Old Testament
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हबक्कूक 1:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह उन सब मनुष्यों को बंसी से पकड़कर उठा लेता और जाल में घसीटता और महाजाल में फँसा लेता है; इस कारण वह आनन्दित और मगन है।
हबक्कूक 1:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 1:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 4:2 (HINIRV) »
परमेश्वर यहोवा अपनी पवित्रता की शपथ खाकर कहता है, देखो, तुम पर ऐसे दिन आनेवाले हैं, कि तुम काँटों से, और तुम्हारी सन्तान मछली की बंसियों से खींच ली जाएँगी।

यिर्मयाह 16:16 (HINIRV) »
“देखो, यहोवा की यह वाणी है कि मैं बहुत से मछुओं को बुलवा भेजूँगा कि वे इन लोगों को पकड़ लें, और, फिर मैं बहुत से बहेलियों को बुलवा भेजूँगा कि वे इनको अहेर करके सब पहाड़ों और पहाड़ियों पर से और चट्टानों की दरारों में से निकालें।

भजन संहिता 10:9 (HINIRV) »
वह सिंह के समान झाड़ी में छिपकर घात में बैठाता है; वह दीन को पकड़ने के लिये घात लगाता है, वह दीन को जाल में फँसाकर पकड़ लेता है।
पठन-सारांश
हबक्कूक 1:15 में वर्णित चित्र एक युद्धरत और निर्मम शिकारी का है जो वातावरण में ऊँचा बैठकर शिकार की खोज करता है, उसे फँसाने के जालों में खींचता है और उसी पर आनन्दित होता है। यहाँ बात किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि न्याय और दण्ड की उस शक्ति की है जो अन्याय को पकड़कर उपेक्षा और स्वार्थ से भरे लोगों के उपर प्रभाव डालती है।
अध्याय में संदर्भ
हबक्कूक का पहला अध्याय नबी की प्रार्थना और आश्चर्य से शुरु होता है: वह निष्ठुरता और दुष्टता को देखकर प्रश्न करता है कि परमेश्वर कब न्याय करेंगे। अध्याय के मध्य में ईश्वर एक सक्षम राष्ट्र (बल्कि बबेल का राजा) को न्याय के उपकरण के रूप में प्रकट करते हैं—जो शिकार की तरह लोगों को उठा लेता है। पद 15 उसी कड़ी का चित्रात्मक वर्णन है जिसमें दुष्ट शक्ति की चारित्रिक क्रूरता और उसकी संतुष्टि दिखती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है कि दुष्टता अंततः पकड़ी जाती है और उपेक्षा से भरे कर्मों का परिणाम आता है। साथ ही यह भी सतर्क करता है कि न्याय कभी-कभी अप्रत्याशित माध्यमों से आता है, और देव की कार्रवाईें मनुष्यों की अपेक्षाओं से भिन्न हो सकती हैं। पद में दिखाई गई संतुष्टि दुष्ट के मनोवृत्ति को उजागर करती है — वह अपने बल और सादा परिणामों पर आनन्दित है, परन्तु नबी का आशय पाठकों को चेतावनी देना है कि यही परिस्थितियाँ परमेश्वर के निर्णायक न्याय की तैयारी भी हो सकती हैं।
संबंधित शास्त्रपद और तुलना
व्यवहारिक अनुप्रयोग
यह पद हमें दो तरह से प्रभावित करता है: पहले, यह व्यक्तिगत आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता सिखाता है—हमारे कर्म और उपयोग से क्या हम दूसरों के साथ अन्याय कर रहे हैं? दूसरे, यह सिखाता है कि जब दुनिया में हिंसा और अन्याय दिखाई दें, तो हमें धैर्य और परमेश्वर की विधि पर विश्वास रखना चाहिए। न्याय का अभाव हमेशा स्थायी नहीं रहता; भगवान के तरीके मानवीय अपेक्षाओं से भिन्न हो सकते हैं।
नोट्स और पुरानी टीकों से झलक
मैथ्यू हेनरी के विचारों में इस प्रकार की चित्रावली को परमेश्वर के उपदेश और लोगों के परीक्षण के रूप में समझा गया है; एक संक्षिप्त उद्धरण मिलती है: “...यह दिखाया जाता है कि कैसे दुष्टों की चालें स्वयं उनकी गिरफ्त का कारण बनती हैं।” (मैथ्यू हेनरी)
एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क ने भी इस पद की व्याख्या करते समय यह रेखांकित किया कि न्याय कभी-कभी अन्य राष्ट्रों और साधनों से होता हुआ आता है, और नबी का आश्चर्य इस बात से है कि परमेश्वर अपनी सूक्ति कैसे पूरा करते हैं।
निष्कर्ष
हबक्कूक 1:15 एक कठोर परंतु सार्थक चेतावनी है: दुष्टता अपने-आप में स्थायी आनंद नहीं देती; वह अक्सर वही जाल बिछाती है जिसमें अंततः वह स्वयं फँस सकती है। साथ ही यह पद हमारे विश्वास को परखता है—हमें यह स्वीकार करना है कि ईश्वर का न्याय मानवीय रूपरेखा से परे काम कर सकता है, और हमें निष्पक्षता, धैर्य तथा आत्म-समाशोधन के मार्ग पर चलना चाहिए।