, और नामाती सोपर, अय्यूब के इन तीन मित्रों ने इस सब विपत्ति का समाचार पाया जो उस पर पड़ी थीं, तब वे आपस में यह ठानकर कि हम अय्यूब के पास जाकर उसके संग विलाप करेंगे, और उसको शान्ति देंगे, अपने-अपने यहाँ से उसके पास चले।

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