Old Testament
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हबक्कूक 1:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तेरी आँखें ऐसी शुद्ध हैं कि तू बुराई को देख ही नहीं सकता, और उत्पात को देखकर चुप नहीं रह सकता; फिर तू विश्वासघातियों को क्यों देखता रहता, और जब दुष्ट निर्दोष को निगल जाता है, तब तू क्यों चुप रहता है?
हबक्कूक 1:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 1:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 34:15 (HINIRV) »
यहोवा की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उनकी दुहाई की ओर लगे रहते हैं। (यूह. 9:31)

यिर्मयाह 12:1 (HINIRV) »
हे यहोवा, यदि मैं तुझसे मुकद्दमा लड़ूँ, तो भी तू धर्मी है; मुझे अपने साथ इस विषय पर वाद-विवाद करने दे। दुष्टों की चाल क्यों सफल होती है? क्या कारण है कि विश्वासघाती बहुत सुख से रहते हैं?

भजन संहिता 5:4 (HINIRV) »
क्योंकि तू ऐसा परमेश्वर है, जो दुष्टता से प्रसन्न नहीं होता; बुरे लोग तेरे साथ नहीं रह सकते।
हबकूक 1:13—सत्य दृष्टि और न्याय की चपेट
पाठ संदर्भ में यह अनुभाग एक जमाने में इब्राहीमिक दुष्ट-न्याय के विरुद्ध दया और धर्म के पक्ष में सवाल उठाने वाले नबी की शिकायत का हिस्सा है। हबक्कूक प्रभु से यह पूछते हैं कि क्यों निर्दोषों के लिए अन्याय चलता रहता है, क्यों परमेश्वर जो शुद्ध है, भयावह उत्पात और दुष्टों के बोलबોલ को चुप रहते देखता है। यहां परमेश्वर की दिव्य दृष्टि की शुद्धता, दुष्टता की नीति-निर्माण और न्याय की प्रत्यक्ष कमी के बीच एक उग्र संघर्ष उभरकर सामने आता है।Verse 13 में नबी पंक्तियाँ प्रस्तुत करते हैं कि तेरी आँखें ऐसी शुद्ध हैं कि तू बुराई को देख ही नहीं सकता; परन्तु उत्पात को देखकर चुप नहीं रह सकता। यह विवेचना न केवल अकालीन न्याय का प्रश्न है, बल्कि एक नैतिक-धार्मिक परीक्षण है कि कैसे परमेश्वर पवित्र रहते हुए भी अशुद्धताओं के बीच क्रोध या दया का सही संतुलन बनाते हैं।
मूल अर्थ और centrales meaning
यह पद परमेश्वर की पवित्रता और उसकी न्याय-योजना के दायरे को स्थापित करता है: परमेश्वर बहुत पवित्र है ताकि वह बुराई को सहन करे; फिर भी वह उत्पात को देखकर चुप नहीं रहता, वह दुष्टों के खिलाफ अपनी न्याय-योजना चलाता है। नबी यह बताने का प्रयास करते हैं कि दिव्य दृष्टि से सब क्या दृष्टिगोचर है—बुराई की खुली मौजूदगी, परन्तु उसकी सच्चाई और समयानुसार निर्णय।
मुख्य विषय
अन्य आयाम और क्रॉस-रेफरेंस
• पूर्ववर्ती अन्याय-जवाबी प्रश्नों के सन्दर्भ में यशायाह 5:20 जैसे कवरेज देखें, जहाँ सत्य और न्याय के बीच संघर्ष को प्रमुखता मिलती है।
• दानिएल 4:35 में परमेश्वर की सार्वभौमिक शासन की दृष्टि आई है कि सभी दुनिया उसके सामने उठते-बैठते रहते हैं और न्याय उसका माना गया है।
• रोम 12:19-21 में भी कहा गया है कि मतलबी प्रतिशोध नहीं लें, परन्तु परमेश्वर ही न्याय करेगा, ताकि प्रेम तथा दया बनी रहे।
व्यावहारिक चिंतन
हम कैसे जवाब दें? यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि बुराई के बीच भी परमेश्वर की पवित्रता और न्याय के लिए सतर्क रहे। अन्याय के समय में प्रत्यक्ष क्रोध का नहीं, बल्कि विश्वास-आख्यान का रुख अपनाएं। हम दुष्टों के कारण न तो निराश हों और न ही हिंसा अपनाएं; बल्कि प्रभु की न्याय-सारथी में भरोसा रखें।
संक्षेप निष्कर्ष
हबक्कूक 1:13 परमेश्वर की पवित्रता के प्रकाश में यह कहता है कि बुराई को देखते ही परमेश्वर इसे प्रतिक्रियात्मक रूप से छोड़ नहीं सकता; उत्पात के विरुद्ध उसकी चुप भी नहीं रहती। यह verse एक नैतिक स्मरण दिलाता है कि समय आने पर वह न्याय करेगा और सही को सही समय पर स्थिति देगा।
उद्धरण-नोट
इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से समेकित सार लिया गया है। नीचे उनके विचारों से संक्षेप उद्धरण सम्मिलित हैं, यदि उपयुक्त हुए:
“तू बुराई को देख ही नहीं सकता”— परमेश्वर की पवित्र नेत्रों की शुद्धता की अभिव्यक्ति; जो बुराई को चिह्नित किए बिना नहीं रह सकता।
“तब तू विश्वासघातियों को क्यों देखता रहता है?”— नबी पूछते हैं कि कैसे प्रभु ऐसी परिस्थिति में भी मौन रहते हैं, जब नैतिकता दुरुपयोगी बन रही हो।
Cross-references में दी गई विचार-सार, वास्तविक पाठ-परिप्रेक्ष्य के साथ, यह याद दिलाती है कि न्याय का समय परमेश्वर ही तय करते हैं, न कि मानवीय प्रतिक्रियाएं।